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मोदी सरकार को बड़ी राहत, नवंबर में IIP ग्रोथ बढ़कर 8.4 फीसदी हुई

News18Hindi
Updated: January 13, 2018, 7:29 AM IST
मोदी सरकार को बड़ी राहत, नवंबर में IIP ग्रोथ बढ़कर 8.4 फीसदी हुई
नवबंर में आईआईपी ग्रोथ बढ़कर 8.4 फीसदी रही है. अक्टूबर में आईआईपी ग्रोथ 2.2 फीसदी रही थी. वहीं, साल दर साल आधार पर अप्रैल-नवबंर के दौरान आईआईपी ग्रोथ 5.5 फीसदी से घटकर 3.2 फीसदी रही है.
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Updated: January 13, 2018, 7:29 AM IST
इंडस्ट्री ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है. नवंबर महीने के इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन यानी आईआईपी ग्रोथ के आंकड़ों को देखकर यही लग रहा है. नवंबर में आईआईपी ग्रोथ बढ़कर 8.4 फीसदी रही है.  अक्टूबर में आईआईपी ग्रोथ 2.2 फीसदी रही थी. वहीं, साल दर साल अप्रैल-नवंबर के दौरान आईआईपी ग्रोथ 5.5 फीसदी से घटकर 3.2 फीसदी रही है.

इसको आसान शब्दों में समझें तो इसका मतलब साफ है कि देश की आर्थिक गतिविधियां सुधर रही है. ऐसे में कंपनियों को ज्यादा ऑर्डर मिलेंगे. इससे उनकी आय बढ़ेगी. आय बढ़ने से मुनाफे में भी ग्रोथ आएगी. लिहाजा ज्यादा आम आदमी को भी इसका फायदा रोजगार बढ़ने और नौकरी करने वालों की सैलरी बढ़ने से मिलेगा.

आंकड़ों पर एक नजर 
महीने दर महीने आधार पर नवंबर में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की ग्रोथ 2.5 फीसदी से बढ़कर 10.2 फीसदी रही है. महीने दर महीने आधार पर नवंबर में माइनिंग सेक्टर की ग्रोथ 0.2 फीसदी से बढ़कर 1.1 फीसदी रही है. महीने दर महीने आधार पर नवंबर में इलेक्ट्रिसिटी सेक्टर की ग्रोथ 3.2 फीसदी से बढ़कर 3.9 फीसदी रही है.

महीने दर महीने आधार पर नवंबर में कैपिटल गुड्स की ग्रोथ 6.8 फीसदी से बढ़कर 9.4 फीसदी रही है, वहीं प्राइमरी गुड्स की ग्रोथ 2.5 फीसदी से बढ़कर 3.2 फीसदी रही है. कंज्यूमर ड्युरेबल्स गुड्स की ग्रोथ -6.9 फीसदी से बढ़कर 2.5 फीसदी रही, कंज्यूमर नॉन-ड्युरेबल्स गुड्स की ग्रोथ 7.7 फीसदी से बढ़कर 23.1 फीसदी रही और इंटरमीडिएट गुड्स की ग्रोथ 0.2 फीसदी से बढ़कर 5.5 फीसदी रही है.

क्या होता है आईआईपी
औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) का किसी भी देश की अर्थव्यवस्था में खास महत्व होता है. इससे पता चलता है कि उस देश की अर्थव्यवस्था में औद्योगिक (इंडस्ट्री) गतिविधियां किस गति से बढ़ रही है. आईआईपी के अनुमान के लिए 15 एजेंसियों से आंकड़े जुटाए जाते हैं. इनमें डिपार्टमेंट ऑफ इंडस्ट्रियल पॉलिसी एंड प्रमोशन, इंडियन ब्यूरो ऑफ माइंस, सेंट्रल स्टेटिस्टिकल आर्गेनाइजेशन और सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी शामिल हैं.

सबसे पहले 1937 को आधार वर्ष मानते हुई आईआईपी तैयार किया गया था. इसमें 15 उद्योगों को शामिल किया गया था. तब से अब तक इसमें सात बार संशोधन किया जा चुका है. इंडेक्स को प्रासंगिक बनाए रखने के लिए आधार वर्ष और इसमें शामिल उत्पादों में बदलाव होते रहे हैं.

इंडेक्स में शामिल वस्तुओं को तीन समूहों-माइनिंग, मैन्युफैक्चरिंग और इलेक्ट्रिसिटी में बांटा जाता है. फिर इन्हें बेसिक गुड्स, कैपिटल गुड्स, इंटरमीडिएट गुड्स, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और कंज्यूमर नॉन-ड्यूरेबल्स जैसी उप-श्रेणियों में बांटा जाता है.

आईआईपी में क्या शामिल है
आईआईपी में शामिल इंडस्ट्रीज को तीन प्रमुख समूहों में बांटा गया है- मैन्यूफैक्चरिंग, माइनिंग और इलेक्ट्रिसिटी. आईआईपी में सबसे बड़ा हिस्सा मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर का है. इन तीनों सेक्टर्स में कुल 682 आइटम्स के प्रदर्शन को आंका  जाता है यानी आईआईपी हमें बताता है कि एक निश्चित समय में इनका उत्पादन कैसा रहा विनिर्माण (मैन्यूफैक्चरिंग) की आईआईपी में हिस्सेदारी 75.53% है. खनन (माइनिंग) की इसमें हिस्सेदारी 14.16% और विद्युत उत्पादन (इलेक्ट्रिसिटी) की हिस्सेदारी 10.32% है.
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