प्याज ने बिगाड़ा आम आदमी की रसोई का बजट! पिछले एक महीने में 4 गुना तेजी से बढ़ी कीमत, इस राज्य में आया रिकॉर्ड उछाल

प्याज के मूल्यों में हुई चार गुना वृद्धि
प्याज के मूल्यों में हुई चार गुना वृद्धि

प्याज के दाम में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है, जिसके कारण आम आदमी के रसोई का बजट बिगाड़ गया है. अगर पिछले एक महीने की बात करें तो प्याज के दाम में दुगनी-तिगनी तेजी से बढ़ोत्तरी हुई है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 23, 2020, 10:40 AM IST
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नई दिल्ली. देश में नवरात्रि के समय प्याज की मांग कम हो जाती है लेकिन इसके बावजूद भी आलू और प्याज के दाम इस समय आसमान पर पहुंच गए हैं. सरकार के कई कदम उठाने के बाद भी पिछले कई हफ्तों से प्याज के दाम में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है. जिसके कारण आम आदमी के रसोई का बजट बिगाड़ गया है. पिछले एक महीने में बेंगलुरू में प्याज के मूल्यों में चार गुना वृद्धि दर्ज की गई है. 20 सितंबर को बेंगलुरू में 22 रुपये किलो बिकने वाला प्याज इस महीने 88 रुपये प्रति किलोग्राम पर बिक रहा है, वहीं तिरुवनंतपुरम में प्याज 90 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से बिका. राजधानी दिल्ली की बात करें तो पिछले एक हफ्ते में प्याज के भाव भी पिछले हफ्ते में 8 रुपये प्रति किलो बढ़े हैं.

दक्षिणी राज्यों में दुगनी-तिगनी तेजी से बढ़ें प्याज के दाम - शहरों में खुदरा प्याज की कीमतों के तुलनात्मक विश्लेषण से पता चलता है कि दक्षिणी राज्यों में पिछले 30 दिनों में दो से तीन गुना प्याज की कीमत में इजाफा हुआ है. बढ़ी हैं. तमिलनाडु में तिरुचिरापल्ली को छोड़कर सभी केंद्रों पर खुदरा मूल्य दोगुने से अधिक हो गए. तेलंगाना में सभी केंद्रों पर कीमतें दोगुनी रही. कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में भी यही हाल रहा. प्याज के भाव में राहत मिलने में अभी थोड़ा और समय लग सकता है, क्योंकि भारी बारिश के कारण महाराष्ट्र और कर्नाटक में ताजा फसल को बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है. जिसके चलते आयात आने में अभी कुछ समय और लगेगा.

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एक महीने तक जारी रहने की संभावना- रायपुर, गोवा, इंदौर और ग्वालियर में कीमतें 100 फीसदी से अधिक बढ़ गई हैं. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली में कीमतों में 12 रुपये प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी हुई है. उच्च कीमत कम से कम एक महीने तक जारी रहने की संभावना है क्योंकि नवरात्र के बाद अगले कुछ दिनों में उत्तरी राज्यों में मांग बढ़ने की संभावना है. कीमतों को नियंत्रण में रखने के लिए सरकार अफगानिस्तान और अन्य देशों से कुछ आयात प्राप्त करने की उम्मीद कर रही है जहां लाल प्याज उगाए जाते हैं.
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फेस्टिव सीजन के कारण प्याज में उछाल- केंद्र सरकार ने प्याज की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए बफर स्टॉक से बाजार में आपूर्ति करने का भी फैसला लिया था. केडिया कमोडिटी के डायरेक्टर अजय केडिया का मानना है कि प्याज की बढ़ती कीमतों पर अंकुश लगाने के लिए समय पर सक्रिय हो गई है, इसलिए इसके भाव अधिक नहीं हो पाएंगे और जल्द ही नियंत्रित हो जाएंगे. उनका मानना है कि फेस्टिव सीजन के चलते प्याज में उछाल आ रही है.

प्याज का पर्याप्त उत्पादन- कृषि, सहकारिता एवं किसान कल्याण विभाग की वेबसाइट के मुताबिक 2018-19 में प्याज का उत्पादन 2.28 करोड़ टन था जो इस साल 2019-20 मंत्रालय के दूसरे अग्रिम आकलन में 2.67 करोड़ टन है. हालांकि बारिश के कारण इस बार प्याज की आपूर्ति बाधित हुई है.
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