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5795 गांवों के किसान बने मिसाल, नहीं जलाई पराली, चारे में हो रहा इस्तेमाल!

ओम प्रकाश | News18Hindi
Updated: November 7, 2019, 2:50 PM IST
5795 गांवों के किसान बने मिसाल, नहीं जलाई पराली, चारे में हो रहा इस्तेमाल!
हरियाणा के फरीदाबाद में 38 गांवों के किसानों ने चारे के लिए बेची पराली

केंद्रीय कृषि मंत्रालय का दावा: उत्तर प्रदेश में 48.2 प्रतिशत कम हुई पराली जलाने की घटनाएं, दूसरी ओर पंजाब में काबू नहीं हुईं ऐसी घटनाएं. यहां सामने आए 25 हजार से अधिक केस

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  • Last Updated: November 7, 2019, 2:50 PM IST
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नई दिल्ली. इन दिनों पराली दिल्ली और हरियाणा में प्रदूषण (Pollution) का बड़ा कारण बनी हुई है. क्योंकि इसका प्रबंधन करने की जगह जलाया जा रहा है. हालांकि इसी दौर में कुछ किसानों ने पराली न जलाने का संकल्प लेकर अन्य खेतिहरों के लिए मिसाल पेश कर दी है.  हरियाणा सरकार (Haryana Government) ने दावा किया है कि उसके 5795 गांवों में इस साल पराली नहीं जली. इससे दूसरों को भी सीख लेनी चाहिए. फरीदाबाद के 38 गांवों के किसानों (Farmers) का एक ग्रुप भी ऐसे लोगों में शामिल है जिन्होंने पराली को पर्यावरण के लिए खतरा बनाने की जगह पशुओं के लिए चारा बना दिया.

फरीदाबाद के किसानों ने कायम की मिसाल
प्रगतिशील किसान मंच के महासचिव मकरंद शर्मा का कहना है कि फरीदाबाद के मोहना, फतेहपुर, जवां, दयालपुर, ककड़ीपुर, छपरौला और डींग सहित 38 गांवों में इस साल किसानों ने पराली को चारे के रूप में इस्तेमाल करने का फैसला लिया. ताकि पर्यावरण को नुकसान न हो. हमारे यहां के किसानों ने 2800 से 4000 रुपये प्रति कीला के हिसाब से इसे पशुओं के चारे के लिए बेच दिया. इस बार ज्वार कम थी. भुस भी कम हुई है. उसकी जगह हम पराली का इस्तेमाल करेंगे.

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पराली जलाने से किसान को होता है नुकसान
प्लांट प्रोटक्शन के प्रोफेसर आईके कुशवाहा कहते हैं कि पराली जलाने से किसानों को नुकसान होता है. इससे जो हीट निकलती है उसकी वजह से मित्र कीट खत्म हो जाते हैं. खेत की उर्वरा शक्ति कमजोर हो जाती है. इसे किसानों को बताने की जरूरत है.

पराली जलाने की घटनाओं में कमी
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केंद्रीय कृषि मंत्रालय (Agriculture Ministry) ने दावा किया है 2018 के मुकाबले पराली (Parali) जलाने की घटनाओं में 12.01 प्रतिशत की कमी आई है. इस साल (2019) यूपी में 48.2 प्रतिशत, हरियाणा में 11.7 और पंजाब में 8.7 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है.

...तो किसानों को नहीं मिलेगी कोई सुविधा
हरियाणा सरकार ने किसानों को चेतावनी दी है कि वो पराली न जलाएं. वरना उन्हें सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित कर दिया जाएगा. किसी गांव में पराली जली तो वहां का सरपंच जवाबदेह होगा. पराली जलाने की सूचना देने वाले को 1000 रुपये का पुरस्कार दिया जाएगा और उसकी पहचान गोपनीय रखी जाएगी.

पराली जलाने के 31 हजार से अधिक मामले
केंद्रीय कृषि मंत्रालय के मुताबिक उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब में 01 अक्तूबर, 2019 से 03 नवंबर, 2019 के बीच पराली जलाने के कुल 31,402 मामलों की जानकारी मिली है. पंजाब में सबसे अधिक 25,366, हरियाणा में 4,414 और उत्तर प्रदेश में 1,622 घटनाएं हुई हैं.

2017 में ही अलर्ट हो गया था पीएमओ
कृषि मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक पराली जलाने के कारण दिल्ली और एनसीआर क्षेत्र में होने वाले वायु प्रदूषण के संबंध में 2017 में ही प्रधानमंत्री कार्यालय के निर्देश पर एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया गया था. समिति ने पराली प्रबंधन के लिए तकनीक का इस्तेमाल करने की सिफारिश की थी. इसके आधार पर मंत्रालय ने एक योजना तैयार की जिसे 2018-19 के बजट में शामिल किया गया. इसके तहत पराली प्रबंधन मशीन खरीदने के लिए 50 फीसदी की सब्सिडी दी जा रही है.

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पेड्डी स्ट्रा चोपर मशीन की कीमत इतनी है कि किसान खरीदना नहीं चाहता (File Photo)


कितनी मशीनें दी गईं
रियायती दरों पर मशीन उपलब्ध कराने की योजना के तहत 2018-19 के दौरान पंजाब को 269.38, हरियाणा को 137.84 और उत्तर प्रदेश को 148.60 करोड़ रुपये जारी किए गए. जबकि 2019-20 के दौरान पंजाब को 273.80, हरियाणा को 192.06 और उत्तर प्रदेश को 105.29 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं. इन पैसों की मदद से अब तक 29,488 मशीने खरीदी गई हैं. जिनमें से 10379 मशीनें सीधे किसानों को दी गई हैं जबकि 19109 मशीनें सीएचसी (कस्टम हायरिंग सेंटर/मशीन बैंक) को.


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First published: November 7, 2019, 1:08 PM IST
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