पाकिस्तान को लगा 68 साल का सबसे बड़ा झटका! GDP ग्रोथ शून्य के नीचे आई

पाकिस्‍तान इस बार कोरेाना वायरस महामारी के कारण एफएटीएफ की ब्‍लैक लिस्‍ट में शामिल होने से बच गया है.

पाकिस्‍तान इस बार कोरेाना वायरस महामारी के कारण एफएटीएफ की ब्‍लैक लिस्‍ट में शामिल होने से बच गया है.

11 जून को पेश आर्थिक समीक्षा में कहा गया कि इस दौरान पाकिस्तान के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में 0.38 प्रतिशत की गिरावट आयी है. यानी ग्रोथ जीरो के नीचे फिसल गई है. ये अब निगेटिव हो गई है.

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  • Last Updated: June 12, 2020, 11:49 AM IST
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नई दिल्ली. पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था (Pakistan Economy) के आकार में 2019-20 में 68 साल में पहली बार गिरावट आयी है. 11 जून को पेश आर्थिक समीक्षा में कहा गया कि इस दौरान पाकिस्तान के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में 0.38 प्रतिशत की गिरावट आयी है. यानी ग्रोथ जीरो के नीचे फिसल गई है. ये अब निगेटिव हो गई है. वित्त मामलों पर सलाहकार अब्दुल हफीज शेख ने आर्थिक समीक्षा जारी करते हुए कहा कि कोरोना वायरस महामारी के कारण अर्थव्यवस्था को बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है.

68 साल की सबसे बड़ी गिरावट- यह पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था में 68 साल में पहली बार आयी गिरावट है. समीक्षा के अनुसार, कृषि क्षेत्र में 2.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गयी. हालांकि इसके अलावा, औद्योगिक और सेवा क्षेत्रों में गिरावट देखी गयी.

इस दौरान डॉलर के हिसाब से प्रति व्यक्ति आय भी 6.1 प्रतिशत कम होकर 1,366 डालर पर आ गयी. हालांकि यह रुपये के संदर्भ में बढ़कर 214,539 रुपये हो गयी. पाकिस्तान सरकार 12 जून को नया बजट पेश करने वाली है.

इसने सरकार को मार्च में कई हफ्तों तक लॉकडाउन लागू करने के लिए मजबूर किया है. कोरोना वायरस से पाकिस्तान में अब तक में लगभग 1,20,000 लोग संक्रमित हो चुके हैं.
इसने 30 जून को समाप्त हुए चालू वित्त वर्ष में पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित किया है. आर्थिक समीक्षा के अनुसार, महामारी से पहले ही आर्थिक स्थिरीकरण नीतियों के कारण उद्योग जगत प्रभावित था.

इसके साथ कोरोना वायरस के प्रतिकूल प्रभावों के कारण वित्त वर्ष 2019-20 में अर्थव्यवस्था में 0.38 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गयी.

2020 में दुनिया में सबसे ज्यादा पाकिस्तान में महंगाई-साल 2020 में पाकिस्तानी रुपये में दुनियाभर के अन्य देशों की अपेक्षा सबसे ज्यादा गिरावट देखने को मिली है.



पाकिस्तानी स्टेट बैंक (SBP) ने बताया कि हमने वित्त वर्ष 2020 में दुनिया में सबसे ज्यादा मुद्रास्फीति देखी है, जिससे हमें ब्याज दर बढ़ाने के लिए मजबूर होना पड़ा है.

बैंक की अप्रैल महीने के लिए जारी मुद्रास्फीति रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान ने न केवल विकसित अर्थव्यवस्थाओं बल्कि भारत, चीन, बांग्लादेश और नेपाल जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में भी सबसे बड़ी मुद्रास्फीति दर्ज की है.

पाकिस्तानी मीडिया डॉन न्यूज के अनुसार, स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान ने मुद्रास्फीति के दबाव को कम करने के लिए ब्याज दरों को बढ़ा दिया. हालांकि, इसका परिणाम उल्टा हुआ और इससे देश में मुद्रास्फीति और बढ़ गई क्योंकि इससे निजी कंपनियों ने औद्योगिक विकास के लिए महंगा कर्ज लेना बंद कर दिया. इससे देश का औद्योगिक विकासदर भी कम हुआ.

डॉन के अनुसार, पाकिस्तान में जनवरी महीने में 12 साल की सर्वोच्च महंगाई दर रिकॉर्ड की गई जो 14.6 फीसदी तक चली गई थी. बढ़ती कीमतों के जवाब में पाकिस्तानी स्टेट बैंक ने ब्याजदरों को बढ़ाकर 13.25 फीसदी कर दिया था.

इस दौरान कोरोना वायरस महामारी के कारण मांग में कमी होने से मुद्रास्फीती भी कम हो गई थी. जिसके बाद बैंक को भी ब्याज दरों में केवल तीन महीनों के भीतर 5.25 प्रतिशत की कटौती करने के लिए मजबूर होना पड़ा था.

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