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ई-टिकट रैकेट: हर महीने 15 करोड़ का ट्रांजैक्शन करता था यह शख्स, क्रिप्टोकरंसी से विदेश भेजता था पैसा

News18Hindi
Updated: January 22, 2020, 7:21 PM IST
ई-टिकट रैकेट: हर महीने 15 करोड़ का ट्रांजैक्शन करता था यह शख्स, क्रिप्टोकरंसी से विदेश भेजता था पैसा
आतंकी फंडिंग में पैसे का होता था इस्तेमाल

RPF के महानिदेशक (DG) ने बताया कि केवल गुलाम मुस्तफा का 15 करोड़ रुपये का ट्रांजैक्शन का पता चला है. यह रकम और ज्यादा भी हो सकती है और अगर सभी लोगों को जोड़ दें तो इससे कई गुना ज्यादा रकम हो सकती है.

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  • Last Updated: January 22, 2020, 7:21 PM IST
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नई दिल्ली. रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स (RPF) ने ट्रेन टिकट की कालाबाजारी का पर्दाफाश करते हुए झारखंड के रहने वाले गुलाम मुस्तफा को ओडिशा से गिरफ्तार किया है. उसके साथ 27 अन्य लोगों को पकड़ा गया है. यह टिकटों (Rail Ticket) की धांधली कर हर महीने करोड़ों कमाता था और आतंकी फंडिंग (Terror Funding) में इस्तेमाल करता था. RPF के महानिदेशक (DG) ने बताया कि अब तक केवल गुलाम मुस्तफा का 15 करोड़ रुपये का ट्रांजैक्शन का पता चला है. यह रकम और ज्यादा भी हो सकती है और अगर सभी लोगों को जोड़ दें तो इससे कई गुना ज्यादा रकम हो सकती है.

15 करोड़ के टिकटों की कर रहा था कालाबाजारी
झारखंड के गिरीडीह का रहने वाला गुलाम मुस्तफा बेंगलुरु में बैठक कर ई-टिकट फर्जीवाड़ा का गिरोह का संचालन कर रहा था. आईआरसीटीसी का सिस्टम हैक कर पूरे देश में हर महीने 15 करोड़ रुपये के रेल टिकटों की कालाबाजारी हो रही थी. इसके पास बरामद लैपटॉप और मोबाइल फ़ोन से जो जानकारी मिली उसने RPF के साथ ही बेंगलुरु पुलिस को हैरानी में डाल दिया है. इसका लैपटॉप और मोबाइल पूरी तरह से इन्क्रिप्टेड था.

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इसकी पढ़ाई-लिखाई ओडिशा के केन्द्रपाड़ा के मदरसों में हुई है. बाद में यह बेंगलुरु चला गया जहां इसने 2015 में रेलवे के काउंटर टिकट की दलाली शुरू की. फिर इसने सॉफ्टवेयर की ट्रेनिंग ली और ई-टिकटों की कालाबाज़ारी से जुड़ गया. इसके लैपटॉप से पता चलता है कि इसका संपर्क पाकिस्तान के कई संगठनों से हो सकता है. गुलाम मुस्तफ़ा के साथ कई सॉफ्टवेयर डेवलपर हैं और इनके नीचे 200-300 लोगों का पैनल 28,000 रुपये महीने पर काम करता है. यही लोग देशभर के 20,000 टिकट एजेंट्स से संपर्क में रहते हैं.

एक मिनट में 3 टिकट करता था बुक
इस गिरोह में 'गुरुजी' नाम का एक शख़्स भी जुड़ा हुआ है. हालांकि इसका मूल नाम कुछ और है, लेकिन यह इस गिरोह के लिए रेलवे के टिकट बुकिंग के सॉफ्टवेयर में घुसपैठ करता है. जहां आमतौर पर टिकट बुकिंग की पूरी प्रक्रिया में 3 मिनट तक लग जाते हैं, वहां गुरुजी ऐसे प्रोग्राम तैयार करता था जिससे एक मिनट में तीन टिकट बुक हो रहे हैं.ये भी पढ़ें: टेरर फंडिंग से जुड़ा है ट्रेन टिकट का काला कारोबार, दुबई तक फैले हैं तार

क्रिप्टोकरंसी से विदेश भेजता था पैसा
इस काले कारोबार से होने वाली कमाई कई बार भारत की एक सॉफ्टवेयर कंपनी में भी इन्वेस्ट की गई है. इस कंपनी पर पहले से ही सिंगापुर में एक आपराधिक मामला दर्ज़ है और इसकी जांच चल रही है. यह गिरोह भारत से हवाला के ज़रिए भी विदेशों तक रकम भेजता है. वहीं कई बार इसने बिटकॉइन जैसी क्रिप्टोकरंसी के ज़रिए भी पैसे विदेश तक भेजे हैं. इस रकम का इस्तेमाल टेरर फंडिग के लिए हो रहा है और इस जानकारी ने सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है. मुस्तफ़ा पिछले 10 दिन से बेंगलुरु में जुडिशियल कस्टडी में था और उसे अब पुलिस कस्टडी में भेज दिया गया है. अभी तक की जांच से RPF का अनुमान है कि हर महीने क़रीब 10-15 करोड़ रुपये की कमाई देश से बाहर अलग-अलग अलग तरीकों से भेजी जा रही थी.

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First published: January 22, 2020, 7:00 PM IST
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