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  • पाकिस्तान का चालू खाता घाटा 2021-22 में बढ़कर 12-17 अरब डॉलर हो सकता है: इमरान खान के पूर्व सहयोगी

पाकिस्तान का चालू खाता घाटा 2021-22 में बढ़कर 12-17 अरब डॉलर हो सकता है: इमरान खान के पूर्व सहयोगी

कर्ज के जाल में बुरी तरह से फंसा है पाकिस्तान

कर्ज के जाल में बुरी तरह से फंसा है पाकिस्तान

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के पूर्व सहयोगी और अनुभवी नौकरशाह वकार मसूद खान ने कहा कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर चालू वित्त वर्ष के दौरान दबाव बढ़ जाएगा. वित्त वर्ष 2021-22 में उसे 12 -17 अरब डॉलर के चालू खाते के घाटे का सामना करना पड़ सकता है.

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    इस्लामाबाद . पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के पूर्व सहयोगी और अनुभवी नौकरशाह वकार मसूद खान ने कहा कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर चालू वित्त वर्ष के दौरान दबाव बढ़ जाएगा. वित्त वर्ष 2021-22 में उसे 12 -17 अरब डॉलर के चालू खाते के घाटे का सामना करना पड़ सकता है.

    समाचार पत्र डॉन की एक रिपोर्ट के अनुसार खान ने बुधवार को कराची स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (आईबीए) में एक पुस्तक विमोचन समारोह में कहा कि पाकिस्तान के भुगतान संकट के गंभीर होने की आशंका है.

    अर्थव्यवस्था दबाव में 

    रिपोर्ट में उनके हवाले से कहा गया, ‘‘पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था चालू वित्त वर्ष के दौरान भुगतान संतुलन के बढ़ते संकट के कारण दबाव में रहेगी. देश को 2021-22 के लिए 12 अरब अमेरिकी डॉलर से 17 अरब अमेरिकी डॉलर के चालू खाते के घाटे का सामना करना पड़ सकता है.’’

    यह भी पढ़ें – भारत की वृद्धि दर 2021 में 7.2 प्रतिशत रहने की उम्मीद, अगले साल आ सकती है कमी: संयुक्त राष्ट्र 

    खान ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) कार्यक्रम के फिर से लागू होते ही देश को ब्याज दर, विनिमय दर, कराधान और ऊर्जा नीतियों में बड़े बदलाव की उम्मीद करनी चाहिए. खान ने हाल ही में प्रधानमंत्री के विशेष सहायक (राजस्व और वित्त) का पद छोड़ा है. उन्होंने 2013 से 2017 तक संघीय वित्त सचिव के रूप में कार्य किया.

    कर्ज के जाल में फंसा पाकिस्तान
    पाकिस्तान कर्ज के जाल में बुरी तरह से फंस गया है. पाकिस्तान ट्रिब्यून की एक रिपोर्ट बताती है कि पाकिस्तान सरकार का कर्ज और रक्षा पर ब्याज का भुगतान पिछले वित्तीय वर्ष (2020-2021) में 4.1 ट्रिलियन पाकिस्तानी रुपये तक पहुंच गया है. यह रकम पाकिस्तान के शुद्ध राजस्व से 538 अरब रुपये अधिक है.

    पाकिस्तान वित्त मंत्रालय ने मामले को लेकर जानकारी 26 अगस्त को जानकारी देते हुए बताया है कि कमाई और खर्च के बीच का अंतर 3.4 ट्रिलियन रुपये का रहा है. या इसे ऐसे समझिये कि यह कुल GDP का 7.1 फीसद रहा. घाटा सरकारी लक्ष्य से अधिक रहा है लेकिन पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में यह GDP का एक फीसद कम है. इसके पीछे का कारण प्रदेश सरकारों द्वारा 3.3 बिलियन की बचत को बताया जा रहा है.

    जब तीन साल पहले इमरान खान वाली पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ सरकार सत्ता में आई तो कुल बजट घाटा 2.2 ट्रिलियन रुपये या GDP के 6.6 फीसद के बराबर था. केंद्रीय बैंक द्वारा ब्याज दरों को 13.25 फीसद तक बढ़ाने और हर साल टैक्स कलेक्शन का टारगेट गायब होने के कारण सरकार इसे नियंत्रित नहीं कर सकी है.

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