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म्युचुअल फंड निवेशकों को 7 दिनों के भीतर मिलेगा डिविडेंड, देरी पर 15% की दर से ब्याज का भुगतान

 (फोटो- न्यूज18)

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भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने एक परिपत्र में कहा कि नये नियम के तहत अब लाभांश भुगतान के लिये समयसीमा घटाक ...अधिक पढ़ें

हाइलाइट्स

भुगतान में देरी पर निवेशकों को डिविडेंड की राशि पर सालाना 15% की दर से ब्याज मिलेगा.
यह भुगतान संपत्ति प्रबंधन कंपनियां करेंगी और इसका विवरण सेबी को देना होगा.
सेबी ने 15 नवंबर को इन सब पहलुओं पर म्यूचुअल फंड नियमों में बदलावों को अधिसूचित किया था.

नई दिल्ली.भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने 25 नवंबर यानी शुक्रवार को एक परिपत्र जारी कर म्यूचुअल फंड हाउसों को रिकॉर्ड तिथि से सात दिनों के भीतर लाभांश (डिविडेंड) का भुगतान करने के लिए कहा. सेबी ने आगे निर्देश देते हुए कहा कि लाभांश के भुगतान के उद्देश्य से रिकॉर्ड तिथि सार्वजनिक सूचना की तारीख से दो कार्य दिवस होनी चाहिए.

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने एक परिपत्र में कहा कि नये नियम के तहत अब लाभांश भुगतान के लिये समयसीमा घटाकर मौजूदा 15 कामकाजी दिवस से सात दिन कर दी गयी है. आगे नियामक बोर्ड ने बताया कि म्यूचुअल फंड हाउसों को निवेशकों को लाभांश का भुगतान रिकॉर्ड तिथि से सात कामकाजी दिनों के भीतर करना होगा.

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तीन दिन के भीतर उपलब्ध करायी जाएगी राशि
साथ ही यूनिट बेचने से प्राप्त राशि के अंतरण के लिये समयसीमा मौजूदा 10 कामकाजी दिनों से घटाकर तीन कार्य दिवस कर दिया गया है. सेबी ने कहा, यूनिट बेचने से प्राप्त होने वाली राशि यूनिटधारकों यानी निवेशकों को यूनिट बेचने की तिथि से तीन दिन के भीतर उपलब्ध करायी जाएगी. आगे मार्केट रेगुलेटर सेबी ने कहा कि जिन योजनाओं में कुल संपत्ति में से कम-से-कम 80 प्रतिशत राशि अगर विदेशों में स्वीकृत निवेश उत्पादों में निवेश किया गया है तो ऐसी स्थिति में यूनिट बेचने से प्राप्त होने वाली राशि यूनिटधारकों को आवेदन देने की तिथि से पांच कामकाजी दिवस के भीतर उपलब्ध करायी जाएगी.

देर हुई तो 15 प्रतिशत की दर से मिलेगा ब्याज
वहीं, सेबी के साथ विचार-विमर्श कर उद्योग संगठन एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (एएमएफआई) उन अपवाद परिस्थितियों की सूची प्रकाशित करेगा, जिसके कारण वह निवेशकों को निर्धारित समयसीमा में भुनायी गयी रकम देने में असमर्थ होंगे. साथ ही उन्हें यह भी बताना होगा कि ऐसी परिस्थिति में यूनिटधारकों को पैसा मिलने में कितना समय लगेगा. इस सूची का प्रकाशन 30 दिनों के भीतर किया जाएगा. बोर्ड नियामक ने कहा कि अगर यूनिट बेचने से प्राप्त होने वाली राशि अथवा लाभांश भुगतान में देरी होती है तो निवेशकों को प्राप्त होने वाली राशि पर सालाना 15 प्रतिशत की दर से ब्याज मिलेगा.

संपत्ति प्रबंधन कंपनियां करेंगी ब्याज का भुगतान
आगे बोर्ड ने बताया कि इस ब्याज का भुगतान संपत्ति प्रबंधन कंपनियां करेंगी और इस प्रकार के भुगतान का विवरण अनुपालन रिपोर्ट के तहत सेबी को देना होगा. बता दें कि सेबी ने 15 नवंबर को इन सब पहलुओं पर म्यूचुअल फंड नियमों में बदलावों को अधिसूचित किया था. पहले फंड हाउसों को 30 दिनों के भीतर लाभांश का भुगतान करने की अनुमति दी गई थी और 10 दिनों में रिडेम्पशन आय का भुगतान करने की अनुमति दी गई थी.

Tags: SEBI

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