अपनी इन करतूतों की वजह से डूब रहा है पाकिस्तान, दो वक्त की रोटी के लिए तरस रहे हैं लोग!

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने देश के नाम संबोधन में अर्थव्यवस्था को लेकर अपनी बेबसी के बारे में बताया और कहा है कि हमारे पास इतने डॉलर नहीं बचे कि हम कर्ज़ों की किस्त दे सकें.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 2, 2019, 9:01 PM IST
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नए पाकिस्तान का नारा देकर प्रधानमंत्री बने पूर्व क्रिकेटर इमरान खान इन दिनों हर बॉल पर क्लीन बोल्ड होते नज़र आ रहे है. देश की राजनीति या फिर आर्थिक माहौल की बात करें तो उन्हें सब जगह मुंह की खानी पड़ी है. उनके सत्ता में आते ही देश का रुपया 'तबाह' हो गया. इससे महंगाई सातवें आसामान पर पहुंच गई है और आम आदमी के लिए दिन में दो वक्त की रोटी खाना भी मुश्किल हो गया है. अगर हालात पर काबू नहीं पाया गया तो अर्थव्यवस्था को डूबने से शायद ही कोई बचा पाएगा.

अर्थशास्त्रियों का कहना है कि पाकिस्तान इसके लिए खुद जिम्मेदार है, क्योंकि देश की आर्थिक ग्रोथ को बढ़ाने के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया है. वहीं, दस साल में अर्थव्यवस्था पर कर्ज़ छह हज़ार अरब पाकिस्तानी रुपये से बढ़कर 30 हज़ार अरब रुपये तक पहुंच गया है. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिरी कौन सी करतूत है जो उसकी अर्थव्यवस्था को डूबो रही है.

आखिरी क्यों डूब रहा है पाकिस्तान- आज से ठीक दो महीने पहले यानी जून महीने में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने अचानक देश के नाम संबोधन में अर्थव्यवस्था को लेकर अपनी बेबसी के बारे में बताया. उन्होंने कहा कि ज़रदारी और नवाज़ शरीफ़ की सरकार में पाकिस्तान पर विदेशी कर्ज़ 41 अरब अमेरिकी डॉलर से 97 अरब डॉलर हो गया. इनके 10 साल के शासन में ऐसा हुआ है.



इमरान खान ने बताया कि पुरानी सरकार की करतूतों की वजह से हमारे पास अमेरिकी डॉलर की कमी हो गई. हमारे पास इतने डॉलर नहीं बचे कि हम कर्ज़ों की किस्त दे सकें. हम डर में रहे हैं कि कहीं पाकिस्तान डिफॉल्टर ना हो जाए. इन्हें अंदाजा नहीं था कि डिफॉल्टर होने पर क्या होता. बोरियों में रुपये भरकर ले जाते तो कुछ रोटियां मिलतीं. हमारा हाल भी वेनेजुएला वाला हो जाता. जब से सरकार में आया हूं तब से इसी दबाव में रहा. शुक्र है कि हमारे दोस्त मुल्क यूएई, सऊदी अरब और चीन से से मदद मिली.
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IMF की चेतावनी-आईएमएफ एक्जीक्यूटिव बोर्ड के कार्यवाहक चेयरमैन डेविड लिप्टन के मुताबिक, बड़ी वित्तीय आवश्यकताओं, कमजोर और असंतुलित विकास की वजह से पाकिस्तान आर्थिक मोर्चे पर चुनौतियों का सामना कर रहा है.

इससे निपटने के लिए पाकिस्तानी प्रधानमंत्री को टैक्स के जरिए आमदनी बढ़ानी होगी. आर्थिक असंतुलन को सही करने, मुद्रा भंडार बढ़ाने और महंगाई को नियंत्रित रखने के लिए सख्त मौद्रिक नीति की भी जरूरत होगी. अगर मौजूदा समय में इनमें से कोई भी कदम नहीं उठाया तो पाकिस्तान की आर्थिक स्थिरता पर बड़ा खतरा है. ऐसे में उसे डूबने से बचाना बेहद मुश्किल हो जाएगा.

महंगाई ने तोड़ी पाकिस्तानियों की कमर


महंगाई ने तोड़ी पाकिस्तानियों की कमर- पाकिस्तान ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स की तरफ से जारी किए गए महंगाई के आंकड़ों से पता चला है कि देश में रिकॉर्ड महंगाई हो गई है. पाकिस्तान के अखबार डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, जुलाई में कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) आधारित महंगाई दर बढ़कर 10.34 फीसदी पर जा पहुंची है.

