डर में कट रही है पाकिस्तान के प्रधानमंत्री की रात! ये एक फैसला कर देगा पाकिस्तान को ‘कंगाल’

News18Hindi
Updated: August 23, 2019, 9:03 PM IST

नए पाकिस्तान का नारा देकर प्रधानमंत्री बने इमरान खान (Pakistan Prime Minister Imran Khan) के लिए इन दिनों कुछ भी ठीक नहीं चल रहा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 23, 2019, 9:03 PM IST
  • Share this:
नए पाकिस्तान का नारा देकर प्रधानमंत्री बने इमरान खान (Pakistan Prime Minister Imran Khan) के लिए इन दिनों कुछ भी ठीक नहीं चल रहा है. जहां पिछले एक साल में अमेरिकी डॉलर के सामने पाकिस्तानी रुपये (Pakistani Rupee) की वैल्यू 25 फीसदी गिर गई है. वहीं, शेयर बाजार (KSE-100) में निवेशकों का 1 लाख करोड़ पाकिस्तानी रुपया डूब चुका है. आलम ये हैं कि हाल में आए आंकड़े बताते हैं कि ज्यादातर इंडस्ट्री डूबने की कगार पर आ गई हैं. ऐसे में कंगाल होती अर्थव्यवस्था को एक और झटका लग सकता है. दरअसल टेरर फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग पर नजर रखने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) से पाकिस्तान को झटका मिला है.

आइए जानें क्यों उड़ गई पाकिस्तान के प्रधानमंत्री की नींद...
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के हालिया बयान उनके डर को बता रहे है. उन्होंने हाल में देश के नाम संबोधन में कहा है कि पाकिस्तान बुरे हालात से गुज़र रहा है. अगर फंडिंग रुक गई तो देश डिफॉल्ट हो जाएगा. मतलब साफ है कि बोरियों में रुपये भरकर ले जाते तो कुछ रोटियां मिलतीं. हमारा हाल भी वेनेज़ुएला वाला हो जाता. जब से सरकार में आया हूं तब से इसी दबाव में रहा. शुक्र है कि हमारे दोस्त मुल्क यूएई, सऊदी अरब और चीन से से मदद मिली. उनके इस बयान में साफतौर पर FATF का डर सता रहा है.

नहीं हैं कर्ज चुकाने के पैसे- इमरान खान ने देश के नाम संबोधन में कहा हैं कि 10 साल में पाकिस्तान का कर्ज़ 6000 अरब पाकिस्तानी रुपये से बढ़कर 30 हज़ार अरब पाकिस्तानी रुपये तक पहुंच गया है.

इससे देश के पास अमेरिकी डॉलर की कमी हो गई. हमारे पास इतने डॉलर नहीं बचे कि हम अपने कर्ज़ों की किस्त चुका सकें. मुझे डर हैं कि कहीं पाकिस्तान डिफॉल्टर ना हो जाए.



इस फैसले ने बढ़ाई इमरान खान की टेंशन- शुक्रवार को एफएटीएफ ने पाकिस्तान को इनहेन्स्ड एक्सपीडिएट फॉलोअप लिस्ट (ब्लैक लिस्ट) में डाल दिया. पिछले साल संस्था ने उसे अपनी ‘ग्रे लिस्ट’ में स्थान दिया था. संस्था के मुताबिक, पाकिस्तान उनके मानकों पर खरा नहीं उतरा इसलिए यह कार्रवाई की गई है.
Loading...

संस्था के एशिया पैसिफिक ग्रुप (एपीजी) ने पाया है कि पाकिस्तान आतंकियों की वित्तीय मदद और मनी लॉन्ड्रिंग के 40 में से 32 मानकों का पालन नहीं कर रहा था.

पाकिस्तान पर कार्रवाई का यह फैसला कैनबरा (ऑस्ट्रेलिया) की बैठक में लिया गया. इस दौरान 7 घंटे तक चर्चा हुई. एक भारतीय आधिकारी ने कहा कि अब पाकिस्तान को अक्टूबर में ब्लैकलिस्ट से बचने पर ध्यान देना होगा. जब एफएटीएफ की 15 महीने की समय-सीमा खत्म हो जाएगी.



