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NPS or EPF: आपकी रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए इनमें से कौन है अच्छा विकल्प?

आप ईपीएफ और एनपीएस दोनों में निवेश कर सकते हैं.

आप ईपीएफ और एनपीएस दोनों में निवेश कर सकते हैं.

अधिकतर सैलरीड क्लास के पास रिटायरमेंट के मकसद से निवेश के लिए ईपीएफ और एनपीएस दो इंस्ट्रूमेंट उपलब्ध हैं. दोनोंं टैक्स बचाने में भी मददगार हैं. सवाल है कि निवेश के लिए इनमें से कौन सा विकल्प बेहतर है?

नई दिल्ली . अधिकतर सैलरीड क्लास के पास रिटायरमेंट के मकसद से दो निवेश इंस्ट्रूमेंट उपलब्ध हैं. इनमें पहला एम्पलाई प्रोविडेंट फंड (EPF) जबकि दूसरा नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) शामिल हैं. एम्प्लाई प्रॉविडेंट फंड ऑर्गेनाइजेशन (EPFO) की बात करें, तो मार्च, 2021 और फरवरी, 2022 के बीच इसने 1.11 करोड़ लोगों को जोड़ा, जबकि एनपीएस ने वित्त वर्ष 2021-22 में 93.6 लाख का एनरॉल किया. भले ही अधिकतर कंपनियां ईपीएफ की पेशकश करती हैं, लेकिन एनपीएस में निवेश से इनकम टैक्स बेनिफिट भी मिलता है. ऐसे में सवाल उठता है कि रिटायरमेंट के मकसद से इनमें से कौन सा विकल्प अच्छा है?

ईपीएफ और एनपीएस दोनों में निवेश का मतलब रिटायरमेंट के लिए सेविंग करना होता है. यही वजह है कि दोनों स्कीम्स में ​रकम जल्दी निकासी को हतोत्साहित किया जाता है. दोनों निवेश दशकों के कंपाउंड निवेश के जरिये ऐसी रकम बनाने में मदद करते हैं, जिन्हें आप रिटायरमेंट के बाद नियमित आय बंद होने की स्थिति में इस्तेमाल कर सकते हैं. हालांकि, यहां दोनों स्कीम्स में बड़ा अंतर है. ईपीएफ में भारत सरकार रिटर्न की गारंटी देती है. जब आप रिटायरमेंट तक पहुंचते हैं, तो आपको एकमुश्त राशि मिलती है.

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वहीं, एनपीएस में आपके निवेश के पैसे को इक्विटी और डेट मार्केट में लगाया जाता है. इसमें आपका हर महीने नियमित योगदान कंपाउंड होता है, जिससे मिलने वाला प्रतिफल आपको नियमित और उम्मीद के मुताबिक अच्छी पेंशन देने में सक्षम होता है. ईपीएफ का लाभ केवल सैलरीड लोगों को ही मिलता है, जबकि एनपीएस में कोई भी निवेश कर सकता है. प्लांटरिच कंसल्टेंसी एलएलपी की फाउंडर संस्थापक ख्याति मशरू वासनी ने मनीकंट्रोल को बताया, “हम लोगों को दोनों में कुछ निवेश करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं.”

75 फीसदी हिस्सा इक्विटी में लगा सकते

एनपीएस आपको थोड़ा अधिक लचीलापन प्रदान करता है. यह आपको यह चुनने की आजादी देता है कि आप इक्विटी में कितना पैसा लगाना चाहते हैं. हालांकि, अपने मासिक योगदान का अधिकतम 75 फीसदी हिस्सा इसमें लगा सकते. वहीं, ईपीएफ में पैसा कहां निवेश हो, इस पर आपका कोई नियंत्रण नहीं होता. फंड इक्विटी में 5 से 15 फीसदी के बीच निवेश कर सकता है. ईपीएफ और एनपीएस दोनों में टैक्स प्रोत्साहन मिलता है.

एनपीएस में 50 हजार की अतिरिक्त कटौती

इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80सी के तहत निवेश पर 1.5 लाख रुपये की कटौती के साथ, एनपीएस सेक्शन 80सीसीडी (1बी) के तहत 50,000 रुपये की अतिरिक्त कटौती प्रदान करता है.

– एनपीएस में लॉक-इन अवधि होती है, क्योंकि कोई व्यक्ति 60 वर्ष की आयु में टैक्स फ्री कुल फंड का केवल 60 प्रतिशत ही निकाल सकता है.

ईपीएफ में कंपाउंडिंग का लाभ

– एम्प्लाई प्रॉविडेंट फंड ऑर्गेनाइजेशन पीएफ पर 8.1 फीसदी ब्याज दर प्रदान करता है.

– ईपीएफ को बढ़ने देने और कंपाउंडिंग का लाभ उठाकर कोई भी इसका लाभ उठा सकता है.

Tags: Business news in hindi, EPF, Investment and return, Investment tips, NPS

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