NTPC ने बताया, दिल्ली-एनसीआर में जहरीली हवा के लिए कौन है जिम्मेदार, थर्मल पावर प्‍लांट्स को बताया साफ-सुथरा

दिल्‍ली एनसीआर में वायु गुणवत्‍ता खतरनाक स्‍तर पर बनी हुई है.
दिल्‍ली एनसीआर में वायु गुणवत्‍ता खतरनाक स्‍तर पर बनी हुई है.

सार्वजनिक क्षेत्र के न्‍यूक्लिर थर्मल पावर कॉरपोरेशन (NTPC) ने कहा कि दादरी थर्मल पावर प्लांट अक्टूबर 2020 से ही बंद है. इसके बाद भी दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR) में हवा की गुणवत्ता बहुत खराब या खतरनाक स्तर (Air Pollution) पर बनी हुई है. कंपनी ने कहा कि लॉकडाउन के दौरान पावर प्लांट में काम जारी था. तब भी हवा की गुणवत्ता खराब नहीं हुई थी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 8, 2020, 8:31 PM IST
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नेनई दिल्‍ली. दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR) में हवा लगातार जहरीली बनी हुई है. इस समय लोगों का सांस लेना तक दूभर हो गया है. हवा की गुणवत्ता खतरनाक स्तर (Air Pollution) पर बने रहने के कई कारण हो सकते हैं. ऊर्जा मंत्रालय (Power Ministry) के तहत काम करने वाली सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी न्‍यूक्लियर थर्मल पावर कॉरपोरेशन (NTPC) ने दावा किया है कि राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र में हवा की गुणवत्ता सूचकांक (AQI) बद से बदतर होने के पीछे गाड़ियों से निकलने वाला धुंआ (Carbon Emissions), निर्माण गतिविधियां, सड़कों पर उड़ने वाली धूल, उद्योगों से निकलने वाला उत्सर्जन और दिल्ली के नजदीकी राज्यों में पराली जलाना (Stubble Burning) प्रमुख कारण है.

लॉकडाउन में दादरी प्‍लांट में जारी था काम, नहीं खराब हुई थी हवा
एनटीपीसी ने कहा कि दिल्ली-एनसीआर में बन रहे स्‍मॉग के कारण लोगों के स्वास्थ्य (Health) और रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) पर सीधा असर पड़ रहा है. कंपनी ने कहा कि दिल्ली-एनसीआर में एयर क्‍वालिटी इंडेक्स की बुरी स्थिति के लिए सिर्फ थर्मल पावर प्लांट जिम्मेदार नहीं है. दादरी थर्मल पावर प्लांट अक्टूबर 2020 से ही बंद है. इसके बाद भी दिल्ली-एनसीआर में हवा की गुणवत्ता बहुत खराब या खतरनाक स्तर पर बनी हुई है. कंपनी ने बताया कि लॉकडाउन के दौरान पावर प्लांट में काम जारी था. तब भी हवा की गुणवत्ता खराब नहीं हुई थी. कंपनी ने दावा किया कि दादरी पावर प्लांट ना सिर्फ एनटीपीसी बल्कि पूरे देश में सबसे साफ तरीके से काम करने वाला पावर प्लांट है.

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प्रदूषण नियंत्रण के लिए दादरी पावर प्लांट में की गईं ये व्यवस्थाएं


एनटीपीसी ने बताया कि दादरी पावर प्लांट्स के सभी स्टेशनों में धुएं को नियंत्रित करने के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है. इन स्टेशनों में पार्टिकुलेट मैटर, ड्राई सॉर्बेंट इंजेक्शन, SOx उत्सर्जन के लिए डी-सल्फराइजेशन और NOx उत्सर्जन के नियंत्रण के लिए ESP सिस्टम का इस्तेमाल किया जाता है. यहीं नहीं, इस पावर प्लांट में हवा की गुणवत्ता की निगरानी के लिए कंटीन्यूअस एमिशन मॉनिटरिंग सिस्टम (CEMS) और कंटीन्यूअस एम्बिएंट एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन (CAAQMS) तकनीक से लैश किया गया है.

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दादरी पावर प्लांट में पराली से पैलेट्स बनाने का भी है इंतजाम
एक अध्ययन के मुताबिक दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण में 40 फीसदी योगदान किसानों के पराली जलाने से होता है. एनटीपीसी दादरी में पराली से बनाए गए पैलेट्स (Pallets) का भी इस्तेमाल किया जाता है. पिछले दो साल में 4,000 एकड़ कृषि भूमि की 8,000 मीट्रिक टन से अधिक पराली को पैलेट्स बनाकर इस पावर प्लांट में इस्तेमाल किया जा चुका है. यही नहीं, यह पावर प्लांट किसानों की आय बढ़ाने में भी मदद कर रहा है. एनटीपीसी ने दावा किया कि अगर दादरी पावर प्लांट शुरू किया जाता है तो पराली के निपटान के साथ प्रदूषण को भी कम करने में मदद मिलेगी.
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