पारले जी बिस्किट बनाने वाली कंपनी में जा सकती है 10 हजार कर्मचारियों की नौकरी, जानिए पूरा मामला

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, खपत (Consumption) में सुस्ती आने के कारण पारले प्रॉडक्ट्स (Parle Products) आठ से दस हजार कर्मचारियों की छंटनी कर सकती है.

News18Hindi
Updated: August 21, 2019, 3:31 PM IST
पारले जी बिस्किट बनाने वाली कंपनी में जा सकती है 10 हजार कर्मचारियों की नौकरी, जानिए पूरा मामला
पारले जी बिस्किट बनाने वाली कंपनी में हो सकती है 10 हजार लोगों की छंटनी, जानिए पूरा मामला
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Updated: August 21, 2019, 3:31 PM IST
हाई-वे किनारे के ढाबों, गांव कस्बों की चाय की दुकान में आज भी लोगों की पहली पसंद पारले जी (Parle G Biscuit) बिस्किट हैं. शहरों में भी इसके खरीददार कम नहीं हैं, लेकिन अब इसे बनाने वाली कंपनी पारले प्रोडक्ट भी कमजोर डिमांड से जूझ रही है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, खपत (Consumption) में सुस्ती आने के कारण पारले प्रॉडक्ट्स (Parle Products) 8,000-10,000 कर्मचारियों की छंटनी कर सकती है. अंग्रेजी अखबार इकोनॉमिक टाइम्स में छपी खबर में बताया गया है कि कंपनी 100 रुपये प्रति किलो या उससे कम कीमत वाले बिस्किट पर GST घटाने की मांग की है. अगर सरकार ने मांग नहीं मानी तो फैक्टरियों में काम करने वाले 8,000-10,000 लोगों को निकालना पड़ सकता है, क्योंकि सेल्स घटने से कंपनी को भारी नुकसान हो रहा है. हालांकि, पारले जी बिस्किट आमतौर पर 5 रुपये या कम के पैक में बिकते हैं.

आपको बता दें कि पारले प्रोडक्ट्स की सेल्स 10,000 करोड़ रुपये से ज्यादा होती है.  कंपनी के कुल 10 प्लांट है. इसमें करीब एक लाख कर्मचारी काम करते है. साथ ही, कंपनी 125 थर्ड पार्टी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट भी ऑपरेट करती हैं. कंपनी की सेल्स का आधा से ज्यादा हिस्सा ग्रामीण बाजारों से आता है.

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हाइवे के किनारे के ढाबों, गांव कस्बों की चाय की दुकान में आज भी लोगों की पहली पसंद पारले जी बिस्किट हैं. (फाइल फोटो)


क्या है मामला- मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि GST लागू होने से पहले 100 रुपये प्रति किलो से कम कीमत वाले बिस्किट पर 12 फीसदी टैक्स लगता था. इसीलिए कंपनी उम्मीद लगा रही थी कि GST में आने के बाद टैक्स की दरें 5 फीसदी तक आ सकती है. लेकिन सरकार ने जब GST लागू किया तो सभी बिस्किटों को 18 फीसदी स्लैब में डाला गया.

>> ऐसे में कंपनियों की लागत बढ़ गई. लिहाजा दाम बढ़ाना ही एकमात्र जरिया रह गया. इससे कंपनी की बिक्री पर निगेटिव असर पड़ा. पारले को भी इस दौरान 5 फीसदी दाम बढ़ाने पड़े है. लेकिन सेल्स घट रही है.

एफएमसीजी सेक्टर्स की डिमांड में आई बड़ी गिरावट (फाइल फोटो)

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एफएमसीजी सेक्टर्स की डिमांड में कमी का अनुमान- आपको बता दें कि पिछले महीने मार्केट रिसर्च कंपनी नीलसन ने देश के FMCG सेक्टर को लेकर एक रिपोर्ट जारी की है. इसमें उन्होंने इस साल के लिए ग्रोथ का अनुमान घटाकर 9-10 फीसदी कर दिया है.

इससे पहले ग्राोथ का अनुमान 11-12 फीसदी था. रिपोर्ट में बताया गया है कि आर्थिक सुस्ती का असर फूड बिजनेस पर दिख रहा है. इस सेक्टर में  सबसे बुरा  हाल, नमकीन, बिस्किट, मसाले, साबुन और पैकेट वाली चाय पर है.

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First published: August 21, 2019, 10:54 AM IST
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