...हर साल अब क्यों महंगी होती है प्याज, 10 साल में बनाए कई रिकॉर्ड

एशिया की सबसे बड़ी सब्जी मंडी आजादपुर में प्याज का थोक भाव 40 से 50 रुपये किलो है. वहीं न्यूनतम भी 35 रुपये किलो दर्ज किया गया.
एशिया की सबसे बड़ी सब्जी मंडी आजादपुर में प्याज का थोक भाव 40 से 50 रुपये किलो है. वहीं न्यूनतम भी 35 रुपये किलो दर्ज किया गया.

Onion Price Today-अगर 10 साल पीछे के प्याज कारोबार को देखें तो महंगी प्याज ने कई रिकॉर्ड बनाए हैं. कीमतों के साथ-साथ कई सरकारें भी प्याज ने गिरा दी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 27, 2020, 9:42 AM IST
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नई दिल्ली. प्याज के महंगे होने की कहानी कोई पहली बार की नहीं है. अगर 10 साल पीछे के प्याज कारोबार को देखें तो महंगी प्याज (Onion Price) ने कई रिकॉर्ड बनाए हैं. देश की सरकारों को हिलाने के साथ ही यह भी पहला ही मौका था जब किसी सामान के महंगा होने की वजह जानने के लिए जांच आयोग बनाया गया था. हालांकि जमाखोरों और दलालों के चलते आयोग को अपना काम बीच में ही बंद करना पड़ा था. लेकिन बंद होने से पहले आयोग ने यह रिपोर्ट दे दी थी कि प्याज महंगी होने के पीछे कोई एक नहीं कई बड़ी वजह हैं. आपको बता दें कि दिल्ली समेत देशभर में रफ्तार पकड़ रही प्याज के भाव को कंट्रोल करने की कवायद (stock limit rules for onion) का असर शायद दिखने लगा है, सरकार ने प्याज की आसमान छूती कीमतों के मद्देनजर इसके भंडारण की अधिकतम सीमा तय कर दी है. इसके अलावा निर्यात पर रोक के साथ ही आयात बढ़ाने के भी उपाय किए गए हैं. इसी का असर है कि एशिया की सबसे बड़ी फल सब्जी मंडी कही जाने वाली आजादपुर मंडी में पिछले एक हफ्ते में प्याज के भाव में ज्यादा उछाल देखने को नहीं मिला है.

एशिया की सबसे बड़ी सब्जी मंडी आजादपुर में प्याज का थोक भाव 40 से 50 रुपये किलो है. वहीं न्यूनतम भी 35 रुपये किलो दर्ज किया गया. पिछले हफ्ते से लगातार चेन्नई, मुंबई और महाराष्ट्र के नासिक में भी प्याज के रेट बढ़ रहे थे. इससे यह अंदाजा लगाया जा रहा था कि आने वाले दिनों में दिल्ली में और भी अधिक प्याज के रेट बढ़ सकते हैं, लेकिन अभी स्थिति सामान्य दिख रही है.हालांकि आजादपुर मंडी में प्याज के थोक व्यापारियों का कहना है कि सरकार के द्वारा उठाए गए स्टॉक लिमिट जो 25 टन की है, यह फैसला उनके लिए उचित नहीं है.

आजादपुर जैसी मंडी में बड़े स्तर पर प्याजों की खरीद-फरोख्त होती है. ऐसे में 25 टन का स्टॉक बेहद कम है. दुकानदारों का यह भी कहना है कि इस फैसले से यहां ज्यादा असर भी देखने को नहीं मिल रहा है.



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आखिर प्‍याज की कीमत क्यों आसमान छू रही है. (File Photo)

प्याज से जुड़े व्यापारियों का कहना है कि ईरान और अफगानिस्तान से प्याज की आयात शुरू कर दी गई है, अगर आयात पर फोकस बढ़ाया जाएगा तो शायद आने वाले दिनों में प्याज के रेट में कमी दर्ज की जा सकती है, नहीं तो नई फसल के आने तक का इंतजार करना पड़ेगा.

अलवर की प्याज के लिए भी दिल्ली के लोगों को दिसंबर तक का इंतजार करना पड़ सकता है. महाराष्ट्र और दक्षिणी भारत में हुई बारिश का असर प्याज की फसलों पर काफी अधिक पड़ा है.

अभी इन दिनों दिल्ली एनसीआर में नासिक और एमपी से प्याज पहुंच रहा है. आजादपुर मंडी में 35 से 50 रुपये प्याज होने के बावजूद लोकल बाजारों में प्याज की कीमत 60 से 70, तो कहीं 80 रुपये तक दर्ज किया गया है.

हर साल बाज़ार में इसलिए महंगी होती है प्याज?साल 2011-12 में कम्पीटिटिव एसेसमेंट ऑफ ऑनियिन मार्केट इन इंडिया के नाम से एक आयोग बना था. चार लोगों पीजी चंगप्पा, एवी मंजूनाथ, विकास डिंबेल और खलील शाह की देखरेख में यह आयोग बनाया गया था. अधूरे कार्यकाल के बीच आयोग ने अपनी रिपोर्ट देते हुए खुलासा किया था कि देश में प्याजमहंगे होने के पीछे प्याजके उत्पादन और डिमांड में किसी बड़े अंतर के होने का कोई असर नहीं है. सही मायनों में प्याजमहंगी होने की असल वजह प्याजका अच्छे से रखरखाव न होना, जमाखोरों और बिचौलियों की सांठगांठ के चलते हर साल बाज़ार में प्याजमहंगी हो जाती है.

रामविलास पासवान के इस बयान से सच मालूम होती है आयोग की रिपोर्ट
जनवरी, 2020 में केन्द्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने एक बयान देते हुए कहा था कि करीब 46 हज़ार टन प्याज आयात किया गया था. जिससे की देश में प्याज की बढ़ती कीमतों को काबू में किया जा सके. लेकिन आयात की गई प्याज को व्यापारियों ने लेने से इनकार कर दिया. उनका कहना था कि भारतीय ग्राहकों को इस प्याज का स्वाद नहीं भा रहा है. इसके चलते विदेशों से आए कुल प्याज में से 32 हज़ार टन प्याजगोदामों में सड़ गई थी, जबकि खुदरा बाज़ार में महंगी प्याज बिकती रही. सूत्रों का कहना है कि इसके पीछे भी जमाखोरों और बिचौलियों का एक बड़ा वर्ग काम कर रहा था.

भारत में 15 तो चीन में होती है 22 मिलियन टन प्याज
दहाई के आंकड़े में प्याज का उत्पादन करने वाले विश्व के सिर्फ दो ही देश हैं, एक चीन तो दूसरा भारत. लेकिन खास बात यह है कि चीन का प्याज का उत्पादन का क्षेत्रफल 956 हज़ार हेक्टेयर है तो हमारा 1064 हज़ार हेक्टेयर है. बावजूद इसके उत्पादन चीन में ज़्यादा होता है. यह बात उस आयोग की जांच में आई थी जो 2011-12 में केन्द्र सरकार ने बनाया था. प्याज उत्पादन का यह आंकड़ा भी उसी वक्त का है. सर्वे के अनुसार यूएसए में 3.34 मिलियन टन तो इजिप्ट में 2.21 और ईरान में 1.92 मिलियन टन प्याजका उत्पादन होता है. अगर आज की बात करें तो भारत में 2 से 2.5 करोड़ टन प्याज का उत्पादन होता है.
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