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कोरोनाकाल में नहीं मिल रही नौकरी! तो अब घर पर शुरू करें ये बिज़नेस, होगी लाखों में कमाई

कोरोनाकाल में हर व्यक्ति महामारी के संकट को झेल रहा है. इसी बीच हम आपको घर बैठे बिज़नेस करने का एक आईडिया सुझा रहे हैं. ये बिज़नेस कम लागत में शुरू किया जा सकता है और कमाई अच्छी-खासी हो सकती है.

कोरोनाकाल में हर व्यक्ति महामारी के संकट को झेल रहा है. इसी बीच हम आपको घर बैठे बिज़नेस करने का एक आईडिया सुझा रहे हैं. ये बिज़नेस कम लागत में शुरू किया जा सकता है और कमाई अच्छी-खासी हो सकती है.

कोरोनाकाल में हर व्यक्ति महामारी के संकट को झेल रहा है. इसी बीच हम आपको घर बैठे बिज़नेस करने का एक आईडिया सुझा रहे हैं. ये बिज़नेस कम लागत में शुरू किया जा सकता है और कमाई अच्छी-खासी हो सकती है.

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    नई दिल्ली. कोरोनाकाल (Coronavirus Pandemic) में पानी की तरह लोगों की नौकरी जा रही हैं. जहां देखो हर तरफ यही खबर है कि बड़ी-बड़ी कंपनी लोगों को नौकरियों से निकाल रही हैं. इस समय हर व्यक्ति महामारी के संकट को झेल रहा है. इसी बीच हम आपको घर बैठे बिज़नेस (New Business Idea) करने का एक आईडिया सुझा रहे हैं. ये बिज़नेस कम लागत में शुरू किया जा सकता है और कमाई अच्छी-खासी हो सकती है. इसके लिए बस जरूरी है घर की छत और खुला आंगन. आजकल टेरेस फार्मिंग उभरता ट्रेंड है, जिसे कैश करने का बढ़िया मौका आपको मिल रहा है. इस तकनीक में मिट्टी का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं होता है और पौधों के लिए जरूरी पोषक तत्व पानी के सहारे सीधे पौधों की जड़ों तक पहुंचाया जाता है. इसे हाइड्रोपोनिक्स (Hydroponics) कहा जाता है.

    आज हम भी आपको एक खास बिज़नेस आइडिया के बारे में बता रहे हैं. इस बिज़नेस को शुरू कर आप अच्छी कमाई कर सकते हैं. ये आईडिया है छत पर खेती करने का, इसको अपनाकर आईआईटी ग्रेजुएट कौस्तुभ खरे और साहिल पारिख ने अपना बिजनेस शुरू किया है.

    उनकी कंपनी खेतीफाई सिर्फ 19 हजार रुपये में 200 वर्ग मीटर की छत को खेत बनाकर 700 किलोग्राम तक सब्जियां उगाती है. आइए जानें उनके बारे में…

    बिना मिट्टी और कम पानी से खेती- इन दोनों ने ऐसा मॉडल तैयार किया है, जिसमें मिट्टी की खपत नहीं होती और पानी भी कम से कम लगता है. छत पर खेती करने के लिए ऐसी क्यारी बनाई है जो वॉटर प्रूफ होती है और उससे पानी का छत पर टपकने का खतरा नहीं रहता है.

    जैविक सामग्री से लैस इन क्यारियों में भिंडी, टमाटर, बैंगन, मेथी, पालक, चौलाई, पोई साग और मिर्च उगता हैं. पानी मीठा होने की वजह से सब्जियां भी स्वादिष्ट होती हैं.

    इसमें में नारियल का खोल (सूखा छिलका) मुख्य तौर पर डाला जाता है. छत पर ज्यादा वजन ना पड़े और पानी रिसने की समस्या ना हो इसके लिए मिट्टी का इस्तेमाल नहीं होता है. इस बस्ते में नारियल के खोल के अलावा कुछ मिश्रण और मिलाया जाता है, जिससे फसल तेजी से और गुणवत्ता के साथ होती है.

    आप भी कर सकते हैं ऐसा- जिस तरह से खेती के लिए जमीन कम हो रही हैं, भविष्य में इन क्यारियों की मांग बढ़ेगी, 4 फीट गुणा 4 फीट की चार क्यारियों लगाने पर एक परिवार अपने महीने भर की जरूरत की सब्जी उगा सकता है. एक घंटा इन क्यारियों में समय लगाने से मन लायक सब्जी उगाई जा सकती है.

    एक तरीका ये भी हैं-खेतों के घटने और ऑर्गनिक फूड प्रोडक्ट की मांग बढ़ने से अर्बन फार्मिंग में नई और कारगर तकनीकों का चलन बढ़ता जा रहा है. मांग पूरी करने के लिए कारोबारी और शहरी किसान छतों पर, पार्किंग में या फिर कहीं भी उपलब्ध सीमित जगह का इस्तेमाल पैदावार के लिए कर रहे हैं.

