सरकारी बैंक OBC ने ग्राहकों को दिया तोहफा, इतनी सस्ती हो गई होम-ऑटो लोन की EMI

सरकारी बैंक OBC ने ग्राहकों को दिया तोहफा, इतनी सस्ती हो गई होम-ऑटो लोन की EMI
ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स

सरकारी बैंक ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स (OBC) ने ग्राहकों को तोहफा दिया है. OBC ने विभिन्न अवधि के लोन पर ब्याज दर में कटौती की है. मार्जिनल कॉस्ट ऑफ लेंडिंग रेट (MCLR) में 0.10 फीसदी तक की हैजानें कितनी कम हुई ब्याज दरें.

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  • Last Updated: June 11, 2019, 12:51 PM IST
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सरकारी बैंक ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स (OBC) ने ग्राहकों को तोहफा दिया है. OBC ने विभिन्न अवधि के लोन पर ब्याज दर में कटौती की है. मार्जिनल कॉस्ट ऑफ लेंडिंग रेट (MCLR) में 0.10 फीसदी तक की है. यह कटौती 11 जून से लागू होगी. MCLR घटने से आम आदमी को सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि उसका मौजूदा लोन सस्ता हो जाता है और उसे पहले की तुलना में कम EMI देनी पड़ती है. आपको बता दें कि 6 जून को आरबीआई ने रेपो रेट 0.25 फीसदी घटा दिया था. इसके बाद बैंक ने ब्याज दरें घटाने की घोषणा की है.

कितना सस्ता हुआ लोन
>> शेयर बाजार को दी गई सूचना में बैंक ने कहा कि वह 11 जून से यह कटौती कर रहा है. इसके बाद बैंक के एक माह और छह माह की अवधि वाले लोन पर ब्याज दर 0.10 फीसदी घटकर क्रमश: 8.35 फीसदी और 8.60 फीसदी रह गयी. पहले यह क्रमश: 8.45 और 8.70 फीसदी थी.
>> इसी तरह एक साल की अवधि वाले लोन पर ब्याज दर में 0.05 फीसदी की कटौती की गई है जो अब 8.75 से घटकर 8.70 फीसदी हो गई है.



>> बैंक ने एक दिन और तीन माह के लोन पर ब्याज दरों को अपरिवर्तित क्रमश: 8.30 और 8.50 फीसदी रखा है.
>> बैंक की ओर से ब्याज दर में यह कमी रिजर्व बैंक के रेपो दर में 0.25 फीसदी की कटौती के बाद की गई है. रिजर्व बैंक ने पिछले हफ्ते रेपो दर को 6 फीसदी से घटाकर 5.75 फीसदी कर दिया था.



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MCLR कम होने से होता है ये असर
MCLR कम होने से आम आदमी को सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि उसका मौजूदा लोन सस्ता हो जाता है और उसे पहले की तुलना में कम ईएमआई देनी पड़ती है.

क्या है MCLR
MCLR को मार्जिनल कॉस्ट ऑफ लेंडिंग रेट भी कहते हैं. इसमें बैंक अपने फंड की लागत के हिसाब से लोन की दरें तय करते हैं. ये बैंचमार्क दर होती है. इसके बढ़ने से आपके बैंक से लिए गए सभी तरह के लोन महंगे हो जाते हैं.

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कैसे तय होता है MCLR
मार्जिनल का मतलब होता है- अलग से या अतिरिक्त. जब भी बैंक लेंडिंग रेट तय करते हैं, तो वे बदली हुई स्थ‍ितियों में खर्च और मार्जिनल कॉस्ट को भी कैलकुलेट करते हैं. बैंकों के स्तर पर ग्राहकों को डिपॉजिट पर दिए जाने वाली ब्याज दर शामिल होती है. MCLR को तय करने के लिए चार फैक्टर को ध्यान में रखा जाता है. इसमें फंड का अतिरिक्त चार्ज भी शामिल होता है. निगेटिव कैरी ऑन CRR भी शामिल होता है. साथ ही, ऑपरेशन कॉस्ट औक टेन्योर प्रीमियम शामिल होता है.

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