पिछले महीने यही आंकड़ा 8.9 फीसदी रिकॉर्ड किया गया था. इसी अवधि में पिछले साल यह महंगाई दर 5.84 फीसदी रिकॉर्ड की गई थी. बीते कुछ महीनों में पेट्रोलियम प्रोडक्ट की कीमतों में लगातार तेजी के रुख और इसके बाद बिजली और गैस के टैरिफ में बढ़ोतरी से महंगाई दर आसमान छू रही है.



दाम बढ़ने के बाद ट्विटर पर पाकिस्तानी यूजर्स ने इस फैसले की आलोचना की है. लोगों को टेंशन है कि पेट्रोल के दाम इतने बढ़ गए हैं, आगे जाकर क्या होगा. एक यूजर ने लिखा- अल्लाह, क्या होगा इस मुल्क का?' वहीं अन्य यूजर ने लिखा- 'इतना टैक्स देने के बाद भी ये हाल है और आप रो रहे हैं कि लोग टैक्स नहीं दे रहे हैं. उनका क्या जो टैक्स भर रहे हैं? हमें क्या ये गिफ्ट मिल रहा है.

महंगाई बढ़ने से क्‍या होता है- महंगाई दर का असर अर्थव्‍यवस्‍था पर दो तरह से होता है. अगर महंगाई दर बढ़ती है तो बाजार में वस्तुओं की कीमतें बढ़ जाती हैं और लोगों की खरीदने की क्षमता कम हो जाती है. वहीं अगर महंगाई दर घटती है तो बाजार में वस्तुओं के दाम घट जाते और लोगों की खरीदने की क्षमता बढ़ जाती है. महंगाई के बढ़ने और घटने का असर सरकार की नीतियों पर भी पड़ता है. किसी भी देश का सेंट्रल बैंक ब्याज दरों में बदलाव के लिए महंगाई के आधार पर फैसला लेता है.



रुपये में आ सकती हैं और तेज़ गिरावट- पाकिस्तानी अर्थशास्त्रियों का मानना है कि रुपया डॉलर के मुकाबले इस साल के अंत तक 175 से 180 तक जा सकता है. मौजूदा हालात में रुपये की गिरावट थमने की उम्मीद नज़र नहीं आ रही है. भुगतान के लिए डॉलर की मांग बढ़ रही है और हमारे पास पर्याप्त डॉलर नहीं हैं. ऐसे में हमें डॉलर ख़रीदना पड़ेगा. जब हम डॉलर ख़रीदेंगे तो रुपये में गिरावट आएगी ही. इमरान ख़ान सरकार में आने से पहले रुपये में गिरावट को लेकर काफ़ी आक्रामक रहते थे. लेकिन अब खुद इमरान खान लाचार दिख रहे हैं.

अब पाकिस्तान के लिए अक्टूबर में आ सकता है सबसे बड़ा खतरा! पाकिस्तान की सबसे बड़ी टेंशन FATF के बैन को लेकर भी है. अक्टूबर में FATF यानी फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स की बैठक होनी है जिसमें पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट से ब्लैक लिस्ट में डालने का फैसला होना है. मार्च में पाकिस्तान ग्रे लिस्ट में डाल दिया गया था और उसे आतंकी मदद रोकने के लिए एफएटीएफ की ओर से 27 टारगेट दिए गए थे.



जून में हुई बैठक में पाकिस्तान की ओर से उठाए गए कदमों को नाकाफी बताया गया. जिससे पाकिस्तान पर अक्टूबर में ब्लैकलिस्ट होने का खतरा बढ़ गया है. अगर एफएटीएफ ब्लैकलिस्ट कर देता है तो अंतरराष्ट्रीय मदद बड़े पैमाने पर पाकिस्तान को मिलनी बंद हो जाएगी. आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान पर इससे दिवालिया होने का खतरा बढ़ जाएगा.

अगर अर्थशास्त्रियों की मानें तो पाकिस्तान के लोगों के लिए अगले 12-18 महीने बेहद दर्द भरे हो सकते हैं. क्योंकि सरकार टैक्स का बोझ बढ़ाकर ही अपनी आमदनी बढ़ाएगी. ऐसे में महंगाई दर पर लगाम लगा पाना मुश्किल रहेगा. ऐसे में पाकिस्तान की सरकार इन सभी दबावों को सही तरीके से झेल पाई तो अर्थव्यवस्था फिर से पटरी पर लौट सकती है.
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