ऑनलाइन पैसे ट्रांसफर करते समय भूलकर भी न करें ये गलती, अकाउंट से कट जाएगा पैसा

ऑनलाइन पैसे ट्रांसफर करते समय भूलकर भी न करें ये गलती, अकाउंट से कट जाएगा पैसा
IFSC की जरूरत(NEFT, RTGS या IMPS के जरिए फंड ट्रांसफर करते समय होती है.

तीन तरह के ऑनलाइन फंड ट्रांसफर करने के लिए IFSC कोड की जरूरत होती है. किसी भी बेनिफिशियरी को पैसे ट्रांसफर करने से पहले सही IFSC कोड को सुनिश्चित कर लेना चाहिए.

  • News18Hindi
  • Last Updated: July 20, 2020, 12:10 PM IST
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नई दिल्ली. आज के डिजिटल दुनिया में अब घर बैठे चुटकियों में पैसे ट्रांसफर करने की सुविधा मिलती है. सरकार भी देशभर में डिजिटल लेनदेन (Digital Transaction) को बढ़ावा दे रही है. लेकिन, ऑनलाइन फंड ट्रांसफर (Online Fund Transfer) करते समय आपको कई बातों का विशेष ध्यान देना होता है, क्योंकि आपकी एक गलती बहुत भारी पड़ सकती है. अगर आप नेटबैंकिंग या मोबाइल बैंकिंग के जरिए फंड ट्रांसफर करते हैं तो अन्य जानकारियों के साथ आपको सही IFSC (Indian Financial System Code) डालना भी जरूरी है. हर बैंक का अपना अलग IFSC होता है.

IFSC की जरूरत नेशनल इलेक्ट्रॉनिक फंड्स ट्रांसफर (NEFT), रियल-टाइम ग्रॉस सेटलमेंट (RTGS) या इमिडिएट पेमेंट सर्विस (IMPS) के जरिए फंड ट्रांसफर करते समय होती है. सबसे पहले आपको उस व्यक्ति के बैंक अकाउंट की जानकारी को बेनिफिशियरी के तौर पर रजिस्टर करना होता है और फिर उसके बाद आप इन माध्यमों के जरिए फंड ट्रांसफर कर सकते हैं. बेनिफिशियरी रजिस्टर करने के​ लिए आपको संबंधित व्यक्ति की कई जानकारियां देनी होती है, जिसमें उनका नाम, बैंक का नाम, अकांउट नंबर, आईएफएससी कोड आदि शामिल होता है.

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के रेग्युलेशंस के मुताबिक, ऑनलाइन फंड ट्रांसफर करने से पहले यह जानकारी देना अनिवार्य है. कुछ बैं​क बेनिफिशियरी रजिस्ट्रेशन को मैच भी करते हैं, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि सही व्यक्ति को ही फंड ट्रांसफर किया जा रहा है. हालांकि, बैंकों के लिए यह अनिवार्य नहीं है. अब आइए जानते हैं कि अगर आपने किसी बैंक या बैंक ब्रांच का आईएफएससी कोड गलत डाल दिया है तो आपको कैसे नुकसान हो सकता है.



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क्या होता है IFSC?
इंडियन फाइनेंशियल सिस्टम कोड 11 डिजिट का एक यूनिक अल्फान्यूमेरिक कोड होता है, जिसकी मदद से हर बैंक के प्रत्येक ब्रांच को पहचाना जा सकता है. आमतौर पर इस कोड का पहला 4 डिजिट बैंक का नाम होता है. पांचवां डिजिट “0" और अंतिम 6 डिजिट ब्रांच कोड होता है. उदाहरण के तौर पर समझें तो SBIN0040278 स्टेट बैंक के किसी ब्रांच का आईएफएससी कोड है. इसमें पहले चार डिजिट यानी SBIN का मतलब भारतीय स्टेट बैंक से है. जबकि, अंतिम 6 डिजिट यानी 40278 एसबीआई ब्रांच का कोड है. आईएफएससी की मदद से आरबीआई उस ब्रांच के बारे में पता लगाता है, जहां के बेनिफिशियरी को पैसे ट्रांसफर किए गए हैं.

गलत आईएफएससी देने पर क्या होगा?
आमतौर पर गलत आईएफएससी देने का चांस कम होता है क्योंकि अधिकतर बैंक ड्रॉपडाउन मेन्यू में बैंक व ब्रांच के नाम के बारे में जानकारी के आधार पर आईएफएससी भरने की सुविधा देते हैं. लेकिन, कुछ बैंक आईएफएससी लिखने का भी विकल्प देते हैं. ऐसे में आईएफएससी कोड को लेकर दो तरह की गलतियों की संभावना होती है.

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गलत ब्रांच का आईएफएससी सेलेक्ट करने पर: मान लीजिए कि आपको दिल्ली के किसी ब्रांच का आईएफएससी चुनना है लेकिन आपने नोएडा स्थित किसी ब्रांच के आईएफएससी को चुन लिया है. इस स्थिति में संभव है कि पैसे ट्रांसफर हो सकते हैं. हालांकि, इसके ​लिए अन्य जानकारियां भी सही होनी चाहिए. दरअसल, आपके द्वारा दिए गए आईएफएससी किसी अन्य ब्रांच का हो सकता है. ऐसी स्थिति में फंड ट्रांसफर पूरा हो जाएगा.

गलत बैंक का आईएफएससी चुनने पर: मान लीजिए कि आपको आईसीआईसीआई बैंक के किसी अकाउंट में पैसे ट्रांसफर करना है लेकिन आपने गलती से एसबीआई के IFSC को भर दिया है. ऐसी स्थिति में फंड ट्रांसफर इस बात पर निर्भर करेगा कि क्या एसबीआई में भी मैचिंग अकाउंट नंबर का कोई बैंक अकाउंट है या नहीं. अगर मैचिंग अकाउंट नंबर है तो फंड ट्रांसफर पूरा हो सकता है.

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हालांकि, दो बैंकों में एक ही अकाउंट नंबर से बैंक अकाउंट होने की संभावना बेहद कम होती है, लेकिन यह असंभव नहीं है. अकाउंट नंबर तो किसी नंबर्स का एक कॉम्बिनेशन होता है. ऐसे में संभव हो सकता है कि एक है कि एक ही अकाउंट नंबर से दो अलग-अलग बैंकों में अकाउंट हो.
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