नया पम्बन रेलवे पुल लेगा 106 साल पुराने ब्रिज की जगह, जहाज आने पर खुलेगा और फिर बंद हो जाएगा

नया पम्बन रेलवे पुल लेगा 106 साल पुराने ब्रिज की जगह, जहाज आने पर खुलेगा और फिर बंद हो जाएगा
पम्बन ब्रिज समुंदर में रेलवे का पहला वर्टिकल ब्रिज होगा.

Pamban Bridge Construction: नए पुल को इस तकनीक से बनाया जा रहा है. उसका एक हिस्सा बीच से लिफ्ट की भांती ऊपर उठ जाए और जहाजों के आने-जाने के लिए रास्ता दे सके. इसे वर्टिकल लिफ्ट ब्रिज कहते हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 15, 2020, 7:07 AM IST
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नई दिल्ली. कोविड लॉकडाउन के बाद पम्बन ब्रिज (Pamban Bridge) का काम एक बार फिर से तेज़ हो गया है. माना जा रहा है कि यह ब्रिज अगले 2 साल में बनकर तैयार हो जाएगा. नया पम्बन ब्रिज समुंदर में रेलवे का पहला वर्टिकल ब्रिज होगा. यानी जहाज़ों के एक पार से दूसरे पार जाने के लिए यह ब्रिज उपर की तरफ उठ जाएगा. इस ब्रिज के बन जाने से राम भक्तों को रामेश्वरम तक पहुंचने में ज्यादा सहुलियत होगी. पम्बन ब्रिज का निर्माण तमिलनाडु (Tamil Nadu) के रामनाथपुरम ज़िले में चल रहा है. पम्बन का पुराना ब्रिज साल 2014 में बना था और नया पुल बनने के साथ ही इस पुल का इस्तेमाल बंद कर दिया जाएगा.

जहाज आने पर खुलेगा और फिर बंद हो जाएगा-रामेश्वरम को भारत की मुख्यभूमि से जोड़ने के लिए रेलवे नए पुल का निर्माण कर रहा है जो 106 वर्ष पुराने मौजूदा पम्बन पुल की जगह लेगा. नए पुल को इस तकनीक से बनाया जाएगा कि उसका एक हिस्सा बीच से लिफ्ट की भांती ऊपर उठ जाए और जहाजों के आने-जाने के लिए रास्ता दे सके. इसे वर्टिकल लिफ्ट ब्रिज कहते हैं. यह भारत का पहला वर्टिकल लिफ्ट ब्रिज होगा. जहाजों के गुजर जाने के बाद पुल का वह हिस्सा फिर से अपनी जगह पर आ जाएगा और ट्रेनें वहां से गुजर सकेंगी.

भारत में पहली बार इस ब्रिज पर स्टील की पटरियां बिछाई जाएंगी
पम्बन ब्रिज को दुनिया की सबसे आधुनिक तकनीक से बनाया जा रहा है. इसमें जहाज़ों को पार कराने के लिए पहली बार वर्टीकल लिफ्ट स्पैन लगा होगा. साथ ही इसमें भविष्य के लिए दो रेल लाइन और इलेक्ट्रिफिकेशन को ध्यान में रखा जा रहा है. इस नए ब्रिज को पुराने ब्रिज से 3 मीटर ज्यादा ऊंचाई पर बनाया जा रहा है ताकि हाई टाइड के समय इसपर पानी न आ सके. इस ब्रिज पर स्टेनलेस स्टील की पटरियां भी बिछाई जायेंगी जो भारत में पहली बार होगा.
रामेश्वरम् जाने वाले श्रद्धालुओं को होगा फायदा


पम्बन का नया ब्रिज करीब 2 किलोमीटर (2.05 किलोमीटर) लंबा होगा. यह पुल मंडपम् से समुंदर के बीच मौजूद रामेश्वरम तक बनाया जा रहा है. मंडपम् भारतीय प्रायद्वीप में जमीनी सीमा में रेलवे का अंतिम स्टेशन है. जबकि रामेश्वरम मन्नार की ख़ाड़ी में मौजूद है. इस पुल के बन जाने से यहां ट्रेनों को ज़्यादा स्पीड से चलाया जा सकेगा. साथ ही इससे मालगाड़ियों की भी क्षमता बढ़ जाएगी. सबसे ख़ास बात ये है कि नये पुल से एक बार में बड़ी संख्या में श्रद्धालु रामेश्वरम् तक जा सकेंगे.

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250 करोड़ रुपये की लगात से बना रहा पम्बन ​ब्रिज
पम्बन ब्रिज़ का निर्माण करीब 250 करोड़ रुपये की लागत से हो रहा है. इसके लिए आधारशिला मार्च 2019 में रखी गई थी. लेकिन कोरोना और लॉकडाउन की वजह से ब्रिज बनाने के काम भी प्रभावित हुआ है. पम्बन ब्रिज बनाने की जिम्मेदारी रेल विकास निगम लिमिटेड को दी गई है.

रामेश्वरम् से धनुषकोडी तक रेल लाइन बनाने की भी योजना
पम्बन में नए पुल के अलावा रेलवे की योजना रामेश्वरम् से धनुषकोडी तक एक बार फिर से रेल लाइन बनाने की है. यह रेल लाइन 18 किलोमीटर लंबी होगी. धनुषकोडी में ही रामसेतु ( एडम्स ब्रिज) का एक छोर मौजूद है. 1964 में आए साइक्लोन में यह रेल लाइन पूरी तरह तबाह हो गई थी. उस वक्त एक ट्रेन इसकी चपेट में भी आ गई थी जिसमें सवार सभी लोग मारे गए थे.

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धार्मिक यात्रा और पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
धनुषकोडी का अपना धार्मिक महत्व है. राम ने विभीषण को इसी जगह पर शरण दी थी. लंका विजय के बाद राम ने यहीं पर धनुष का एक शिरा तोड़ दिया था जिससे इसका नाम धनुषकोडी पड़ा. यहा श्रीलंका की सीमा के करीब 20 किलोमीटर दूर है. इस निर्माण से यहां धार्मिक यात्रा के अलावा पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा.
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