ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी बना रही है Coronavirus की वैक्सीन, मिली कामयाबी तो अक्टूबर तक भारत में भी मिलने लगेगी

बीएसएफ के 17 जवान कोरोना संक्रमित.
बीएसएफ के 17 जवान कोरोना संक्रमित.

ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय द्वारा विकसित कोविड-19 टीके का दो से तीन सप्ताह में प्रोडक्शन शुरू हो जाएगा. अगर इसका मानव परीक्षण सफल रहा तो अक्टूबर तक यह वैक्सीन बाजार में आ जाने की उम्मीद है.

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नई दिल्ली. टीके बनाने वाली कंपनी सेरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने कहा है कि ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय द्वारा विकसित कोविड-19 टीके का वह दो से तीन सप्ताह में प्रोडक्शन शुरू कर देगी. अगर इस वैक्सीन का मानव परीक्षण सफल रहा तो अक्टूबर तक यह वैक्सीन बाजार में आ जाने की उम्मीद है. पुणे स्थित कंपनी सेरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया उन सात वैश्विक कंपनियों में शामिल है, जिसके साथ ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय ने टीके के उत्पादन के लिए साझेदारी की है. कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) अदार पूनावाला ने कहा कि हमारी टीम ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के डॉ. हिल के साथ मिलकर काम कर रही है. पहले छह महीने उत्पादन की क्षमता प्रति माह 50 लाख खुराक की रहेगी. इसके बाद हमें उत्पादन बढ़ाकर प्रति माह एक करोड़ खुराक कर लेने की उम्मीद है.

अगले दो से तीन सप्ताह में इस टीके का परीक्षण भारत में शुरू होगा
सेरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया पहले भी ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के साथ मलेरिया टीका परियोजना पर काम कर चुकी है. पूनावाला ने कहा कि हमें कोविड-19 वैक्सीन के सितंबर-अक्टूबर तक बाजार में आ जाने की उम्मीद है. बशर्ते टीके का परीक्षण आवश्यक सुरक्षा व पर्याप्त प्रभाव के साथ सफल हो जाए. हम अगले दो से तीन सप्ताह में इस टीके का परीक्षण भारत में शुरू कर देंगे.

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टीके की मैन्युफैक्चरिंग पुणे स्थित फैक्ट्री में की जाएगी


कंपनी ने कहा कि भारत में इस टीके का परीक्षण शुरू करने के लिए आवश्यक मंजूरियां लेने की प्रक्रिया चल रही है. पूनावाला ने कहा कि मौजूदा स्थिति को ध्यान में रखते हुए हमने इस प्रयास को खुद से वित्तपोषित किया है. हमें उम्मीद है कि उत्पादन बढ़ाने में हमें अन्य साझेदारों से भी सहयोग मिलेगा. उन्होंने कहा कि टीके की मैन्युफैक्चरिंग पुणे स्थित फैक्ट्री में की जाएगी. कोविड-19 के टीके बनाने के लिए यदि अलग से संयंत्र बनाया जाए तो इसमें करीब दो से तीन साल लग जाएंगे.

टीके का पेटेंट नहीं करायेगी कंपनी
उन्होंने कहा कि कंपनी इस टीके का पेटेंट नहीं कराएगी और इसे न सिर्फ भारत बल्कि दुनिया भर की कंपनियों के लिए उत्पादन व बिक्री करने के लिए उपलब्ध कराएगी. उन्होंने कहा कि जो कोई भी इसका टीका विकसित करेगा, उसे टीके की मैन्युफैक्चरिंग के लिए कई साझेदारों की जरूरत पड़ेगी.

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