नीति आयोग ने जारी किया एसडीजी इंडिया इंडेक्स 2020-21, केरल टॉप पर, बिहार रहा फिसड्डी

एसडीजी इंडिया इंडेक्स 2020-21 जारी (फोटो-Twitter/Niti aayog)

नीति आयोग (NITI Aayog) के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने गुरुवार को एसडीजी इंडिया इंडेक्स का तीसरा संस्करण जारी किया.

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    नई दिल्ली. केंद्र सरकार के थिंक टैंक नीति आयोग (NITI Aayog) ने एसडीजी इंडिया इंडेक्स 2020-2021 (SDG India Index) की रैंकिंग को जारी कर दिया है. इसमें केरल ने अपनी शीर्ष स्थान बरकरार रखा है, जबकि बिहार का प्रदर्शन सबसे बुरा रहा. एसडीजी इंडेक्स के तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय पैरामीटर्स पर प्रगति का मूल्यांकन किया जाता है.

    एक रिपोर्ट के अनुसार केरल ने 75 अंक के साथ शीर्ष राज्य के रूप में अपना स्थान बरकरार रखा, जबकि 74 अंक के साथ हिमाचल प्रदेश और तमिलनाडु को दूसरा स्थान मिला. इस साल के भारत इंडेक्स में बिहार, झारखंड और असम सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले राज्य हैं.

    केंद्र शासित प्रदेशों में चंड़ीगढ़ टॉप पर
    केंद्र शासित प्रदेशों में 79 अंक के साथ चंड़ीगढ़ को शीर्ष स्थान मिला, जिसके बाद 68 अंक के साथ दिल्ली का स्थान रहा. वर्ष 2020-21 में सबसे अधिक बढ़त मिजोरम, हरियाणा और उत्तराखंड ने दर्ज की. उत्तराखंड, गुजरात, महाराष्ट्र, मिजोरम, पंजाब, हरियाणा, त्रिपुरा, दिल्ली, लक्षद्वीप, अंडमान तथा निकोबार द्वीप समूह, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख 65 से अधिक अंक के साथ अग्रणी श्रेणी में रहे.

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    नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने गुरुवार को भारत एसडीजी इंडेक्स का तीसरा संस्करण जारी किया. भारत का कुल एसडीजी इंडेक्स 2020-21 में छह अंकों के सुधार के साथ 60 से बढ़कर 66 अंक हो गया. कुमार ने कहा, ''एसडीजी इंडिया इंडेक्स के जरिए एसडीजी की निगरानी के हमारे प्रयास को दुनिया भर में व्यापक रूप से सराहा गया है. एसडीजी पर एक समग्र इंडेक्स की गणना करके हमारे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को श्रेणीबद्ध करने के लिए यह एक दुर्लभ डेटा आधारित पहल है.

    नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने कहा, ''यह रिपोर्ट हमारे एसडीजी प्रयासों के दौरान तैयार की गई साझेदारी और उसकी मजबूती को दर्शाती है. इससे पता चलता है कि किस तरह मिलकर की गई पहलों के जरिए बेहतर नतीजे पाए जा सकते हैं.''

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    एसडीजी इंडिया इंडेक्स की शुरुआत 2018 में हुई थी
    इस इंडेक्स की शुरुआत दिसंबर 2018 में हुई थी और यह देश में एसडीजी पर प्रगति की निगरानी के लिए प्रमुख साधन बन गया है. पहले संस्करण 2018-19 में 13 ध्येय, 39 लक्ष्यों और 62 संकेतकों को शामिल किया गया था, जबकि इस तीसरे संस्करण में 17 ध्येय, 70 लक्ष्यों और 115 संकेतकों को शामिल किया गया.