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    आसमान छू रहे प्याज के दाम! जानिए किन 4 कारणों से हो रही है बढ़ोतरी और कब कम होगी कीमत?

    आसमान छू रहे प्याज के दाम! जानिए किन 4 कारणों से हो रही है बढ़ोतरी
    आसमान छू रहे प्याज के दाम! जानिए किन 4 कारणों से हो रही है बढ़ोतरी

    इन दिनों देशभर में सब्जियों (Vegetables) के दाम (Price) आसमान छू रहे हैं. इस कड़ी में लगातार दूसरे वर्ष खुदरा बाजार (Retail Market) में प्याज (Onion) की कीमतों में एक बार फिर उछाल आया है. आइए बताते हैं किन कारणों से बढ़े दाम..

    • News18Hindi
    • Last Updated: October 23, 2020, 5:27 PM IST
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    नई दिल्ली. इन दिनों देशभर में सब्जियों (Vegetables) के दाम (Price) आसमान छू रहे हैं. इस कड़ी में लगातार दूसरे वर्ष खुदरा बाजार (Retail Market) में प्याज (Onion) के कीमतों में एक बार फिर उछाल आया है. मुंबई और पुणे में प्याज की खुदरा कीमत 100 रुपये प्रति किलोग्राम है. उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के अनुसार, देश में प्याज की औसत खुदरा कीमत 55.60 रुपये प्रति किलोग्राम थी. वहीं, राजधानी दिल्ली में प्याज की कीमत 50 रुपये प्रति किलोग्राम है. राष्ट्रीय बागवानी और अनुसंधान फाउंडेशन के एक्टिंग डायरेक्टर डॉ. पीके गुप्ता ने प्याज के बढ़ते दामों के पीछे निम्नलिखित कारकों को माना है.

    बारिश ने बिगाड़ा हाल
    भारत में प्याज तीन सीजन खरीफ (गर्मी), खरीफ (गर्मी के बाद) और रबी (सर्दी) में बोया जाता है. सितंबर में खरीफ प्याज की आवक शुरू हो जाती है, नवंबर के बाद की खरीफ और अप्रैल के बाद से रबी प्याज की आवक होती है. पिछले साल और इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून में भारी बारिश ने प्याज की आवक को बुरी तरह प्रभावित किया है. कर्नाटक में प्याज की खरीफ फसल (गर्मी) सितंबर में बाजारों में आती है, जो भारी वर्षा के कारण प्रभावित हो गई. वहीं, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना और महाराष्ट्र में भी बारिश ने प्याज की फसलों को बर्बाद कर दिया.

    प्याज के बीजों की कमी
    प्याज के दामों का आसमान छूने का दूसरा कारण प्याज के बीजों की कमी. डॉ. पीके गुप्ता ने बताया, 'हमारे पास पिछले साल रबी और खरीफ की बुवाई के लिए बीजों की कमी थी और हम इस साल भी रबी की बुवाई के लिए प्याज की कमी का सामना करेंगे और फिर प्याज की कीमतों में उछाल आएगा. देश में प्याज के बीजों की कम से कम 10 फीसदी की कमी का सामना करना पड़ रहा है, चूंकि अधिकांश किसानों ने कीमतों में वृद्धि के बाद पिछले साल रबी के दौरान पुनः बुवाई के लिए अपनी पूरी उपज बेचने का विकल्प चुना. ऐसे में किसानों ने बढ़ती कीमतों को देखते हुए इसे बेचना उचित समझा. इसका असर खरीफ की बुवाई पर भी पड़ा और रबी (सर्दी) की बुवाई के समय भी ऐसी ही स्थिति पैदा होगी.'



    बफर स्टॉक नाकाफी
    चेन्नई स्थित राजति ग्रुप के निदेशक मदन प्रकाश (प्याज निर्यातक) ने कहा कि केंद्र सरकार के पास प्याज का बफर स्टॉक नाकाफी है. उन्होंने सरकार के प्याज के बफर स्टॉक (एक लाख टन) पर आश्चर्य जताया है. उन्होंने कहा कि अकेले तमिलनाडु को एक दिन में 2,000 टन प्याज की आवश्यकता होती है, तो इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि देशभर में प्याज की कितनी मांग हो सकती है. उन्होंने कहा कि भारी वर्षा के चलते प्याज की फसलों में एंथ्रोनोज और ट्विस्टर नामक बैक्टीरिया की संख्या बढ़ गई. जिस कारण प्याज की 70 फीसदी खरीफ फसलों को नुकसान पहुंचा. उन्होंने कहा कि इससे रबी फसल की प्याज का 35 फीसदी भंडारण भी सड़ गया.

    अस्थिरता प्रीमियम
    एमसीएक्स अध्ययन के अनुसार कमोडिटी की प्रत्याशित कमी की वजह से प्याज की कीमतों में वृद्धि के लिए चौथा कारण 'अस्थिरता प्रीमियम' है. 'अस्थिरता प्रीमियम की स्थिति में कृषि उपज विपणन समिति (APMC) के बाजारों में खुदरा कीमतें लगभग दोगुनी हो जाती हैं. कृषि अर्थशास्त्रियों के अनुसार, इन उत्पादों के विकल्प की कमी होने पर कीमतें और प्रीमियम में खतरनाक वृद्धि होती है. लेकिन डॉ. गुप्ता ने प्याज की कीमतों की वृ्द्धि पर अंकुश लगाने की उम्मीद जताई है. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार इसके लिए विभिन्न कदम उठा रही है, खासकर वह मिस्र जैसे देशों से आयात को अनुमति भी दे रही है.
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