CAIT के ऑनलाइन सर्वे में बोले व्यापारी-‘लॉकडाउन नहीं, बाजार और सरकारी दफ्तर में ऐसा करे सरकार’

CAIT की मांग - ‘लॉकडाउन नहीं, बाजार और सरकारी दफ्तर में ऐसा करे सरकार’

CAIT की मांग - ‘लॉकडाउन नहीं, बाजार और सरकारी दफ्तर में ऐसा करे सरकार’

कोरोना से निपटने के लिए कारोबारियों ने बाजार और सरकारी दफ्तरों से जुड़ी एक योजना भी बताई है. कारोबारियों का कहना है कि नाइट कर्फ्यू और लॉकडाउन से हालात नहीं सुधरेंगे. बल्कि कदम ऐसा होना चाहिए जिससे कोरोना (Corona) से भी लड़ा जा सके और कारोबार-अर्थव्यवस्था भी चलती रहे.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 12, 2021, 1:03 PM IST
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नई दिल्ली. देश में व्यापारियों के सबसे बड़े संगठन कॉन्फेडरेशन ऑफ आल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने एक आनलाइन सर्वे (Online Survey) कराया है. इस सर्वे में कारोबारी लॉकडाउन (Lockdown) के एकदम खिलाफ हैं, लेकिन ऐसा भी नहीं है कि वो कोरोना के खिलाफ लड़ी जा रही जंग में शामिल नहीं है. कोरोना से निपटने के लिए कारोबारियों ने बाजार और सरकारी दफ्तरों से जुड़ी एक योजना भी बताई है. कारोबारियों का कहना है कि नाइट कर्फ्यू और लॉकडाउन से हालात नहीं सुधरेंगे. बल्कि कदम ऐसा होना चाहिए जिससे कोरोना (Corona) से भी लड़ा जा सके और कारोबार-अर्थव्यवस्था भी चलती रहे.

कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीसी भरतिया और राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने ऑनलाइन सर्वे के बारे में बताते हुए कहा, “कैट द्वारा कराये गए इस ऑनलाइन सर्वे में दिल्ली एवं देश के अन्य प्रांतों के 8277 लोगों ने भाग लेकर अपनी राय सर्वे के जरिये व्यक्त की है ! सर्वे में कोविड एवं इससे रोकथाम को लेकर कुल 8 सवाल पूछे गए थे जिनका स्पष्ट उत्तर सर्वे में भाग लेने वाले लोगों ने दिया है.

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सर्वे में 836 लोगों ने माना है की लॉकडाउन से व्यापारिक गतिविधियां विपरीत रूप से प्रभावी होंगी. वहीं एक अन्य सवाल के उत्तर में 77.8 फीसद लोगों ने कहा की बाज़ारों और सरकारी समेत अन्य कार्यालयों के समय में परिवर्तन से कोरोना पर काफी हद तक लगाम लगाई जा सकती है.
83.4 फीसद लोगों ने माना की दुकानें बंद करने कोरोना का समाधान नहीं है. सर्वे में 94.1 फीसद लोगों ने स्वीकार किया की यदि कोरोना सेफ्टी प्रोटोकॉल सख्ती से अपनाये जाएं तो कोविड पर नियंत्रण भी हो सकता है और व्यापार भी जारी रखा जा सकता है.

सर्वे में 96.7 फीसद लोगों ने कोविड की रोकथाम और कोविड पर चलने वाले स्थानीय जन-जागरण हेतु प्रशासन का सहयोग करने की बात कही है. वहीं 79.6 फीसद लोगों ने यह भी कहा की वो अभी तक पिछले लॉकडाउन के नुकसान की भरपाई नहीं कर पाए हैं. सर्वे में 93 फीसद लोगों ने यह भी कहा की उनके परिवार, कर्मचारियों एवं अन्य लोगों में जो वैक्सीन के पात्र हैं, उन्हें फौरन वैक्सीन लगवाई जाए. ”

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भरतिया और खंडेलवाल ने कहा की उपरोक्त सर्वे से यह साफ हो गया है कि की लोग लॉकडाउन को अंतिम विकल्प के रूप में देखते हैं और यह संकेत दे रहे हैं की सरकार कोविड से निपटने के लिए पहले अन्य उपलब्ध विकल्प अपनाये और फिर भी यदि कोविड पर नियंत्रण नहीं हो पाता है तभी लॉकडाउन को अंतिम विकल्प के रूप में इस्तेमाल किया जाए. गौरतलब रहे 5 अप्रैल से लेकर अब तक कोरोना के मामलों की संख्यां दुगनी से भी ज्यादा हो गई है, जबकि देश के अनेक राज्यों में रात्रि कर्फ्यू, लॉकडाउन, आंशिक लॉकडाउन जैसे कदम भी उठाये गए हैं.



कैट कल ही इस सम्बन्ध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन, वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल समेत देश के सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पत्र भेज चुका है. साथ ही भरोसा दिलाया है कि कोविड से बचाव के सभी प्रयासों में देश के व्यापारी संगठन पूरे तौर पर सरकार के साथ मजबूती से खड़े हैं.
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