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...तो भारत में 250 रुपए लीटर हो जाएगा पेट्रोल!

News18Hindi
Updated: November 15, 2017, 1:25 PM IST
...तो भारत में 250 रुपए लीटर हो जाएगा पेट्रोल!
ईरान और सऊदी अरब के बीच बनते युद्ध के हालात से बिल्कुल ऐसा हो सकता है.
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Updated: November 15, 2017, 1:25 PM IST
अगर आपको एक लीटर पेट्रोल के लिए 250 रुपए चुकाने हो तो सोचिए क्या होगा. जो हालात हैं उसमें अगर ऐसा हो जाए तो हैरान मत होइएगा. ईरान और सऊदी अरब के बीच बनते युद्ध के हालात से बिल्कुल ऐसा हो सकता है. अगर ऐसा हुआ तो ये न केवल अापकी जेब पर भारी पड़ेगा. बल्कि, सरकार के बजट को भी बिगाड़ कर रख देगा. महंगाई कई गुना बढ़ जाएगी.

एक मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अगर सऊदी अरब और ईरान के बीच युद्ध होता है तो इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड के दाम 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकते हैं. ऐसे में एक लीटर पेट्रोल का भाव भारत में 250 रुपए प्रति लीटर हो जाएगा.

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क्रूड हो जाएगा 200 डॉलर प्रति बैरल

केडिया कमोडिटी के एमडी अजय केडिया ने न्यूज18 हिंदी डॉट कॉम को बताया कि अगर इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड के दाम 200 डॉलर प्रति बैरल हो जाते हैं तो भारत में पेट्रोल का भाव 250 रुपए प्रति लीटर हो सकता है. सऊदी अरब और ईरान के बीच तनाव बढ़ने से इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड के दाम लगातार बढ़ ही नहीं रहे हैं बल्कि ढाई साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गए हैं. फिलहाल ब्रेंट क्रूड का दाम 62 डॉलर प्रति बैरल है.

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हालांकि अजय केडिया ये भी कहते हैं कि लेकिन इसकी आशंकाएं फिलहाल कम हैं. क्योंकि दुनिया का सबसे बड़ा क्रूड इंपोर्टर अमेरिका भी अब क्रूड एक्सपोर्ट करने लगा है. वहीं, चीन और अन्य कई देशों में  क्रूड डिमांड में कोई बड़ा इजाफा देखने को नहीं मिला है. वहीं, ज्यादातर देश अब इलेक्ट्रिक व्हीकल पर शिफ्ट होने की तैयारी कर रहे हैं. इसीलिए आगे चलकर डिमांड कम ही होगी.

कैसे और क्यों बढ़ेंगे दाम
सीएनबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक क्रूड ऑयल सप्लाई करने वाले सभी देशों में सऊदी अरब का कुल 20 फीसदी हिस्सा है. ऐसे में सऊदी और ईरान के बीच अगर और बढ़ता है, तो सप्लाई थम जाएगी. ऐसे में क्रूड के दाम तेजी से बढ़ सकते हैं.



उस समय भी तनाव से बढ़ गए थे दाम!
1973 में अरब-इस्राएल युद्ध के दौरान तेल उत्पादक देशों के संगठन ओपेक ने तेल के दाम बहुत बढ़ा दिये थे. उस समय क्रूड के दाम अचनाकर 25 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 55.51 डॉलर प्रति हो गए थे. अरब तेल उत्पादक देशों ने इस्राएल समर्थक समझे जाने वाले देशों पर रोक लगा दी, जिनमें अमेरिका भी शामिल था.



इसलिए ईरान की सऊदी अरब से नहीं बनती
मध्य पूर्व के दो ताकतवर देशों सऊदी अरब और ईरान के बीच हमेशा छत्तीस का आंकड़ा रहता है. दोनों धर्म से लेकर तेल और इलाके में दबदबा कायम करने तक, हर बात पर झगड़ते हैं.



अब फिर टूट गए हैं रिश्ते
जनवरी 2016 में सऊदी अरब में एक प्रमुख शिया मौलवी निम्र अल निम्र को मौत की सजा दी गयी. उन पर सरकार विरोधी प्रदर्शन भड़काने के आरोप लगे. ईरान ने इस पर गहरी नाराजगी जतायी. ईरान में सऊदी राजनयिक मिशन पर हमले किये गये. सऊदी अरब ने ईरान से अपने राजनयिक रिश्ते तोड़ लिये.
First published: November 15, 2017
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