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पाकिस्तान को मिल तो गई मदद, पर कमर तोड़ देंगी IMF की ये शर्तें!

News18Hindi
Updated: May 13, 2019, 2:18 PM IST
पाकिस्तान को मिल तो गई मदद, पर कमर तोड़ देंगी IMF की ये शर्तें!
आर्थिक तंगी से जूझ रहे पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से 6 अरब डॉलर का बेलआउट पैकेज तो मिल गया है, हालांकि रिपोर्ट्स के मुताबिक IMF की पैकेज देने की शर्तों से पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान नाखुश हैं.

आर्थिक तंगी से जूझ रहे पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से 6 अरब डॉलर का बेलआउट पैकेज तो मिल गया है, हालांकि रिपोर्ट्स के मुताबिक IMF की पैकेज देने की शर्तों से पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान नाखुश हैं.

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आर्थिक तंगी से जूझ रहे पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से 6 अरब डॉलर का बेलआउट पैकेज तो मिल गया है, लेकिन इसके बाद भी पाकिस्तान के हालात बदलेंगे या नहीं ये कहना मुश्किल है. IMF के साथ तीन महीने तक बातचीत करने के बाद पाकिस्तान को मदद तो मिल गई है. मगर इस बार IMF ने कड़े मापदंड के साथ पाकिस्तान की मदद की है. आपको बता दे कि यह 22वीं बार है जब पाकिस्तान के हालात इतने बदतर हो गए की उन्हें IMF की शरण में जाने को मजबूर होना पड़ा.

IMF की शर्तों से नाखुश हैं इमरान खान
रिपोर्ट्स के मुताबिक IMF की पैकेज देने की शर्तों से पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान नाखुश हैं. विशेषज्ञों के मुताबिक, पावर टैरिफ में बढ़ोतरी, टैक्स छूट खत्म करने जैसी शर्तों की वजह से पाकिस्तान के मध्यमवर्ग और निम्नवर्ग पर जरूरत से ज्यादा बोझ पड़ेगा, जिससे इमरान खान की पार्टी तहरीक-ए-इंसाफ की लोकप्रियता छिन सकती है.

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शनिवार को ही इमरान ने इस डील पर चिंता जताई थी 
IMF के साथ समझौते पर तैयार होने से पहले इमरान खान ने शनिवार को ही इस डील पर चिंता जताई थी और वित्त मंत्रालय के अधिकारियों के साथ बैठक भी की थी. हालांकि, पाकिस्तान के पास आईएएमएफ की शर्तों के सामने झुकने के अलावा कोई और विकल्प बचा ही नहीं था.

चुनावी कैंपेन में इमरान ने दावा किया था की आईएमएफ के पास मदद मांगने के लिए नहीं जाएंगे पिछले साल जब इमरान खान सत्ता में आए थे तो उनकी छवि आईएमएफ के बड़े आलोचक के तौर पर थी. अपने चुनावी कैंपेन में उन्होंने वादा किया था कि वह आईएमएफ के पास मदद मांगने के लिए नहीं जाएंगे लेकिन इमरान को अपनी प्रतिज्ञा तोड़नी पड़ी. इमरान ने सामाजिक कल्याण के कार्यक्रमों को भी आगे बढ़ाने का वादा किया था जो वैश्विक संस्था आईएमएफ की मितव्ययिता की शर्त के बिल्कुल उलट था. अब आईएमएफ के पैकेज मिलने के बाद इमरान खान को वो सारी शर्तें माननी पड़ी हैं जिसके वे कभी धुर-विरोधी थे.

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पाकिस्तान को अब अपने खर्च पर लगाम लगानी होगी 
IMF ने पाकिस्तान को पैकेज देने के साथ ही उसके सामने कड़ी शर्तें और बेहद मुश्किल लक्ष्य रखे हैं. वर्ष 2019-20 में पेश किया जाने वाला अगला वित्तीय बजट पाकिस्तानी अधिकारियों की वित्तीय रणनीति की पहली अग्निपरीक्षा होगी. इस बजट में राजस्व में बढ़ोतरी, टैक्स में दी जा रही छूट में कटौती, टैक्स प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार जैसे कदमों के जरिए प्राथमिक घाटा जीडीपी का 0.6 फीसदी करने का लक्ष्य पूरा करना होगा. इसके साथ ही पाकिस्तान को अपने खर्च पर भी लगाम लगाना होगा.

2019-20 के बजट में करीब 350 अरब रुपए तक की कर छूट खत्म करेगी पाकिस्तान सरकार
IMF ने आगे कहा है कि स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान (SBP) महंगाई घटाने और वित्तीय स्थिरता की सुरक्षा करने पर जोर देगा ताकि गरीब प्रभावित ना हों. दोनों पक्षों ने अगले वित्तीय वर्ष 2019-20 में 11 अरब डॉलर के वित्तीय फर्क को कम करने के लिए भी सहमति भरी है. इसके लिए सरकार 2019-20 के बजट में करीब 350 अरब रुपए तक की कर छूट खत्म करने का कदम उठाएगी.

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बिजली और गैस की कीमतों में नहीं दी जाएगी सब्सिडी
पाकिस्तान को अगले बजट में बिजली और गैस की कीमत में बढ़ोतरी करने की शर्त भी माननी पड़ी है. सूत्रों के मुताबिक, सरकार को सब्सिडी घटानी होगी और केवल ऊर्जा क्षेत्र के ही उपभोक्ताओं से 340 अरब रुपए वसूलने पड़ेंगे. पाकिस्तान की नियामक संस्था 'नेशनल इलेक्ट्रिक पावर रेग्युलेटरी अथॉरिटी' (NEPRA) को स्वायत्त संस्था बना दिया जाएगा और इसके अहम फैसलों में पाकिस्तान की सरकार की भूमिका को सीमित कर दिया जाएगा. आईएमएफ की शर्तों के तहत अब पाकिस्तान को 700 अरब तक का अतिरिक्त कर जुटाने, बिजली टैरिफ बढ़ाने जैसे मुश्किल कदम उठाने पड़ेंगे. एक आधिकारिक सूत्र ने अखबार से बातचीत में कहा कि पाकिस्तान के अधिकारियों ने IMF डील फाइनल कराने के लिए अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय शक्तियों यूएस और चीन से सिफारिश लगाई.

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IMF की पाकिस्तान के साथ डील अब तक की सबसे कड़ी शर्तों के साथ हुई है
अखबार के मुताबिक, IMF डील अब तक की सबसे कड़ी शर्तों के साथ की गई है और अगर पाकिस्तान संस्था की शर्तों को पूरा करने में कामयाब नहीं हो पाता है तो वह संस्था की विश्वसनीयता की सूची में एक-दो पायदान और नीचे गिर सकता है. समझौते का हिस्सा रहे एक शीर्ष अधिकारी ने बताया कि आईएमएफ के कर्मचारी शुरुआती एक-दो वार्ता में तो नरम रवैया अपनाए रहे लेकिन उसके बाद वे ऐसी सख्त शर्तें लेकर आए जो कई मोर्चों पर अस्वीकार्य लग रही थीं. अधिकारी ने कहा, 'अगले बजट में व्यय में कटौती और राजस्व बढ़ोतरी के जरिए जीडीपी के 2.6 फीसदी के बराबर यानी 1120 अरब रुपए का वित्तीय प्रबंध करना शामिल है. इसका मतलब ये है कि सरकार पर 600 से 700 अरब रुपए का अतिरिक्त राजस्व जुटाने की गंभीर चुनौती होगी.'

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First published: May 13, 2019, 1:51 PM IST
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