सावधान! सैंकड़ों ATM पर मंडराया बंद होने का खतरा, जानें क्या है वजह

सख्त नियमों के कारण देश ATMs को चलाना ज्यादा महंगा पड़ रहा है. यही वजह है कि सैकड़ों ATM के बंद होने पर खतरा मंडरा रहा है.

News18Hindi
Updated: May 15, 2019, 9:36 PM IST
सावधान! सैंकड़ों ATM पर मंडराया बंद होने का खतरा, जानें क्या है वजह
सख्त नियमों के कारण देश ATMs को चलाना ज्यादा महंगा पड़ रहा है. यही वजह है कि सैकड़ों ATM के बंद होने पर खतरा मंडरा रहा है.
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Updated: May 15, 2019, 9:36 PM IST
एक ओर जहां देश में ATM ट्रांजेक्शन बढ़ रहे हैं. वहीं दूसरी ओर ATM की संख्या कम होती जा रही है. सख्त नियमों के कारण देश में ATM चलाना ज्यादा महंगा पड़ रहा है. यही वजह है कि सैकड़ों ATM के बंद होने पर खतरा मंडरा रहा है. अगर ऐसा होता है तो इसका असर पूरे देश पर होगा और लोगों को कैश निकालने में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है. (ये भी पढ़ें: रेल यात्री ध्यान दें! ट्रेन के स्टेशन पर पहुंचने से पहले रेलवे करेगा SMS, आएगा फोन)

भारत में पहले से ही कम हैं एटीएम


RBI की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, देश में ATM से ट्रांजेक्शन में बढ़ोतरी के बावजूद पिछले दो सालों में ATM की संख्या घटी है. अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के मुताबिक, ब्रिक्स देशों में भारत ऐसा देश है जहां प्रति 100,000 लोगों पर कुछ ही ATM हैं.



नए कानून से बढ़ी मुश्किलें
एटीएम के हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर अपग्रेड को लेकर जो नए नियम आए हैं उनके चलते पुराने ATM को चलाना मुश्किल हो जाएगा. इसके अलावा कैश मैनेजमेंट स्टैंडर्ड और कैश लोडिंग को लेकर भी नियम जारी हुए हैं. इससे एटीएम कंपनियां, ब्राउन लेबल और व्हाइट लेबल एटीएम प्रदाता पहले ही नोटबंदी के दौरान हुए घाटे से जूझ रहे हैं.

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ATM की घटती संख्या के पीछे सरकारी बैंकों द्वारा ब्रांचों को कम करना भी बड़ी वजह है. 2018 के शुरुआती 6 महीनों में पांच असोसिएट बैंकों और एक लोकल बैंक को खरीदने के बाद स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने अपनी 1000 ब्रांच बंद कर दीं. बैंक के हर दो एटीएम में से एक बैंक ब्रांच में इंस्टॉल होते हैं.



3,500 करोड़ का आएगा खर्च
नई तकनीकों के हिसाब से एटीम में बदलाव के लिए बैंकों को ज्यादा खर्च करना पड़ेगा. इन मशीनों के कैश लॉजिस्टिक और कैसेट स्वैम मेथड में बदलाव करने में ही 3,500 करोड़ का खर्च आ सकता है. अगर बैंक इस खर्च का बोझ नहीं उठाते हैं तो एटीएम सर्विस देने वाली कंपनियां इन्हें बंद करने का फैसला कर सकती हैं.

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