ऐसे हुई देश के सबसे बड़े बैंक SBI की शुरुआत, 100 साल से ज्यादा पुराना है इतिहास

ऐसे हुई देश के सबसे बड़े बैंक SBI की शुरुआत, 100 साल से ज्यादा पुराना है इतिहास
1 जुलाई 1955 को इम्पीरियल बैंक का नाम बदलकर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया रख दिया गया था.

1 जुलाई 1955 को इम्पीरियल बैंक का नाम बदलकर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया रख दिया गया था. तब से प्रत्येक वर्ष 1 जुलाई को एसबीआई की देश-विदेश शाखाओं में बैंक का स्थापना दिवस मनाया जाता हैं. SBI देश का सबसे विश्वसनीय बैंक है. मुनाफे, जमा, संपत्ति, संपत्ति, ब्रांच और कस्टमर्स के लिहाज से सबसे बड़ा व्यावसायिक बैंक है.

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नई दिल्ली. देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक एसबीआई स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) का आज स्थापना दिवस है. 1 जुलाई 1955 को इम्पीरियल बैंक (Imperial Bank) का नाम बदलकर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (State Bank of India) रख दिया गया था. तब से हर साल 1 जुलाई को एसबीआई की देश-विदेश शाखाओं में बैंक का स्थापना दिवस मनाया जाता हैं. SBI देश का सबसे विश्वसनीय बैंक है. मुनाफे, जमा, संपत्ति, संपत्ति, ब्रांच और कस्टमर्स के लिहाज से सबसे बड़ा व्यावसायिक बैंक है. SBI जितना बड़ा है, उतना ही बड़ा और समृद्ध उसका इतिहास है. जानिए 213 साल पुराने SBI से जुड़े वो फैक्ट्स जिनसे आप अनजान होंगे.

(1) साल 1806 में कोलकाता में बैंक ऑफ कोलकाता की स्थापना हुई. जो बाद में बैंक ऑफ बंगाल के नाम से जाना गया. 1921 में बैंक ऑफ मुंबई और बैंक ऑफ मद्रास का बैंक ऑफ बंगाल में विलय हो गया. जो मिलकर इम्पीरियल बैंक ऑफ इंडिया बना.

(2) ब्रिटिश काल में था बैंक ऑफ बंगाल ब्रिटिश शासन काल के दौरान 2 जून 1806 को कोलकाता में ‘बैंक ऑफ कलकत्ता ’ की स्थापान की गई थी. इसके तीन साल बाद इसको चार्टर मिला जिसे बैंक ऑफ बंगाल के रूप में 2 जनवरी 1809 को पुर्नगठित किया गया. यह अपने तरह का एक अनोखा बैंक था जिसको साझा स्टॉक के तहत ब्रिटिश भारत और बंगाल सरकार के द्वारा संचालित किया जाता था.



(3) मुंबई में दो और बैंकों की स्थापना बैंक ऑफ बंगाल के अलावा मुंबई में बैंक ऑफ बांबे की 1840 में और बैंक ऑफ मद्रास की स्थापना 1843 में की गई . हालांकि, इन तीनों बैंकों में पूंजी निजी क्षेत्र की थी, लेकिन इसे ईस्ट इंडिया कंपनी के लिए खोला गया था.



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(4) ये तीनों बैंक आधुनिक भारत के प्रमुख बैंक तक बने रहे जब तक कि इनका विलय इंपीरियल बैंक ऑफ इंडिया में नहीं हो गया.

(4) इन तीनों बैंको की पूंजी शुरुआती दौर में निजी शेयर होल्डरों के पास थी, जिसमें यूरोपियन की ज्यादा हिस्सेदारी थी. हालांकि, 1823 में इन तीनों बैंकों पर सरकार का नियंत्रण कायम हो गया था.

(5) बैंक ऑफ बंगाल से बना इंपीरियल बैंक 27 जनवरी, 1921 में बैंक ऑफ बंगाल, बैंक ऑफ बांबे और बैंक ऑफ मद्रास को मिलाकर इंपीरियल बैंक ऑफ इंडिया की स्थापना की गई थी. इंपीरियल बैंक में विलय से पहले ये तीनों बैंक भारत में स्वतंत्र रूप से काम कर रहे थे.

(6) 1861 में लागू हुआ पेपर करंसी एक्ट 1861 तक पेपर करंसी एक्ट लागू हो गया था. इससे पहले ये तीनों बैंकों को विशेष तौर पर करंसी छापने का अधिकार मिला मिला हुआ था, जिसके तहत वे पेपर करंसी को छाप सकते थे.

(7) सन 1955 में इंपीरियल बैंक बना स्टेट बैंक देश आजाद होने के बाद रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने इंपीरियल बैंक ऑफ इंडिया को पार्लियामेंटरी एक्ट के तहत अधिग्रहित किया. जिसके लिए स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, एक्ट 1955 लाया गया और इंपीरियल बैंक ऑफ इंडिया का नाम 30, अप्रैल 1955 बदलकर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया रखा गया.

(8) इसके बाद 1 जुलाई 1955 को एसबीआई की स्थापना की गई. अपने स्थापना काल में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के कुल 480 ऑफिस थे जिसमें ब्रांच, सब ब्रांच और तीन लोकल हेडक्वाटर शामिल थे, ये सभी इंपीरियल बैंक के हेडक्वाटर में बनाए गए थे.

(9) साल 1955 में ही स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (सब्सिडरी एक्ट) पारित हुआ. इसके बाद अक्टूबर में स्टेट बैंक ऑफ हैदराबाद SBI का पहला सहयोगी बैंक बना. इन सहयोगी बैंकों में स्टेट बैंक बीकानेर, स्टेट बैंक ऑफ इंदौर, स्टेट बैंक ऑफ जयपुर, स्टेट बैंक ऑफ सौराष्ट्र, स्टेट बैंक ऑफ मैसूर, स्टेट बैंक ऑफ पटियाला, स्टेट बैंक ऑफ त्रावणकोर, भारतीय महिला बैंक (बीएमबी) शामिल हैं. हालांकि 1 अप्रैल 2017 को एसबीआई में इन सहयोगी बैंकों को विलय हो गया.
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