एमएसपी विवाद के बीच देश में 35 प्रतिशत बढ़ी धान की खरीद, नंबर वन पर कांग्रेस शासित पंजाब

धान की खरीद में नंबर वन है पंजाब
धान की खरीद में नंबर वन है पंजाब

मोदी सरकार का दावा है कि वर्ष 2017-18 से 2019-20 के बीच न्यूनतम समर्थन मूल्य पर हुई धान की खरीद से लाभान्वित हुए किसानों की संख्या में 72 प्रतिशत की वृद्धि हुई है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 14, 2020, 7:25 AM IST
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नई दिल्ली. नए कृषि कानूनों के बाद न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर छिड़ा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है. सरकार लगातार किसानों को समझाने की कोशिश कर रही है, लेकिन यह मसला अब राजनीतिक रंग ले चुका है. इस बीच केंद्रीय कृषि मंत्रालय की ओर से एमएसपी पर खरीद का नया आंकड़ा जारी किया गया है. इसके तहत 11 अक्टूबर तक देश में धान की खरीद (Procurement of Paddy) पिछले वर्ष के 31.7 लाख मिट्रिक टन (LMT) के मुकाबले 35 प्रतिशत बढ़कर 42.5 एलएमटी हो गई है. वहीं, पंजाब में इस वर्ष 11 अक्टूबर तक न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीफ फसल की खरीद में अप्रत्याशित वृद्धि, पिछले वर्ष के 7.4 लाख मीट्रिक टन के मुकाबले इस वर्ष 26.1 लाख मीट्रिक टन खरीद हुई. पिछले वर्ष के मुकाबले यह 251 प्रतिशत ज्यादा है.

पिछले पांच वर्षों में 3,069 एलएमटी धान की खरीद 4,95,043 करोड़ रुपये के समर्थन मूल्य पर की गई जबकि 2009-14 के दौरान 1,768 एलएमटी धान की खरीद मात्र 2,06,059 करोड़ रुपये के समर्थन मूल्य पर की गई थी. एमएसपी की कीमत में 2.40 गुना की वृद्धि देखी जा सकती है. इसी तरह पिछले पांच वर्ष में 2,97,023 करोड़ रुपये के समर्थन मूल्य पर 1,627 एलएमटी गेहूं की खरीद की गई जबकि 2009-14 के दौरान 1,68,202 रुपये के समर्थन मूल्य पर 1,395 एलएमटी गेहूं की खरीद की गई थी. यहां भी एमएसपी की कीमत में 1.77 गुना की वृद्धि देखी जी सकती है.

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एमएसपी का मामला अब राजनीतिक रंग ले चुका है




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केंद्र सरकार ने कहा है कि पंजाब (Punjab) में कुछ लोग यह झूठ और ग़लत प्रचार फैला कर किसानों को सरकार के खिलाफ भड़का रहे हैं कि नए कृषि कानून किसान विरोधी हैं. जबकि वे यह जानते हैं कि इन कानूनों से किसानों की आमदनी बढ़ेगी और उन्हें इनका लाभ मिलेगा.

एमएसपी था और बरकरार रहेगा. मौजूदा धान की फसल एमएसपी पर ही खरीदी जा रही है. सरकारी एजेंसियों ने इस सत्र में रिकार्ड खरीद की है. इसी तरह इस सत्र में गेहूं की भी खरीद की जाएगी और किसी भी किसान को कोई परेशानी पेश नहीं आएगी.

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मोदी सरकार (Modi Government) का दावा है कि वर्ष 2017-18 से 2019-20 के बीच न्यूनतम समर्थन मूल्य पर हुई धान की खरीद से लाभान्वित हुए किसानों (Farmers) की संख्या में 72 प्रतिशत की वृद्धि हुई है.
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