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सरकार ने संसद में माना, पराली जलाने से नष्ट होती है खेतों की उर्वरा शक्ति

सरकार ने संसद में माना, पराली जलाने से नष्ट होती है खेतों की उर्वरा शक्ति

पराली जलाकर किसान खुद का ही नुकसान कर रहे हैं.

पराली जलाकर किसान खुद का ही नुकसान कर रहे हैं.

कृषि मंत्री के मुताबिक यह अनुमान लगाया गया है कि एक टन धान पराली में लगभग 5.5 किलोग्राम नाइट्रोजन (N), 2.3 किलोग्राम फॉस्फोरस टाक्‍साईड (P2O5), 25 किलोग्राम पोटेशियम ऑक्साइड (k2O), 1.2 किलोग्राम सल्फर (S), और 400 किलोग्राम कार्बन होते हैं, जो धान की पराली को जलाने के कारण नष्ट हो जाते हैं.

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    नई दिल्ली. पूरे पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अंधाधुंध पराली जलाई जा रही है लेकिन क्या इसे जलाते वक्त किसी ने यह सोचा है कि ऐसा करने से खेती की उर्वरा शक्ति नष्ट हो जाती है. यदि नहीं तो यह खबर आपके काम की है. मोदी सरकार ने संसद में एक लिखित जवाब में कहा है कि इसके जलाने से नुकसान है.

    सांसद हरनाथ सिंह यादव ने कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री से पूछा था कि क्या पराली जलाने से किसानों के खेतों की उर्वरा शक्ति नष्ट होती है? क्या पराली के निस्तारण के लिए कोई वैकल्पिक योजना सरकार के विचाराधीन है? इसका जवाब कृषि एवं किसान कल्‍याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने दिया.

    पराली जलाने से ये होता है नुकसान
    तोमर के मुताबिक यह अनुमान लगाया गया है कि एक टन धान पराली में लगभग 5.5 किलोग्राम नाइट्रोजन (N), 2.3 किलोग्राम फॉस्फोरस टाक्‍साईड (P2O5), 25 किलोग्राम पोटेशियम ऑक्साइड (k2O), 1.2 किलोग्राम सल्फर (S), और 400 किलोग्राम कार्बन होते हैं, जो धान की पराली को जलाने के कारण नष्ट हो जाते हैं. इसके अलावा, मिट्टी के तापमान, पीएच, नमी, उपलब्ध फास्फोरस और मिट्टी के कार्बनिक पदार्थ जैसे मिट्टी के कुछ गुण जो मिट्टी की सूक्ष्मजीव आबादी को नियंत्रित करते हैं, जलने के कारण बुरी तरह प्रभावित होते हैं.

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    पराली प्रबंधन के लिए मशीनों का सहारा
    पराली जलाने से वायु प्रदूषण की समस्‍या हो रही है. इसकी कटाई के लिए मशीन की जरूरत है. इस पर सरकार 50 फीसदी की सब्सिडी दी जा रही है. 2018-19 से 2019-20 के लिए 1151.80 करोड़ रुपए का आवंटन किया गया है.2018-2019 के दौरान किसानों और कस्‍टम हायरिंग केंद्रों को 56290 से अधिक मशीनों की आपूर्ति की गई है. वर्ष 2019-20 के दौरान, अब तक 32808 से अधिक मशीनों की आपूर्ति की गई है.राज्‍य सरकारों और कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) ने भी किसानों में जागरूकता के लिए कार्यक्रम किए हैं.

    क्यों हो रही ही है पराली की समस्या
    पराली की समस्या तब से पैदा हुई है जब से धान की फसल मशीनों से कट रही है. मशीन एक फुट ऊपर से धान का पौधा काट देती है. जो शेष भाग बचता है वो किसान के लिए समस्या बन जाता है. इसे कटवाने की बजाए किसान जला देता है. इस समस्या से निपटने के लिए कुछ कंपनियों ने मशीन तैयार की है. इसका नाम पैड्डी स्ट्रॉ चौपर (Paddy Straw Chopper Machine) है.

    इसका दाम है 1.45 लाख. इसे ट्रैक्टर के साथ जोड़ दिया जाता है और यह पराली के छोटे-छोटे टुकड़े बनाकर खेत में फैला देती है. बारिश होते ही पराली के ये टुकड़े मिट्टी में मिलकर सड़ जाते हैं. इन मशीनों पर 50 फीसद तक की सब्सिडी है. पराली निस्तारण के लिए मार्केट में सात-आठ तरह की मशीनें मौजूद हैं.

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    Tags: Air pollution, Air pollution delhi, Business news in hindi, Farmer, Lok sabha

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