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ट्रेन के AC कोच में नहीं मिलेगा कंबल, रेलवे बना रहा है नई नीति

ट्रेन के AC कोच में नहीं मिलेगा कंबल, रेलवे बना रहा है नई नीति

रेल मंत्रालय अब ट्रेन के एसी डिब्बों में कंबल पूरी तरह से बंद करने पर विचार कर रहा है.

रेल मंत्रालय अब ट्रेन के एसी डिब्बों में कंबल पूरी तरह से बंद करने पर विचार कर रहा है.

ट्रेन के AC कोच में नहीं मिलेगा कंबल, CAG रिपोर्ट के बाद रेलवे ला रही है नई नीति

    ट्रेनों में दी जाने वाले कंबल की साफ-सफाई को लेकर CAG (नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक) के सवाल उठाए जाने के बाद रेलवे हरकत में आया है. रेल मंत्रालय अब ट्रेन के एसी डिब्बों में कंबल पूरी तरह से बंद करने पर विचार कर रहा है. इसके अलावा ट्रेन के कोच में एसी का तापमान 19 डिग्री से बढ़ाकर 24  डिग्री करने पर भी विचार जारी है.

    कंबल नहीं देने पर विचार जारी
    मामले की जानकारी रखने वाले रेलवे के एक अधिकारी ने बताया कि कंबल की धुलाई के लिए खादी इंडिया से बातचीत कर रहे है. लेकिन प्रति कंबल की धुलाई पर 110 रुपए का खर्च आ रहा है. इसीलिए कंबल नहीं देने पर विचार चल रहा है.

    इन दो विकल्प पर भी हो रहा है विचार
    सूत्रों का कहना है कि रेल मंत्रालय 2 विकल्पों पर विचार कर रहा है. पहले विकल्प में ट्रेनों में एसी डिब्बों का तापमान बढ़ाया जा सकता है. औसतन तापमान 19 डिग्री से बढ़ाकर 24 किया जा सकता है. तापमान बढ़ाने पर कंबल देने की जरूरत नहीं रहेगी.

    दूसरे विकल्प में कंबल के साथ कवर दिया जा सकता है. कंबल के मुकाबले कवर की धुलाई आसान और सस्ती है. शुरुआत में कोई भी योजना लागू करने से पहले उसे पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर चुनिंदा ट्रेनों में लागू किया जाएगा. इसके बाद प्रोजेक्‍ट कामयाब होने पर सभी ट्रेनों में नई पॉलिसी को लागू किया जाएगा.

    CAG की रिपोर्ट में हुआ बड़ा खुलासा
    सीएजी की हालिया रिपोर्ट में और कंबल की सफाई को लेकर शिकायतों को देखते हुए रेलवे की कंबल को लेकर कुछ कदम उठाने की संभावना पहले ही बन रही थी. सीएजी की रिपोर्ट के अनुसार कई जगह ट्रेन में मिलने वाले कंबलों को 3 साल तक नहीं धोया गया है. रेलवे की मौजूदा व्यवस्था में ट्रेन में एसी कोच में सफर करने पर आपको तकिया, बेडशीट और कंबल मिलता है.

    सीेएजी ने 33 चयनित कोचिंग डिपो में रिव्यू पीरियड के दौरान कंबलों की संख्या और धुले हुए कंबल की संख्या के डाटा का अध्ययन किया. यह अध्ययन 2012-13 से 2015-16 के दौरान इस्तेमाल किए गए कंबलों पर किया गया.

    कैग ने अपने अध्ययन में पाया कि 9 क्षेत्रीय रेलवे के 14 चुने गए कोचिंग डिपो में कोई कंबल ड्राइ वॉश नहीं किया गया था. इसके अतिरिक्त पांच क्षेत्रीय रेलवे के 7 डिपो को छोड़कर किसी भी चुने गए डिपो में लिनेन की सफाई नहीं की गई थी.

    तकिये तो धुले ही नहीं!
    यह तो हुई कंबल की बात अब बात करते हैं रेलवे में मिलने वाले तकिए की धुलाई और सफाई की. मार्च 2016 में रेलवे बोर्ड ने निर्देश दिए कि तकियों की धुलाई प्रत्येक 6 महीने में या जरूरत पड़ने पर पहले भी कम से कम एक बार की जानी चाहिए ताकि प्रत्येक यात्री को साफ तकिये उपलब्ध कराए जा सके. मार्च 2016 से पहले तकिये की धुलाई के संबंध में कोई निर्देश नहीं दिए गए थे.

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    Tags: Indian railway

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