पाकिस्तान को लगा दोहरा झटका! चरमराई अर्थव्यवस्था, अब टूटेगी पाकिस्तानियों की कमर

आर्थिक तंगी से जूझ रहे पाकिस्तान को एक और झटका लगा है. पाकिस्‍तान की अर्थव्‍यवस्‍था चरमराने लगी है. देश की जीडीपी विकास दर 8 साल के निचले स्तर पर आ सकती है.

News18Hindi
Updated: May 14, 2019, 7:03 PM IST
पाकिस्तान को लगा दोहरा झटका! चरमराई अर्थव्यवस्था, अब टूटेगी पाकिस्तानियों की कमर
पाकिस्तान को लगा बड़ा झटका! चरमराई अर्थव्यवस्था, अब टूटेगी पाकिस्तानियों की कमर
News18Hindi
Updated: May 14, 2019, 7:03 PM IST
आर्थिक तंगी से जूझ रहे पाकिस्तान को एक और झटका लगा है. पाकिस्‍तान की अर्थव्‍यवस्‍था चरमराने लगी है. देश की जीडीपी विकास दर 8 साल के निचले स्तर पर आ सकती है. नेशनल अकाउंट कमेटी की ओर से जारी आंकड़ों में यह अनुमान लगाया गया है. रिपोर्ट में बताया गया है कि एग्रीकल्चर सेक्टर में आई बड़ी गिरावट और आर्थिक धीमेपन का असर देश की अर्थव्यवस्था पर दिख रहा है. वहीं, अर्थशास्त्रियों का कहना है कि पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से 6 अरब डॉलर का बेलआउट पैकेज तो मिल गया है, लेकिन इसके बाद भी पाकिस्तान के हालात बदलेंगे या नहीं ये कहना मुश्किल है. इस बार IMF ने कड़े मापदंड के साथ पाकिस्तान की मदद की है. आपको बता दे कि यह 22वीं बार है जब पाकिस्तान के हालात इतने बदतर हो गए की उन्हें IMF की शरण में जाने को मजबूर होना पड़ा.

8 साल के निचले स्तर पर आर्थिक ग्रोथ- पाकिस्तान की जीडीपी विकास दर 3.3 प्रतिशत रह सकती है. जबकि 2018-19 के लिए उसका विकास लक्ष्‍य 6.2 प्रतिशत था. (ये भी पढ़ें-खुशखबरी! आम चुनाव बाद 24 घंटे बिजली देगी सरकार)



पाकिस्तानियों की कमर तोड़ेगी महंगाई-पाकिस्तान को अगले बजट में बिजली और गैस की कीमत में बढ़ोतरी करने की शर्त भी माननी पड़ी है. सूत्रों के मुताबिक, सरकार को सब्सिडी घटानी होगी और केवल ऊर्जा क्षेत्र के ही उपभोक्ताओं से 340 अरब रुपए वसूलने पड़ेंगे. पाकिस्तान की नियामक संस्था 'नेशनल इलेक्ट्रिक पावर रेग्युलेटरी अथॉरिटी' (NEPRA) को स्वायत्त संस्था बना दिया जाएगा और इसके अहम फैसलों में पाकिस्तान की सरकार की भूमिका को सीमित कर दिया जाएगा.



>> आईएमएफ की शर्तों के तहत अब पाकिस्तान को 700 अरब तक का अतिरिक्त कर जुटाने, बिजली टैरिफ बढ़ाने जैसे मुश्किल कदम उठाने पड़ेंगे. एक आधिकारिक सूत्र ने अखबार से बातचीत में कहा कि पाकिस्तान के अधिकारियों ने IMF डील फाइनल कराने के लिए अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय शक्तियों यूएस और चीन से सिफारिश लगाई.(ये भी पढ़ें-ऑनलाइन सस्ते AC बेचेगी सरकार, 40% तक बिजली की होगी बचत)

पाकिस्तान को अब अपने खर्च पर लगाम लगानी होगी-IMF ने पाकिस्तान को पैकेज देने के साथ ही उसके सामने कड़ी शर्तें और बेहद मुश्किल लक्ष्य रखे हैं. वर्ष 2019-20 में पेश किया जाने वाला अगला वित्तीय बजट पाकिस्तानी अधिकारियों की वित्तीय रणनीति की पहली अग्निपरीक्षा होगी.

>> इस बजट में राजस्व में बढ़ोतरी, टैक्स में दी जा रही छूट में कटौती, टैक्स प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार जैसे कदमों के जरिए प्राथमिक घाटा जीडीपी का 0.6 फीसदी करने का लक्ष्य पूरा करना होगा. इसके साथ ही पाकिस्तान को अपने खर्च पर भी लगाम लगाना होगा.

>> IMF ने आगे कहा है कि स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान (SBP) महंगाई घटाने और वित्तीय स्थिरता की सुरक्षा करने पर जोर देगा ताकि गरीब प्रभावित ना हों.

>> दोनों पक्षों ने अगले वित्तीय वर्ष 2019-20 में 11 अरब डॉलर के वित्तीय फर्क को कम करने के लिए भी सहमति भरी है. इसके लिए सरकार 2019-20 के बजट में करीब 350 अरब रुपए तक की कर छूट खत्म करने का कदम उठाएगी.

IMF की पाकिस्तान के साथ डील अब तक की सबसे कड़ी शर्तों के साथ हुई है-IMF डील अब तक की सबसे कड़ी शर्तों के साथ की गई है और अगर पाकिस्तान संस्था की शर्तों को पूरा करने में कामयाब नहीं हो पाता है तो वह संस्था की विश्वसनीयता की सूची में एक-दो पायदान और नीचे गिर सकता है.

>> समझौते का हिस्सा रहे एक शीर्ष अधिकारी ने बताया कि आईएमएफ के कर्मचारी शुरुआती एक-दो वार्ता में तो नरम रवैया अपनाए रहे लेकिन उसके बाद वे ऐसी सख्त शर्तें लेकर आए जो कई मोर्चों पर अस्वीकार्य लग रही थीं.

>> अधिकारी ने कहा, 'अगले बजट में व्यय में कटौती और राजस्व बढ़ोतरी के जरिए जीडीपी के 2.6 फीसदी के बराबर यानी 1120 अरब रुपए का वित्तीय प्रबंध करना शामिल है. इसका मतलब ये है कि सरकार पर 600 से 700 अरब रुपए का अतिरिक्त राजस्व जुटाने की गंभीर चुनौती होगी.'
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर

News18 चुनाव टूलबार

चुनाव टूलबार