इंश्‍योरेंस पॉलिसी खरीदने वालों के लिए जरूरी खबर, IRDAI ने आसान किया ये नियम

इंश्‍योरेंस रेग्‍युलेटर इरडा ने बीमा कंपनियों को अपने ग्राहकों के वीडियो आधारित केवाईसी की मंजूरी दे दी है.
इंश्‍योरेंस रेग्‍युलेटर इरडा ने बीमा कंपनियों को अपने ग्राहकों के वीडियो आधारित केवाईसी की मंजूरी दे दी है.

इंश्‍योरेंस रेग्‍युलेटर एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (IRDAI) ने कोरोना संकट के मौजूदा दौर में केवाईसी प्रक्रिया को आसान बनाने का फैसला लिया है. इसके लिए उसने लाइफ और जनरल इंश्‍योरेंस कंपनियों (Life & General Insurance Companies) को अपने ग्राहकों की वीडियो आधारित केवाईसी (Video Based KYC) करने की मंजूरी दे दी है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 22, 2020, 7:07 AM IST
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नई दिल्ली. इंश्‍योरेंस पॉलिसी खरीदने वाले ग्राहकों (Insurance Policy Buyers) को अब ना तो केवाईसी के लिए कहीं जाने की जरूरत होगी और ना ही किसी एजेंट से मिलने की जरूरत पड़ेगा. दरअसल, इंश्‍योरेंस रेग्‍युलेटर एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (IRDAI) ने लाइफ इंश्‍योरेंस और जनरल इंश्‍योरेंस कंपनियों (Life & General Insurance Companies) को अपने संभावित ग्राहकों की वीडियो आधारित केवाईसी (Video Based KYC) करने की मंजूरी दे दी है.

इरडा ने कहा, केवाईसी की प्रक्रिया को आसान बनाना है मकसद
इरडा के इस कदम से बीमा कंपनियों के अधिकारी कोरोना संकट (Coronavirus Crisis) के इस दौर में ग्राहकों की केवाईसी अनिवार्यता को ऑनलाइन (Online KYC) पूरा कर सकेंगे. इरडा ने सोमवार को कहा कि वीडियो आधारित प्रक्रिया का मकसद विभिन्‍न ऑनलाइन प्‍लेटफॉर्म के जरिये केवाईसी की प्रक्रिया को आसान और ग्राहकों के अनुकूल बनाना है. इससे उनको संक्रमण की चपेट में आने का खतरा भी खत्‍म हो जाएगा. नियामक ने कहा कि बीमा कंपनियां ऐप विकसित कर केवाईसी की प्रक्रिया को ऑनलाइन या वीडियो के जरिये कर सकती हैं.

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विश्‍वसनीयता बनाए रखने को किया जाए कंप्‍लीट वैरिफिकेशन


बीमा नियामक ने कहा कि वीडियो आधारित पहचान प्रक्रिया (VBIP) के जरिये खोले जाने वाले सभी अकाउंट या अन्य सेवाओं को बीमा कंपनियों को कंप्‍लीट वैरिफिकेशन (Complete Verification) के बाद ही शुरू करना होगा. इससे इस प्रक्रिया की विश्वसनीयता भी बनी रहेगी. इसके अलावा इंश्‍योरेंस कंपनियों को तय नियमों के तहत सॉफ्टवेयर और सिक्‍योरिटी ऑडिट (Security Audit) भी करना होगा. वीबीआईपी ऐप को शुरू करने से पहले उसकी पूरी जांच करनी होगी.



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'ग्राहक के वैरिफिकेशन की पूरी जिम्‍मेदारी बीमा कंपनी की होगी'
इरडा ने कहा कि बीमा कंपनियों को इस प्रणाली को मजबूत बनाने और सूचनाओं की गोपनीयता (Privacy) के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और चेहरे का मिलान करने वाली तकनीक जैसी मॉडर्न टेक्‍नोलॉजी का इस्‍तेमाल करना चाहिए. बीमा नियामक ने साफ कर दिया है कि वैरिफिकेशन की पूरी जिम्मेदारी इंश्‍योरेंस कंपनी की होगी. बता दें कि आरबीआई KYC नियमों में संशोधन कर चुका है. इसके चलते आरबीआई द्वारा रेगुलेट होने वाले बैंकों व अन्य लेंडिंग इंस्टीट्यूशंस को वीडियो बेस्ड ग्राहक पहचान प्रक्रिया के इस्तेमाल की अनुमति है.
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