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कहीं इस वजह से तो नहीं गिरा बाजार, डूब गए खरबों रुपये

कहीं इस वजह से तो नहीं गिरा बाजार, डूब गए खरबों रुपये

सोमवार को सेंसेक्‍स में 1,500 अंकों से अधिक गिरावट दिखी थी. जो 2022 में अब तक सबसे ज्‍यादा रही.

सोमवार को सेंसेक्‍स में 1,500 अंकों से अधिक गिरावट दिखी थी. जो 2022 में अब तक सबसे ज्‍यादा रही.

LTCG टैक्‍स में 50 फीसदी बढ़ोतरी करने की आशंका से निवेशकों में जबरदस्‍त बिकवाली हावी हो गई. ऐसी भी अफवाह उड़ी कि सरकार इसकी अवधि भी तीन गुना बढ़ा सकती है. यानी निवेश के तीन साल तक रिटर्न पर STCG टैक्‍स देना पड़ेगा.

नई दिल्‍ली. कैसे एक अफवाह निवेशकों की गाढ़ी कमाई को पलक झपकते खत्‍म कर सकती है. इसका बड़ा उदाहरण सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में आई गिरावट में दिखा. बाजार विश्‍लेषकों का कहना है कि LTCG टैक्‍स को लेकर एक अफवाह निवेशकों के बीच उड़ी और घबराहट में बिकवाली ने जोर पकड़ लिया.

केडिया एडवाइजरी के निदेशक अजय केडिया ने बताया कि बाजार में Long term Capital Gain (LTCG) टैक्‍स को लेकर यह अफवाह उड़ाई गई कि सरकार आने वाले बजट में इसमें बड़ा बदलाव कर सकती है. इसका सीधा असर निवेशकों की कमाई और टैक्‍स देनदारी पर पड़ेगा. इस बात ने घरेलू निवेशकों के साथ विदेशी निवेशकों को भी सकते में डाल दिया और वे भारतीय पूंजी बाजार से अपने पैसे निकालने लगे. विदेशी निवेश पोर्टफोलियो (FPI) घटने से बाजार का सेंटिमेंट प्रभावित हुआ, जिसका असर बड़ी गिरावट के रूप में दिखा.

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इस बात की थी अफवाह
मंदडि़यों की ओर से कहा गया कि सरकार बजट में LTCG को रिवाइज कर टैक्‍स की दर मौजूदा 10 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी कर सकती है. साथ ही इसकी अवधि भी 1 साल से बढ़ाकर 3 साल करने का मन बना रही है. बस इतनी सी बात से बाजार में पैनिक फैल गया. विदेशी निवेशक भी बिना कुछ सोचे-समझे उल्‍टे पांव भागने लगे और देखते ही देखते बाजार में करीब 9 लाख करोड़ रुपये डूब गए.

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इधर, निवेशक कर रहे टैक्‍स हटाने की मांग
शेयर बाजार के निवेशक सरकार से बजट में LTCG टैक्‍स खत्‍म करने की मांग कर रहे हैं. उनका कहना है कि जब निवेशक पहले से ही सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन (STT) का भुगतान कर रहे हैं तो ऐसे में LTCG टैक्स लगाने का क्या तर्क है। स्टॉक मार्केट जानकारों का कहना है कि भारत में ट्रांजैक्शन टैक्स काफी ज्यादा है। ऐसे में LTCG से बाजार सेटिमेंट पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है.

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निवेशकों पर पड़ती है दोहरी मार
निवेश सलाहकार बलवंत जैन का कहना है कि STT को पूरी तरह से हटा देना चाहिए या फिर इसमें थोड़ी कटौती करनी चाहिए. इसे शुरुआत में LTCG की जगह लागू किया गया था लेकिन अब LTCG और STT दोनों लागू है. यह निवेशकों पर दोहरा बोझ डालते हैं, जो भारतीय पूंजी बाजार के नजरिये से सही नहीं है.

Tags: Share market, Tax

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