Private Train में यात्रियों को मिलेंगी इस तरह की High-Tech फैसिलिटीज, Railway ने बनाया ड्रॉफ्ट

कोरोना की मार कई स्पेशल ट्रेनों पर भी पड़ी है. (सांकेतिक तस्वीर)

देश में चलने वाली प्राइवेट ट्रेनों में कई खास सुविधाएं यात्रियों (Private Train have these services) को दी जाएंगी. इनमें इलेक्ट्रॉनिक स्लाइडिंग दरवाजे, डबल ग्लेज्ड सेफ्टी ग्लास के साथ खिड़कियां, आपातकालीन टॉक-बैक तंत्र और सूचना एवं डेस्टिनेशन बोर्ड शामिल हैं. ये ट्रेनें यात्रियों को शोर-मुक्त यात्रा प्रदान करेंगी और 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने में सक्षम होंगी.

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    नई दिल्ली. देश में चलने वाली प्राइवेट ट्रेनों में कई खास सुविधाएं यात्रियों (Private Train have these services) को दी जाएंगी. इनमें इलेक्ट्रॉनिक स्लाइडिंग दरवाजे, डबल ग्लेज्ड सेफ्टी ग्लास के साथ खिड़कियां, ब्रेल साइनेज, आपातकालीन टॉक-बैक तंत्र, पैसेंजर सर्विलांस सिस्टम और सूचना एवं डेस्टिनेशन बोर्ड शामिल हैं. रेलवे ने प्राइवेट ट्रेन के लिए एक ड्रॉफ्ट यानी मसौदा तैयार किया है, जिसके तहत उसने निजी ऑपरेटरों से इन रेलगाड़ियों के लिए ऐसी विशेषताओं की डिमांड की है. ड्रॉफ्ट को रेलवे ने हाल में साझा किया है. इसमें कहा गया है कि ये ट्रेनें यात्रियों को शोर-मुक्त यात्रा प्रदान करेंगी और 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने में सक्षम होंगी.

    180 किमी/घंटे की रफ्तार से चलेंगी प्राइवेट ट्रेनें
    रेलवे के ड्रॉफ्ट में कहा गया है कि ट्रेन को ऐसे डिजाइन किया जाएगा ताकि वे ट्रॉयल के दौरान 180 किमी/घंटे की अधिकतम रफ्तार से सेफ ऑपरेट हो सके. ये ट्रेन अधिकतम 140 सेकंड में शून्य से 160 किमी की गति पकड़ने में सक्षम होनी चाहिए. इसमें कहा गया है कि इन ट्रेन में इमरजेंसी ब्रेक लगाए जाएंगे जिससे 160 किमी/घंटे की रफ्तार से यात्रा करते समय 1,250 मीटर से कम दूरी पर उन्हें रोका जा सकता है. इन ट्रेनों को इस तरह डिजाइन किया जाना चाहिए कि इन्हें 35 साल तक चलाया जा सके.

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    ड्रॉफ्ट की प्रमुख बातें:
    >> रेलवे ड्रॉफ्ट के अनुसार, हर कोच में बिजली से संचालित कम से कम चार दरवाजे होने चाहिए. हर तरफ दो दरवाजे होंगे. इनमें सेफ्टी का पूरा इंतजाम होगा और जब तक दरवाजे बंद नहीं होंगे, ट्रेन नहीं चलेगी.

    >> इनमें ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए कि इमरजेंसी में ट्रेन के रुके होने की स्थिति में यात्री दरवाजे खोलकर बाहर आ सकें. हर कोच में हर साइड के एक दरवाजे को अंदर और बाहर से मैन्युअली खोलने की व्यवस्था होनी चाहिए. सभी खिड़कियों पर डबल ग्लेज्ड सेफ्टी ग्लास होने चाहिए.

    >> इन ट्रेनों में ध्वनि प्रदूषण कम से कम होना चाहिए और यात्रा के दौरान इनमें कंपन नहीं होना चाहिए. सभी दरवाजों के करीब इमरजेंसी बटन और टॉक-बैक फोन होने चाहिए.

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    >> पैसेंजर इनफॉर्मेशन सिस्टम में ऑटोमैटिक अनाउंसमेंट होना चाहिए और ट्रेन में डेस्टिनेशन के बारे में हिंदी, अंग्रेजी और स्थानीय भाषा में डिस्प्ले होना चाहिए. पैसेंजर कोच सर्विलांस सिस्टम (पीआरएसएस) में आईपी आधारित सीसीटीवी नेटवर्क, सर्विलांस कैमरे और दूसरी एक्सेसरीज होनी चाहिए.

    >> प्रत्येक ट्रेन सिटिंग कोच में यात्रियों को कवर करने के लिए कम से कम 6 सर्विलांस कैमरा होने चाहिए. स्लीपर ट्रेन के प्रत्येक कार में कॉरिडोर को कवर करने के लिए 2 सर्विलांस कैमरे होने चाहिए.

    >> इसके अलावा, कम से कम एक कैमरा ड्राइविंग कैब में होना चाहिए. जिससे वह भीड़, ट्रैक और ओएचई स्थितियां देख सके. कैमरे ट्रेन के बाहरी हिस्से में होने चाहिए.

    >> पैसेंजर कार सर्विलांस सिस्टम के लिए प्रत्येक ड्राइविंग कोच में एक इंटीग्रेटेड स्क्रीन होनी चाहिए. इसके अलावा प्रत्येक कोच में इमरजेंसी टॉक बैक सिस्टम होना चाहिए.

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