    इन तकनीकों में फिलहाल जो तकनीक सबसे ज्यादा सफल है उसमें मिट्टी का इस्तेमाल ही नहीं होता. मिट्टी न होने से इसे छतों पर छोटी जगह में आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है. ये तकनीक इतनी सफल है कि सही जानकारी, सही सलाह से लगभग 1 लाख रुपए के खर्च से से आप घर बैठे सालाना 2 लाख रुपए तक की सब्जियां उगा सकते हैं.

    छत पर खेती-इस तकनीक को हाइड्रोपानिक्स कहा जाता है. इस तकनीक की खास बात यह है कि इसमें मिट्टी का इस्तेमाल बिल्कुल भी नहीं होता है. इससे पौधों के लिए जरूरी पोषक तत्वों को पानी के सहारे सीधे पौधों की जड़ों तक पहुंचाया जाता है.

    क्या है हाइड्रपानिक्स तकनीक-हाइड्रपॉनिक्स तकनीक में सब्जियां बिना मिट्टी की मदद से उगाई जातीं हैं. इससे पौधों के लिए जरूरी पोषक तत्वों को पानी के सहारे सीधे पौधों की जड़ों तक पहुंचाया जाता है. पौधे एक मल्टी लेयर फ्रेम के सहारे टिके पाइप में उगते हैं और इनकी जड़े पाइप के अंदर पोषक तत्वों से भरे पानी में छोड़ दी जाती हैं. मिट्टी न होने की वजह से छतों पर भार भी नहीं बढ़ता है. वहीं, बिल्कुल अलग सिस्टम होने की वजह से छत में कोई बदलाव भी नहीं करने पड़ते.

    नई टेक्नोलॉजी-हाइड्रपानिक्स एक पौधों को उगाने का बिल्कुल नया तरीका है और इसे किसान या कारोबारी अलग अलग तरह से इस्तेमाल में ला सकते हैं. वहीं इस क्षेत्र में काम कर रही कई कंपनियां भी आपको शौकिया गार्डन से लेकर कमर्शियल फार्म तक स्थापित करने में मदद कर सकती हैं. इस बारे में हाइड्रपानिक्स कंपनी ‘हमारी कृषि’ बताती हैं कि उपज के लिए तैयार फ्रेम और टावर गार्डेन ऑनलाइन बेच रही है.

    कंपनी के 2 मीटर ऊंचे टावर में 40 पौधे लगाने की जगह है. कंपनी के मुताबिक करीब 400 पौधे वाले 10 टावर की लागत 1 लाख के करीब है. इस कीमत में टावर, सिस्टम और जरूरी पोषक तत्व शामिल हैं.

    कंपनी के मुताबिक अगर सिस्टम को सही ढंग से इस्तेमाल किया जाए तो इसके बाद सिर्फ बीज और न्यूट्रिएंट का ही खर्च आता है. ये 10 टावर आपकी छत के 150 से 200 वर्ग फुट एरिया में आसानी से खड़े हो जाएंगे. छोटी जगह पर रखे फ्रेम को नेट शेड और बड़े स्तर पर खेती के लिए पॉली हाउस बनाकर ढकने से मौसम से सुरक्षा मिलती है.

    कमाई का बड़ा मौका-कंपनी हमारी कृषि के मुताबिक, ये तकनीक लोगों को रोजगार देने का अच्छा जरिये हो सकती है, क्योंकि परंपरागत कृषि के मुकाबले इसके मार्जिन बेहतर हैं.

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    >> शर्मा के मुताबिक, एक पॉड से साल भर में 5 किलो लेटिस (सलाद पत्ता) की उपज मिल सकी है. ऐसे में 10 टावर यानि 400 पॉड से 2000 किलो सालाना तक उपज मिल सकती है. फिलहाल लेटिस की कीमत भारत में 180 रुपए किलो है, शर्मा के मुताबिक अगर थोक में 100 रुपए किलो भी मिलते हैं तो अच्छी कंडीशन में साल में 2 लाख रुपए की उपज संभव है.

    >> वहीं उनके मुताबिक आम स्थितियों में आप आसानी से एक साल में अपना निवेश निकाल सकते हैं. अगले साल रिटर्न ज्यादा होगा क्योकिं आपको सिर्फ रखरखाव, बीज और न्यूट्रिएंट का खर्च ही करना है. यानी आप अपनी छत के सिर्फ 150 से 200 वर्ग फुट के इस्तेमाल से एक साल में ही अपना एक लाख का निवेश निकाल कर प्रॉफिट में आ सकते हैं.

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