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लोन मोरटोरियम पर जाने सब कुछ, आखिर क्यों सुप्रीम कोर्ट ने ब्याज माफी की पूरी छूट से किया इनकार

लोन मोरटोरियम पर जाने सब कुछ, आखिर क्यों सुप्रीम कोर्ट ने ब्याज माफी की पूरी छूट से किया इनकार

उच्चतम न्यायालय ने कहा कि उसने शीर्ष अदालत के एक न्यायाधीश के विरूद्ध आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री की शिकायत खारिज कर दी है.

उच्चतम न्यायालय ने कहा कि उसने शीर्ष अदालत के एक न्यायाधीश के विरूद्ध आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री की शिकायत खारिज कर दी है.

कोर्ट ने लोन मोरटोरियम (Lone Moratorium) की अवधि बढ़ाने और पूर्ण ब्याज माफी की मांग खारिज कर दी है. यानी अब सिर्फ ब्याज पर ब्याज वाली राहत ही लोगों को मिल सकेगी.

    नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने मंगलवार को लोन मोरटोरियम (Lone Moratorium) पर अहम फैसला सुनाया है. कोर्ट ने साफ कर दिया कि लोन मोरटोरियम पीरियड में ब्याज पर कोई ब्याज नहीं लिया जाएगा. साथ ही, कोर्ट ने लोन मोरटोरियम की अवधि बढ़ाने और पूर्ण ब्याज माफी की मांग खारिज कर दी है.
    विशेषज्ञों ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर कहा कि का यह फैसला एक तरह से सरकार के आत्मनिर्भर प्लान की तरह है. यानी कि ब्याज माफी की अतिरिक्त लागत से खुद को बचाने के लिए लोगों को आत्मानिर्भर होना पड़ेगा. शीर्ष अदालत ने कहा कि मोरटाेरियम का विस्तार नहीं हो सकता है और बैंक पूरी तरह से ब्याज माफ नहीं कर सकते क्योंकि वे खाताधारकों और पेंशनरों के लिए भी जिम्मेदार हैं. फैसला जस्टिस अशोक भूषण, आर सुभाष रेड्डी और एमआर शाह की पीठ ने सुनाया.
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    लोन माेरटाेरियम में पूर्ण ब्याज माफी और अवधि बढ़ाने की मांग इसलिए हुई खारिज
    1. न्यायमूर्ति एमआर शाह ने निर्णय को पढ़ते हुए कहा, “हमने राहत को स्वतंत्र माना है. पूर्ण ब्याज की छूट संभव नहीं है क्योंकि बैंकों को खाताधारकों और पेंशनरों को ब्याज देना पड़ता है. “ऋण राशि के बावजूद, मोरटोरियम अवधि के दौरान ब्याज या क्षतिपूर्ति ब्याज पर कोई ब्याज नहीं होगा. यदि ऐसी कोई राशि एकत्र की गई है तो उसे वापस कर दिया जाएगा.
    2. कानूनी समाचार वेबसाइट, BarandBench के अनुसार, SC ने RBI द्वारा प्रदान की गई सेक्टर-वार राहत के लिए पहले से ही दिए गए पैकेजों और राहत के लिए याचिका खारिज कर दी है. यह मुश्किल मुद्दे पर एक मध्य मार्ग है - और कम खर्चीला है. बैंकिंग प्रणाली पर पूर्ण ब्याज माफी का बोझ लगभग 6 लाख करोड़ रुपए होने का अनुमान था. इससे सरकार को बड़ा झटका लगता.
    3. ब्रोकरेज फर्म मैक्वेरी के एक अनुमान के अनुसार, ब्याज-पर-ब्याज या चक्रवृद्धि ब्याज (जो कि एससी की शर्तों के रूप में दंडात्मक ब्याज) को माफ करने का बोझ लगभग 15,000 करोड़ रुपए होगा. इसके अलावा, बैंकों ने पहले ही उधारकर्ताओं द्वारा भुगतान किए गए चक्रवृद्धि ब्याज को 2 करोड़ रुपए से कम के ऋण के साथ वापस कर दिया है. इसलिए, अब केवल शेष भुगतान किया जाना बाकी है. इसका मतलब यह है कि कुल ब्याज घटक को माफ करने की लागत की तुलना में ब्याज-पर-ब्याज माफी का बोझ कहीं कम होगा.
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    ब्याज पर ब्याज को लेकर विवाद
    2020 में मार्च-अगस्त के दौरान मोरेटोरियम योजना का लाभ बड़ी संख्या में लोगों ने लिया, लेकिन उनकी शिकायत थी कि अब बैंक बकाया राशि पर ब्याज के ऊपर ब्याज लगा रहे हैं. यहीं से मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा. कोर्ट ने केंद्र सरकार से इस मामले पर सवाल पूछा था कि स्थगित EMI पर अतिरिक्त ब्याज क्यों लिया जा रहा है, तो सरकार ने अपने जवाब में कहा कि 2 करोड़ रुपए तक के कर्ज के लिए बकाया किश्तों के लिए ब्याज पर ब्याज नहीं लगाया जाएगा. सरकार के इस प्रस्ताव में 2 करोड़ रुपए तक के MSME लोन, एजुकेशन लोन, होम लोन, क्रेडिट कार्ड बकाया, कार-टू व्हीलर लोन और पर्सनल लोन शामिल हैं. इसका पूरा भार सरकार के ऊपर आएगा, जिसके लिए सरकार ने करीब 6 हजार से 7 हजार करोड़ रुपए खर्च किए.
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    मोरटोरियम क्या है?
    मोरटोरियम का मतलब होता है आप अगर किसी चीज का भुगतान कर रहे हैं तो उसे एक निश्चित समय के लिए रोक दिया जाएगा. मान लीजिए अगर आपने कोई लोन लिया है तो उसकी EMI को कुछ महीनों के लिए रोक सकते हैं. लेकिन ध्यान रहे इसका यह मतलब नहीं है कि आपकी EMI माफ कर दी गई है. 27 मार्च, 2020 को RBI ने परिपत्र जारी किया था, जिसने महामारी के कारण 1 मार्च, 2020 से 31 मई के बीच पड़ने वाले टर्म लोन की किश्तों के भुगतान पर मोरटोरियम की सुविधा दी थी. बाद में, मोरटोरियम की अवधि 31 अगस्त तक बढ़ा दी गई थी.

    Tags: Loan moratorium, Repayment of loan, Supreme court on loan moratorium

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