इस साल सस्ता नहीं होगा प्याज, मंडी में दाम 7300 रुपये क्विंटल हुआ, ये है वजह

कई राज्यों में भारी बारिश और बाढ़ से प्याज की फसल को भारी नुकसान
कई राज्यों में भारी बारिश और बाढ़ से प्याज की फसल को भारी नुकसान

क्या बाढ़, बारिश और जमाखोरी से बढ़ रहा है प्याज का दाम. प्‍याज को आवश्‍यक वस्‍तुओं की सूची से बाहर निकालने के बाद बेलगाम हुए जमाखोर

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 21, 2020, 7:19 AM IST
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नई दिल्ली. नवरात्रि (Navratri) के बावजूद प्याज का रेट (Onion Price) लगातार बढ़ रहा है. हालात ये है कि देश के सबसे बड़े प्याज उत्पादक राज्य महाराष्ट्र की येवला मंडी में इसका थोक रेट 7360 रुपये क्विंटल तक पहुंच गया. यह रेट ऑनलाइन मंडी (E-NAM Mandi) पर आया है. इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि नवरात्र के बाद दाम का क्या होगा. जबकि अब होटल, रेस्टोरेंट खुल चुके हैं. शादी-ब्याह का सीजन शुरू होने वाला है. पिछले साल को याद कीजिए जब बाजार में प्याज 200 रुपये किलो तक पहुंच गई थी. इसी तरह के हालात का अंदेशा इस साल भी लग रहा है. इसकी दो बड़ी वजह बताई जा रही हैं.

मौसम की मार

महाराष्ट्र (Maharashtra), मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh), कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, बिहार, गुजरात और राजस्थान प्याज के बड़े उत्पादक राज्य हैं. इनमें चार बड़े राज्यों आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, गुजरात और बिहार ने इस साल बाढ़ (Flood) झेली है. जबकि मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और यूपी आदि के कई हिस्सों में भारी बारिश (Heavy Rain) ने तबाही मचाई है. इससे प्याज उगाने वाले किसानों का भारी नुकसान हुआ है. ऐसे में प्याज का उत्पादन बुरी तरह से प्रभावित हुआ है. यूपी के एक किसान ने बताया कि जो प्याज ओलावृष्टि की शिकार हुई है उसमें सड़न बहुत जल्दी आ रही है.



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आखिर क्यों बढ़ रहा है प्याज का दाम, (येवला मंडी का रेट)

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हालांकि, सरकार ने इस साल जून में अनुमान लगाया था कि प्याज के उत्पादन में 17.17 फीसदी का इजाफा हो सकता है. 2018-19 में जहां प्याज का उत्पादन 228.19 लाख टन था वहां वहीं इस साल प्याज का उत्पादन 268.56 लाख टन होने का अनुमान लगाया गया था. लेकिन बाढ़ और ज्यादा बारिश इन अनुमानों को धुलते नजर आ रहे हैं.

कृषि विशेषज्ञ बिनोद आनंद ने कहा कि प्याज की कीमतों में तेजी की बड़ी वजह फसल का खराब होना है. महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और मध्य प्रदेश से इस समय खरीफ की प्याज बाजार में आती थी. लेकिन, इन राज्यों में भारी बारिश के चलते 40-45 फीसदी फसल खराब हो गई है. आमतौर पर नवरात्रि में प्याज की खपत कम हो जाती है इसलिए रेट घट जाता है, लेकिन इस बार बढ़ रहा है. हालात ऐसे ही बने रहे तो इस साल भी प्याज सस्ता नहीं होगा.

जमाखोरी ने भी बढ़ाई परेशानी

बिनोद आनंद बताते हैं कि मौसम की मार को देखते हुए व्यापारियों ने इसकी जमाखोरी (Hoarding) करनी शुरू कर दी है. एसेंशियल कमोडिटी एक्ट में संशोधन के बाद अब जमाखोरी लाइसेंसी हो गई है. पिछले साल 29 सितंबर को थोक विक्रेताओं को 50 मिट्रिक टन और खुदरा के लिए 10 मिट्रिक टन भंडारण का स्टॉक तय किया था. तब इससे ज्यादा जमाखोरी करते वक्त व्यापारी थोड़ा डरते थे.

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प्याज के भंडारण की लिमिट खत्म कर दी गई है. (File Photo)


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लेकिन अब उन्हें चाहे जितना प्याज रखने का कानूनी अधिकार मिल गया है. क्योंकि केंद्र सरकार ने प्‍याज को आवश्‍यक वस्‍तुओं की सूची से बाहर निकाल दिया है. ऐसे में अब प्याज वाला रैकेट खुश है, लेकिन किसान (Farmer) और जनता (Public) परेशान है. प्याज के इंपोर्ट पर कस्टम ड्यूटी बढ़ा दी गई है, इसलिए भी दाम बढ़ रहा है.
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