केंद्र सरकार ने किसानों को दी बड़ी खुशखबरी, अब ड्रोन से होगी खेती-बाड़ी के लिए रिसर्च, मिलेगा बड़ा फायदा

अब ड्रोन से होगी खेती-बाड़ी के लिए रिसर्च
अब ड्रोन से होगी खेती-बाड़ी के लिए रिसर्च

केंद्र सरकार ने खेती-बाड़ी कर रहे किसानों को बड़ी राहत दी है. यूनियन सिविल एविएशन मिनिस्ट्री (Civil Aviation Ministry) ने एग्री रिसर्च के लिए ड्रोन को मंजूरी दे दी है.

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  • Last Updated: November 17, 2020, 9:10 AM IST
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नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने खेती-बाड़ी कर रहे किसानों को बड़ी राहत दी है. यूनियन सिविल एविएशन मिनिस्ट्री (Civil Aviation Ministry) ने एग्री रिसर्च के लिए ड्रोन को मंजूरी दे दी है. यह अनुमति तेलंगाना के हैदराबाद स्थित इंटरनेशनल क्रॉप रिसर्च इंस्टीच्यूट (ICRISAT) को मिली है. यानी अब खेतीबाड़ी में भी ड्रोन का इस्तेमाल किया जा सकेगा. इसका इस्तेमाल कृषि कार्य के लिए ही किया जाएगा. सिविल एविएशन ने बताया कि ड्रोन जारी किये जाने से छह महीने की अवधि के लिए वैध है. पीआईबी ने ट्वीट करके इस बारे में जानकारी दी है.

PIB ने किया ट्वीट
PIB ने ट्वीट कर इस बारे में जानकारी दी है. ट्वीट में लिखा है कि अंतर्राष्ट्रीय फसल अनुसंधान संस्थान को ड्रोन का उपयोग करने की अनुमति दी है. यह अनुमति कृषि अनुसंधान गतिविधियों के लिए ड्रोन का उपयोग करने के लिए दी गई है.

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सिविल एविएशन मिनिस्ट्री के संयुक्त सचिव अंबर दुबे ने बताया कि ड्रोन भारत के कृषि क्षेत्र में अच्छी खेती (precision agriculture), टिड्डियों पर नियंत्रण और फसल उपज में सुधार लाने जैसे क्षेत्रों में बड़ी भूमिका निभाएगा. सरकार युवा शोधकर्ताओं को देश के 6.6 लाख से अधिक गांवों में कम कीमत के ड्रोन उपकरण प्रदान करने के लिए प्रोत्‍साहित कर रही है.

जारी किए नियम
ड्रोन की तैनाती के लिए लागू कुछ नियमों से संस्थान को ‘सशर्त’ छूट प्रदान करते हुए, सिविल एविएशन मिनिस्ट्री ने कहा कि संस्थान दूरस्थ पायलट विमान प्रणाली या ड्रोन का उपयोग करके इक्रीसेट अनुसंधान क्षेत्र के जरिए कृषि अनुसंधान गतिविधियों के लिए डाटा एकत्र कर सकता है.

विज्ञप्ति में कहा गया है कि यह अनुमति जारी होने की तारीख से या डिजिटल स्काई प्लेटफॉर्म (चरण -1) के पूर्ण परिचालन तक, जो भी पहले हो, जारी किये जाने से छह महीने की अवधि के लिए यह छूट वैध है. यह कहते हुए कि उक्त छूट सभी शर्तों और सीमाओं के सख्त अनुपालन के साथ ही मान्य होगी.

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इन नियमों का रखना होगा ध्यान-
>> उपकरणों के साथ शारीरिक संपर्क के कारण किसी भी व्यक्ति को लगी चोट के मामले में संस्‍थान ही मेडिको-लीगल मुद्दों के लिए जिम्मेदार होगा.
>> संस्‍थान यह सुनिश्चित करेगा कि आरपीएएस अच्‍छी तरह से काम कर रहा है और वह उपकरण की खराबी के कारण पैदा होने वाली किसी भी स्थिति के लिए जिम्‍मेदार होगा.
>> आईसीआरआईएसएटीइन परिचालनों के कारण पैदा हुए कानूनी मुद्दों या अन्‍य मुद्दों से डीजीसीए को सुरक्षित रखेगा.
>> आरपीएएसका संचालन विजुअल लाइन ऑफ साइट (वीएलओएस) के तहत सूर्योदय से सूर्यास्त तक दिन के समय किया जाएगा.
>> परिचालन के किसी भी चरण के दौरान किसी घटना/दुर्घटना के मामले की, एयर सेफ्टी निदेशालय, डीजीसीए को रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी.
>> संस्‍थान यह सुनिश्चित करेगा कि आरपीएएस को केवल प्रशिक्षित औरअनुभवी बोनाफ़ाइड कर्मी ही संचालित करें.
>> यह संस्‍थान सुरक्षा, जनता की सुरक्षा और गोपनीयता, संपत्ति/परिचालन आदि सुनिश्चित करेगा. किसी भी घटना के मामले में, डीजीसीए को जिम्मेदार नहीं ठहराया जाएगा.
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