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एक Bitcoin की ट्रांजेक्शन में खर्च हो जाती है 13000 रुपए से ज्यादा की बिजली

एक Bitcoin की ट्रांजेक्शन में खर्च हो जाती है 13000 रुपए से ज्यादा की बिजली

बिटकॉइन माइनिंग पर अब सालाना 204.50 Tbh बिजली की खपत हो रही है.

बिटकॉइन माइनिंग पर अब सालाना 204.50 Tbh बिजली की खपत हो रही है.

क्रिप्‍टोकरेंसी Bitcoin बहुत ज्‍यादा बिजली की खपत कर रही है. इसी को देखते हुए कई देशों ने बिटकॉइन की माइनिंग पर प्रतिबंध लगा दिया है. बिटकॉइन कई देशों से ज्‍यादा बिजली खपत कर रहा है. एक बिटकॉइन ट्रांजेक्‍शन में जितनी बिजली खपत होती है, उतनी बिजली से 181,559 घंटे Youtube वीडियो देखे जा सकते हैं.

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नई दिल्‍ली. बिटकॉइन (Bitcoin) अब कई देशों की बिजली व्‍यवस्‍था के लिए भी खतरा बनता जा रहा है. बिटकॉइन की माइनिंग (Bitcoin mining) में बेतहाशा बिजली खपत से परेशान कई देशों ने इसकी माइनिंग पर प्रतिबंध लगाया है. इस सूची में अब कोसोवो का नाम भी जुड़ गया है. चीन और ईरान पहले ही माइनिंग पर रोक लगा चुके हैं. बिटकॉइन पर बिजली खर्च बढ़ता जा रहा है. 8 जनवरी 2022 का सामने आये आंकड़ों के अनुसार बिटकॉइन माइनिंग पर अब सालाना 204.50 Tbh बिजली की खपत हो रही है. एक बिटकॉइन ट्रांजेक्‍शन पर 2293.37 kwh बिजली खर्च हो रही है.

इतनी बिजली की खपत थाइलैंड पूरे साल में करता है. वर्ष 2021 में आई एक रिसर्च के अनुसार बिटॅकाइन फेसबुक (Facebook) से 8 गुणा ज्‍यादा बिजली का प्रयोग कर रहा है. दिनोंदिन यह खपत बढ़ता जा रहा है. पिछले दिनों ईरान में पैदा हुए गंभीर बिजली संकट के पीछे भी बिटकॉइन माइनिंग का हाथ माना गया था.

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एक ट्रांजेक्‍शन पर 13,186 रुपये बिजली खर्च

digiconomist.net के अनुसार Cryptocurrency बिटकॉइन का एक ट्रांजेक्‍शन (Bitcoin transaction), यानि कॉइन खरीदने, बेचने या ट्रांसफर करने में 2293.37 kwh बिजली खर्च होती है. वर्ष 2021 में भारत में औसत घरेलू बिजली दर 5.75 रुपये थी. इस दर से अगर हिसाब लगाया जाये तो एक बिटकॉइन ट्रांजेक्‍शन पर लगभग 13,186 रुपये का बिजली खर्च हो रहा है. इतनी बिजली खर्च करके 2,414,380 VISA ट्रांजेक्‍शन किये जा सकते हैं या‍ फिर 181,559 घंटे Youtube वीडियो देखे जा सकते हैं.

यही नहीं बिटकॉइन का वार्षिक कार्बन फुटप्रिंट भी बहुत ज्‍यादा है. बिटकॉइन हर साल 97.14 Mt CO2 कार्बब फुटप्रिंट पैदा कर रहा है जो कुवैत द्वारा किये जा रहे कार्बन फुटप्रिंट के बराबर है. इलेक्‍ट्रॉनिक कचरा फैलाने में भी बिटकॉइन आगे है. इससे सालाना 26.31 kt इलेक्‍ट्रॉनिक कचरा पैदा कर रहा है. इतना कचरा नीदरलैंड्स की स्‍माल आईटी इंडस्‍ट्री हर साल निकालती है.

2021 तक बिटकॉइन अर्जेंटीना से ज्यादा बिजली की खपत कर रहा था. अर्जेंटीना में एक साल में 121 TWh, नीदरलैंड्स 108 TWh, यूएई 113.20 TWh और नार्वे 122.20 TWh बिजली की खपत करते हैं.

क्‍यों होती है इतनी बिजली खर्च

क्रिप्टोकरंसी की माइनिंग के लिए कई कंप्यूटर लगाए जाते हैं. कॉइन्स अपनी खुद की ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी पर चलती है. ब्लॉकचेन (blockchain) एक डिजिटल बहीखाता है. जिसपर ब्लॉक पर होने वाले ट्रांजेक्शन का डेटा स्टोर होता है. इसका कहीं भी कोई सेंट्रलाइज्‍ड डेटा सेंटर नहीं होता है. इसका डेटा दुनियाभर में फैले करोड़ों कंप्‍यूटर्स पर होता है.

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बिटकॉइन माइनिंग में पजल का उपयोग होता है. इस पजल को सॉल्‍व करने के बाद ही अगला ब्‍लॉक बनता है. हर ब्लॉक अपने पिछले ब्लॉक से एक यूनीक हैश कोड के जरिए जुड़ा होता है. इस पजल को सॉल्‍व करने के लिए शक्तिशाली कंप्यूटरों से भरे गोदाम हैं, जो बड़ी संख्या में पजल सॉल्‍व करने के लिए तेज स्पीड से काम कर रहे हैं और इस प्रक्रिया में जबरदस्त मात्रा में बिजली खपत कर रहे हैं।  इसके अलावा आज बिटकॉइन माइनिंग के लिए अत्यधिक विशिष्ट मशीनों,  एक बड़ी जगह और लगातार चलने वाले हार्डवेयर को ओवरहीटिंग से बचाने के लिए पर्याप्त कूलिंग पावर की आवश्यकता है। इनमें भी खूब बिजली खर्च हो रही है.

Tags: Bitcoin, Crypto, Crypto currency

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