पा‍किस्‍तान की अकड़ टूटी! भारत से कपास का आयात शुरू कर सकता है पाकिस्तान

Pakistan India trade

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भारत-पाकिस्तान के बीच LoC (Line of Control)पर युद्ध विराम पर समझौते के बाद द्विपक्षीय व्यापार एक बार फिर से पनपने लगा है. खबर है कि द्विपक्षीय व्यापार संबंधों में छूट की संभावनाओं के साथ पाकिस्तान लैंड रूट (land route) के जरिए भारत से कपास आयात की अनुमति की तैयारी कर रहा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 28, 2021, 4:50 PM IST
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नई दिल्ली. भारत-पाकिस्तान के बीच LoC (Line of Control)पर युद्ध विराम पर समझौते के बाद द्विपक्षीय व्यापार एक बार फिर से पनपने लगा है. खबर है कि द्विपक्षीय व्यापार संबंधों में छूट की संभावनाओं के साथ पाकिस्तान लैंड रूट (land route) के जरिए भारत से कपास आयात की अनुमति की तैयारी कर रहा है. रविवार को मीडिया की एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गयी. वाणिज्य मंत्रालय में सूत्रों के हवाले से द एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने लिखा है कि वाणिज्य मंत्रालय (Ministry of Commerce) में सूत्रों के हवाले लिखा है कि प्रधानमंत्री के सलाहकार अब्दुल रजाक दाऊद (Abdul Razak Dawood) इस पर फैसला ले सकते हैं कि अगले सप्ताह से भारत से कपास और धागे का आयात करना है.

जल्द लिया जा सकता है सरकारी निर्णय 

रिपोर्ट में कहा गया है कि कपास की कमी का मुद्दा पहले ही प्रधानमंत्री इमरान खान के संज्ञान में लाया जा चुका है.खान के पास वाणिज्य मंत्रालय का भी प्रभार है. सूत्रों ने बताया कि एक बार सैद्धान्तिक फैसला होने के बाद मंत्रिमंडल की आर्थिक संयोजन समिति के समक्ष औपचारिक आदेश रखा जाएगा. सूत्रों ने बताया कि इस बारे में आंतरिक चर्चा हो चुकी है लेकिन अंतिम फैसला प्रधानमंत्री की अनुमति के बाद लिया जाएगा. अख़बार से कहा गया है कि पाकिस्तान ने भारत से कपास आयात की अनुमति देने पर विचार कर रहा है.' दोनों देशों के बीच व्यापार संबंध पाकिस्तान में उत्पादन की लागत को कम करने और निरंतर खाद्य आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद कर सकते हैं.

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2003 में युद्धविराम समझौते पर हस्ताक्षर किया गया था

भारत और पाकिस्तान ने गुरुवार को एक संयुक्त बयान जारी किया था. एलओसी और अन्य क्षेत्रों में युद्धविराम पर सभी समझौतों का सख्ती से पालन करने के लिए हॉटलाइन चर्चाओं के बाद बयान जारी किया था. दोनों देशों ने 2003 में युद्धविराम समझौते पर हस्ताक्षर किए लेकिन पिछले कई वर्षों में इसका पालन नहीं किया गया है.
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