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चीन की चाल में बुरा फंसा पाकिस्तान, जानिए कैसे चीनी कंपनियों ने पाक में फैलाया भ्रष्टाचार का जाल

2018 में इमरान खान के प्रधानमंत्री बनने से पहले ही पाक सरकार पर कर्ज का भारी बोझ.
2018 में इमरान खान के प्रधानमंत्री बनने से पहले ही पाक सरकार पर कर्ज का भारी बोझ.

हाल ही में पाकिस्तान की एक कमिटी ने चीनी कंपनियों से जुड़े पावर प्रोजेक्ट में भ्रष्टाचार का खुलासा किया है. लेकिन, गहरे आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान ने अब चीन से बेल्ट एंड रोड ​रिपेमेंट (Belt & Road Repayment) को 10 साल और बढ़ाने पर चर्चा कर रहा है.

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नई दिल्ली. चीनी कंपनियों पर पावर प्रोजेक्ट के खर्च में भारी इजाफे का आरोप लगाने के बाद पाकिस्तान अब चीन से बेल्ट एंड रोड रिपेमेंट (Belt & Road Repayment) पर चर्चा करने में जुटा हुआ है. दोनों देशों के बीच चर्चा का यह दौर एक ऐसे समय में शुरू हुआ है, जब कुछ दिन पहले ही पाकिस्तान की एक कमिटी ने चीनी व घरेलू पावर कंपनियों द्वारा जरूरत से अधिक खर्च का खुलासा किया है. कोरोना वायरस महामारी की वजह से गंभीर वित्तीय संकट (Pakistan Financial Crisis) के इस दौर में पाकिस्तान बेल्ट एंड रोड रिपेमेंट को लेकर बातचीत करने में जुटा है ताकि मौजूदा आर्थिक संकट में उसे कुछ राहत मिल सके.

पावर प्रोजेक्ट को लेकर क्या है पाकिस्तान का आरोप?
इस्लामाबाद द्वारा जारी कमिटी की रिपोर्ट में कहा गया है कि 30 साल की लाइफटाइम वाले प्रोजेक्ट के लिए हुआनेंग शैनडॉन्ग रूयी एनर्जी और पोर्ट क़ासिम इलेक्ट्रिक पावर कंपनी नाम के कोयला प्लांट्स करीब 3 अरब डॉलर अतिरिक्त खर्च कर रहे हैं. इसमें ब्याज भुगतान भी शामिल है. इन दोनों प्लांट्स के सेटअप कॉस्ट पर ही अकेले 32 अरब रुपये अधिक खर्च किए गए हैं. यह रकम ब्याज भुगतान को गलत तरीके से दिखाकर वसूला गया.

पाक ने खुलासे के बाद जांच को ठंडे बस्ते में डाला
अब बीजिंग के दबाव के बाद पाकिस्तान सरकार ने इस रिपोर्ट के मद्देनजर जरूरी जांच को ठंडे बस्ते में डाल दिया है. फाइनेंशियल टाइम्स ने इस मामले से जुड़े कुछ सूत्रों के हवाले से लिखा है कि फिलहाल पाकिस्तान सरकार पावर टैरिफ में बातचीत करने के बजाय अगले 10 साल के लिए रिपेमेंट को टालने पर विचार कर रही है. एक पाकिस्तानी कैबिनेट मंत्री ने कहा, 'मौजूदा आर्थिक स्थिति को देखते हुए हम राहत का हरसंभव प्रयास कर रहे हैं. यही कारण है कि सबसे पहले हम स्वतंत्र बिजली उत्पादकों से अनौपचारिक तौर पर डील कर रहे हैं. देखते है कि इसमें आगे क्या प्रगति होती है और इसके बाद ही हम कोई औपचारिक प्रक्रिया पूरी करेंगे.'



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भारी कर्ज के बोझ से जूझ रही इमरान खान सरकार
साल 2018 में इमरान खान (Imran Khan) ने जब पाकिस्तान का प्रधानमंत्री पद संभाला था, तब वहां की सरकार भारी कर्ज संकट के दौर से गुजर रही थी. इसके बाद पाक सरकार ने अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से 3 साल में 6 अरब डॉलर के राहत पैकेज की मांग की थी. फिलहाल इस प्रोग्राम को रोक दिया गया है क्योंकि लॉकडाउन के बाद वहां की अर्थव्यवस्था (Pakistan Economy) अभी भी पूरी तरह से शुरू नहीं हो सकी है.

आरोप साबित करने के लिए ठोस सुबूत दे पाक
हेंग शेंग ज़िन ग्रुप (Heng Sheng Xin Group) नाम की बीजिंग की एक इंजीनियरिंग कंसल्टेंसी ने हुआनेन्ग कोयला बिजली प्लांट का दाम तय करने में मदद की थी. इस कंपनी के एक निदेशक का कहना है कि यह रकम वाजिब था. उन्होंने कहा, 'यह भी संभव है कि अगर हम मौजूदा समय में एक बार फिर इस प्रोजेक्ट का मूल्यांकन करें तो नया प्राइस टैग सामने आए. लेकिन, इसका मतलब यह नहीं है कि पहले का अनुमान गलत था. पाकिस्तान को अतिरिक्त चार्ज के बारे में साबित करने के लिए ठोस सुबूत देना होगा.'

फाइनेंशियल टाइम्स ने इसी रिपोर्ट में एग्रीकल्चरल बैंक ऑफ चाइना (Agricultural Bank of China) के एक अधिकारी के हवाले से लिखा है कि पाकिस्तान से चर्चा के समय कर्ज की अवधि बढ़ाने, राहत देने जैसी बातों के बारे में बताया गया था. बता दें कि इस बैंक ने पावर प्रोजेक्ट में 35 करोड़ डॉलर का कर्ज दिया था. हालांकि, अभी तक इस मामलों पर दोनों कंपनियों ने कोई बयान नहीं दिया है.

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साभार: चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर पेज, फेसबुक


पारदर्शी नहीं चाइन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर
एलिस वेल्स (Alice Wells) नाम की एक पूर्व अमेरिकी कू​टनीतिज्ञ (Former US Diplomat) ने लगातार 62 अरब डॉलर के खर्च पर बन रहे चाइन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (China-Pak Economic Corridor) आलोचना की है. एलिस वेल्स का कहना है कि इसमें कोई पारदर्शिता नहीं है और चीनी कंपनियों को अप्रत्याशित लाभ पहुंचाने की गारंटी है. पिछले महीने ही वेल्स ने कहा था कि चीन मौजूदा मौके का फायदा उठाकर पाकिस्तान पर बोझ डाल रहा है, उसने गलत तरीके से चीन को कर्ज दिया और इससे पाकिस्तान को भारी नुकसान होगा.

पाकिस्तान में पावर सेक्टर पर लगातार भ्रष्टाचार के आरोप लगते आ रहे हैं. कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर कमल मुनिर (Kamal Munir, University of Cambridge) का कहना है कि इस सेक्टर को लेकर पाकिस्तान सरकार की नीतियों का मूल उद्देश्य केवल मुनाफा कमाने का है. मुनिर ने पाक सरकार को पहले इंडस्ट्रियल पॉलिसी पर सलाह दे चुके हैं.
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