मोदी सरकार की इस स्‍कीम से बढ़ रहा है बैंकों का NPA, RBI ने केंद्र को फिर चेताया

केंद्रीय बैंक के मुताबिक, सरकार से मुद्रा लोन लेकर बिजनेस शुरू करने वाले पैसा नहीं चुका रहे हैं. अकेले PMMY योजना से बैड लोन का बोझ 11 हजार करोड़ रुपये तक बढ़ चुका है. अगर ऐसा ही चलता रहा, तो आने वाले दिनों में बैंकिंग व्यवस्था को बहुत घाटा होगा.

News18Hindi
Updated: January 14, 2019, 8:50 PM IST
मोदी सरकार की इस स्‍कीम से बढ़ रहा है बैंकों का NPA, RBI ने केंद्र को फिर चेताया
आरबीआई ने वित्त मंत्रालय और बैंकों को समीक्षा रिपोर्ट भी दी है.
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Updated: January 14, 2019, 8:50 PM IST
छोटे मझोले कारोबार के लिए प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY) के तहत दिए जाने वाले मुद्रा लोन से एनपीए यानी नॉन परफॉर्मिंग एसेट (बैड लोन) का बोझ बढ़ता जा रहा है. इसने भारतीय रिजर्व बैंक की चिंता बढ़ गई है. रिजर्व बैंक ने वित्त मंत्रालय और सभी बैंकों को इस बारे में चिट्ठी लिखकर चेताया है. आरबीआई ने वित्त मंत्रालय को जरूरी कदम उठाने के निर्देश भी दिए हैं.

आरबीआई ने वित्त मंत्रालय और बैंकों को समीक्षा रिपोर्ट भी दी है. वित्त मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, आरबीआई ने मंत्रालय को चेताया है कि आने वाले दिनों में मुद्रा लोन योजना एनपीए का एक बड़ा सोर्स बन सकती है, जिसने बैंकिंग सिस्टम को पूरी तरह से हिला दिया है.

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केंद्रीय बैंक के मुताबिक, सरकार से मुद्रा लोन लेकर बिजनेस शुरू करने वाले पैसा नहीं चुका रहे हैं. अकेले PMMY योजना से बैड लोन का बोझ 11 हजार करोड़ रुपये तक बढ़ चुका है. अगर ऐसा ही चलता रहा, तो आने वाले दिनों में बैंकिंग व्यवस्था को बहुत घाटा होगा.

PMMY की सालाना रिपोर्ट 2017-18 के मुताबिक, वित्त वर्ष 2018 में इस स्कीम के तहत कुल लोन का वितरण 2.46 ट्रिलियन (खरब) रुपये था. इस स्कीम के तहत दिए गए कुल कर्ज में 40 प्रतिशत अदायगी महिला उद्यमियों को, जबकि 33 प्रतिशत सोशल कैटेगरी में की गई. वित्त वर्ष 2017-18 के दौरान मुद्रा लोन से 4.81 करोड़ से अधिक छोटे कर्जदारों को लाभ हुआ है.


इतना बढ़ गया एनपीए का बोझ
साल 2015-16 में 596.72 करोड़ रुपये मुद्रा लोन एनपीए में तब्दील हो चुका है. 2016 17 में ये एनपीए की रकम बढ़कर 3790.35 करोड़ रुपये हो गई. वहीं, इसके अगले यानी 2017-18 में यह रकम बढ़कर 7277 करोड़ रुपये तक पहुंच गई. यानी हर साल ये रकम दोगुनी होती जा रही है. हालांकि, सरकार का कहना है कि इसमें बहुत चिंता की बात नहीं है क्योंकि रकम भले ही बहुत ज्यादा दिख रही हो, लेकिन प्रतिशत के हिसाब से देखें तो ये मुश्किल से 2.5 से 3 फीसदी है.
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सरकार से लोन लेकर बिजनेस शुरू करने वाले नहीं लौटा रहे पैसे, RBI ने लिखी चिट्ठी

मुद्रा लोन योजना क्या है?
प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY) 8 अप्रैल 2015 में लॉन्च की गई थी. इसके तहत बिना गारंटी के लोन मिलता है. इसके अलावा लोन के लिए कोई प्रोसेसिंग चार्ज भी नहीं लिया जाता है. मुद्रा योजना (PMMY) में लोन चुकाने की अवधि को 5 साल तक बढ़ाया जा सकता है. लोन लेने वाले को एक मुद्रा कार्ड मिलता है, जिसकी मदद से कारोबारी जरूरत पर आने वाला खर्च किया जा सकता है. मुद्रा योजना में शिशु लोन (50,000), किशोर लोन (50,001 से 5 लाख) और तरुण लोन (50,001 से लेकर 10 लाख) कुल तीन तरह के लोन मिलते हैं.

केंद्र सरकार की मुद्रा योजना (PMMY)के दो उद्देश्य हैं. पहला, स्वरोजगार के लिए आसानी से लोन देना. दूसरा, छोटे उद्यमों के जरिए रोजगार का सृजन करना. अगर आप भी अपना कारोबार शुरू करने के लिए पूंजी की समस्या का सामना कर रहे हैं तो केंद्र सरकार की PMMY से आप अपने सपने को साकार कर सकते हैं.


IL&FS मामला
आरबीआई की चेतावनी ऐसे समय में आई है जबकि देश की वित्तीय व्यवस्था IL&FS संकट के चलते लड़खड़ाई हुई है और इससे बैंकों को नुकसान हुआ है. इस कड़ी में ताजा मामला इंडसइंड बैंक का है. IL&FS ग्रुप पर 91 हजार करोड़ रुपये का कर्ज है. इसे अभी नकदी संकट का सामना करना पड़ रहा है. 91 हजार करोड़ रुपये के कर्ज में सिर्फ IL&FS के खाते में करीब 35 हजार करोड़ रुपये, जबकि इसकी फाइनैंशल सर्विसेज कंपनी पर 17 हजार करोड़ रुपये बकाया है. गौरतलब है कि 57 हजार करोड़ रुपये बैंकों का बकाया है और इसमें अधिकांश हिस्सेदारी सार्वजनिक बैंकों की है.

ऐसे हुआ खुलासा
नकदी संकट की समस्या में फंसे IL&FS ग्रुप के लिए नीम पर करेला चढ़ा दिया ब्लूमबर्ग न्यू एजेंसी की उस रिपोर्ट ने, जिसमें सिडबी बैंक के हवाले से कहा गया कि उसने IL&FS के खिलाफ कंपनी नैशनल लॉ ट्राइब्यूनल (NCLT) में इन्सॉल्वंसी ऐप्लिकेशन फाइल किया.

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