वहीं, इमरान खान के पिछले एक साल में देश की महंगाई 11 फीसदी हो गई है और शेयर बाजार की मार्केट वैल्यू 1 लाख करोड़ पाकिस्तानी रुपये गिर गई है. इस दौरान KSE-100 इंडेक्स 12,596 अंक गिर गया है.

आखिर क्या है FATF- यह दुनिया भर में आतंकी संगठनों को दी जाने वाली वित्तीय मदद पर नजर रखने वाली इंटरनेशनल एजेंसी है. यह एशिया-पैसिफिक ग्रुप मनी लॉन्ड्रिंग, टेरर फाइनेंसिंग, जनसंहार करने वाले हथियारों की खरीद के लिए होने वाली वित्तीय लेन-देन को रोकने वाली संस्था है. इस संस्था की रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई होती है.

1989 में जी-7 शिखर सम्मेलन हुआ था और उसी में मनी लॉन्ड्रिंग के लिए फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स का गठन किया गया था. इसका सचिवालय पेरिस स्थित आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (OECD) के मुख्यालय में है. 2001 में इसके कार्य क्षेत्र को विस्तार दिया गया और आतंकवाद को धन मुहैया कराने के विरूद्ध नीतियां बनाना भी इसके कार्यक्षेत्र में शामिल कर लिया गया.

अक्टूबर के फैसले पर टिकी हैं इमरान खान की नज़रें - एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट में पाकिस्तान पहले से शामिल है. अगर वो इस लिस्ट से बाहर आना चाहता हैं तो उसे FATF के 36 में से 15 सदस्यों के वोट चाहिए होंगे. वहीं, ब्लैकलिस्ट होने से रोकने के लिए कम से कम 3 सदस्यों का वोट चाहिए. अक्टूबर में होने वाली बैठक में इस पर फैसला होगा. यह बैठक पेरिस में होगी. ये बैठक 13 से 18 अक्टूबर के बीच होने वाली है.

अगर पाकिस्तान ब्लैक लिस्ट हुआ तो- दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्था अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी और फ्रांस ने एक प्रस्ताव पेश कर जून 2018 में पाकिस्तान के FATF की ग्रे लिस्ट में डाल दिया था. अगर पाकिस्तान को FATF ब्लैकलिस्ट कर देता है तो पाकिस्तान पर इसके बहुत बड़े असर होंगे.



>> ब्लैक लिस्ट होने पर अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (IMF), विश्व बैंक (World Bank) और यूरोपीय संघ (Europe Union) में पाकिस्तान की वित्तीय साख (Pakistan Financial Ratings) और गिर जाएगी.

>> ऐसे में वित्तीय संकट से जूझ रहे पाकिस्तान की स्थिति और खराब हो सकती है. एफएटीएफ आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संगठनों की फंडिंग पर नजर रखती है.

>> एफएटीएफ ने पाक को लगातार ग्रे लिस्ट में रखा. ग्रे लिस्ट में जिस भी देश को रखा जाता है, उसे कर्ज देने में बड़ा जोखिम समझा जाता है. इसके कारण अंतरराष्ट्रीय कर्जदाताओं ने पाक को आर्थिक मदद और कर्ज देने में कटौती की है. इस कारण पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति लगातार खराब हुई.

>> ब्लैक लिस्ट होने पर पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से मिलने वाले 6 अरब डॉलर के कर्ज पर भी रोक लगाई जा सकती है.

>> आईएमएफ पहले ही कह चुका हैं कि पाकिस्तान को मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फाइनेंसिंग के खिलाफ वास्तविक कदम उठाने चाहिए. इसका मतलब है कि अगर पाकिस्तान को IMF से लोन चाहिए तो उसे FATF से क्लियरेंस लेना जरूरी है.

>> इसके अलावा कई और बड़ी संस्थाएं भी पाकिस्तान को फंडिंग से मना कर सकती है. ऐसे में पाकिस्तान पाई-पाई को मोहताज हो जाएगा.

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए मनी से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: August 23, 2019, 8:58 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...