SBI ने दिया करोड़ों ग्राहकों को तोहफा! 14वीं बार घटाई ब्याज दरें, अब कम होगी आपकी EMI

SBI ने दिया करोड़ों ग्राहकों को तोहफा! 14वीं बार घटाई ब्याज दरें, अब कम होगी आपकी EMI
भारतीय स्टेट बैंक

देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआई भारतीय स्टेट बैंक (SBI-State Bank of India) ने बुधवार को अपनी प्रमुख लोन की दर एमसीएलआर में कटौती करने की घोषणा की. बैंक ने छोटी अवधि के एमसीएलआर में 0.10 फीसदी तक की कटौती कर दी है. नई दरें बुधवार 10 जुलाई से लागू होंगी.

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नई दिल्ली. एसबीआई (SBI-State Bank of India) ने अपने ग्राहकों को राहत देते हुए लोने की ब्याज दरें घटाने का ऐलान किया है. बैंक ने छोटी अवधि की एमसीएलआर दरें (MCLR) 0.05 फीसदी से 0.10 फीसदी तक घटाने का ऐलान किया है. इस फैसले के बाद एसबीआई की दर घटकर 6.65 फीसदी पर आ गई है. SBI का दावा है कि मौजूदा समय में उनकी एमसीएलआर दरें देश में सबसे कम हैं. नई दरें 10 जुलाई से लागू होंगी. आपको बता दें कि जून में भी एसबीआई ने ब्याज दरें घटाने का फैसला किया था. 10 जून को एसबीआई की एमसीएलआर दरें 0.25 फीसदी घटकर 7 फीसदी पर आ गई थी.आपको बता दें कि आरबीआई ने 22 मई को रेपो रेट को 0.40 फीसदी घटकर 4 फीसदी कर दिया था. इसके बाद पंजाब नेशनल बैंक, बैंक ऑफ इंडिया और यूको बैंक ने रेपो और एमसीएलआर से जुड़ी अपनी लोन दरें पहले ही घटा दी हैं.

1 जुलाई से सस्ता हो चुका  रेपो लिंक्ड लेंडिंग रेट आधारित लोन- एसबीआई एक्सटर्नल बेंचमार्क लिंक्ड लेंडिंग रेट (ईबीआर) और रेपो लिंक्ड लेंडिंग रेट (आरएलएलआर) की दरें भी घटा चुका है.

इन दोनों दरों में पहली जुलाई से 0.40 फीसदी की कटौती लागू हुई है. इस कटौती के बाद सालाना ईबीआर 7.05 फीसदी से घटकर 6.65 फीसदी पर आ गई है. इसी तरह आरएलएलआर 6.65 फीसदी से घटकर 6.25 फीसदी पर आ गई है.



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30 साल के लिए लिए गए 25 लाख रुपए के लोन पर एमसीएलआर के तहत मासिक किस्त करीब 421 रुपए घट जाएगी. इसी तरह ईबीआर व आरएलएलआर के तहत मासिक किस्त 660 रुपए घट जाएगी.

क्या होती है एमसीएलआर- एमसीएलआर वह दर होती है जिससे नीचे पर बैंक लोन नहीं दे सकता. जाहिर है इसके कम हो जाने से अब कम दर पर बैंक लोन देने में सक्षम हो जाएगा जिससे हाउस लोन से लेकर वीकल लोन तक आपके लिए सब के सब सस्ते हो सकते हैं.

लेकिन यह फायदा नए ग्राहकों के साथ साथ सिर्फ उन्हीं ग्राहकों को मिलेगा जिन्होंने अप्रैल 2016 के बाद लोन लिया है, क्योंकि उसके पहले लोन देने के लिए तय मिनिमम रेट बेस रेट कहलाती थी. यानी इससे कम दर पर बैंक वोन नहीं दे सकते थे.
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