लोकसभा में आवश्यक वस्तु संशोधन विधेयक पारित, विपक्ष के साथ SAD ने भी किया बिल का विरोध

लोकसभा में आवश्यक वस्तु संशोधन विधेयक पारित, विपक्ष के साथ SAD ने भी किया बिल का विरोध
संसद के निचले सदन में मंगलवार को आवश्‍यक वस्‍तु संशोधन विधेयक ध्‍वनिमत से पारित हो गया.

Monsoon Session: आवश्यक वस्तु अधिनियम को 1955 में संसद (Parliament) ने पारित किया था. तब से सरकार इस कानून की मदद से 'आवश्यक वस्तुओं' का उत्पादन, आपूर्ति और वितरण नियंत्रित करती है. इससे आवश्‍यक वस्‍तुएं उपभोक्ताओं को मुनासिब दाम (Reasonable Price) पर उपलब्ध होती हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 15, 2020, 11:07 PM IST
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नई दिल्‍ली. अनाज, दलहन, तिलहन, खाद्य तेल, प्‍याज, आलू को आवश्‍यक वस्‍तुओं की सूची से हटाने का प्रावधान करने वाले आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक 2020 (Essential Commodities Amendment Bill 2020) को आज संसद के निचले सदन में पारित कर दिया गया. हालांकि, विपक्ष समेत एनडीए (NDA) में शामिल शिरोमणि अकाली दल (SAD) ने इस विधेयक का विरोध किया. अकाली दल ने केंद्र सरकार (Central Government) से विधेयक और अध्यादेश वापस लेने की मांग की. सरकार की ओर से कहा गया कि इससे निजी निवेशकों (Private Investors) को बहुत ज्‍यादा नियामकीय हस्‍तक्षेपों (Regulatory Interventions) से निजात मिलेगी.

केंद्र ने कहा, कृषि क्षेत्र में एफडीआई को मिलेगा बढ़ावा
आवश्यक वस्तु अधिनियम को 1955 में संसद (Parliament) ने पारित किया था. तब से सरकार इस कानून की मदद से 'आवश्यक वस्तुओं' का उत्पादन, आपूर्ति और वितरण नियंत्रित करती है. इससे आवश्‍यक वस्‍तुएं उपभोक्ताओं को मुनासिब दाम (Reasonable Price) पर उपलब्ध होती हैं. अब मोदी सरकार (Modi Government) का कहना है कि संशोधित विधेयक से उत्‍पाद, उत्‍पाद सीमा, आवाजाही, वितरण व आपूर्ति की आजादी मिलेगी और बिक्री की अर्थव्‍यवस्‍था को बढ़ाने में मदद मिलेगी. इससे कृषि क्षेत्र (Agriculture Sector) में निजी क्षेत्र और विदेशी प्रत्‍यक्ष निवेश (FDI) आकर्षित होगा.

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मजबूत होगी सप्‍लाई चेन और किसान, बढ़ेगा निवेश


निचले सदन में चर्चा का जवाब देते हुए उपभोक्ता मामले, खाद्य व सार्वजनिक वितरण राज्यमंत्री रावसाहेब दानवे ने कहा कि इस विधेयक से कृषि क्षेत्र में आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को मजबूत बनाया जा सकेगा. इससे किसान (Farmers) मजबूत होगा और निवेश को बढ़ावा मिलेगा. इससे कृषि क्षेत्र में कारोबार के अनुकूल माहौल बनाने और 'वोकल फॉर लोकल' (Vocal for Local) को मजबूती मिलेगी. राज्‍यमंत्री के जवाब के बाद विपक्षी सदस्यों के संशोधनों को अस्वीकार करते हुए लोकसभा (Lok Sabha) में ध्वनिमत से विधेयक को मंजूरी दे दी गई. इससे जुड़ा अध्यादेश 5 जून 2020 को जारी किया गया था.

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'खाद्य वस्‍तुओं की कीमत पर नियंत्रण का प्रावधान नहीं'
राज्‍यमंत्री ने कहा कि इस मुद्दे पर विचार के लिए मुख्यमंत्रियों की एक उच्चाधिकार समिति बनाई गई थी. विधेयक में ऐसे प्रावधान किये गए हैं, जिससे बाजार में प्रतिस्पर्धा व खरीद बढ़ेगी और किसानों को अपने उत्‍पाद (Farm Products) का उचित मूल्य मिलेगा. इस पर शिवसेना (Shiv Sena) के राहुल शेवाले ने कहा कि खाद्य वस्तुओं की कीमत पर नियंत्रण (Price Control) को लेकर इसमें कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है. उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ने के लिए जरूरी वस्तुओं की कीमत पर नियंत्रण के लिए कड़े प्रावधान करना जरूरी है. सरकार को इस पर ध्यान देना चाहिए.

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बसपा का आरोप, किसान विरोधी है संशोधन विधेयक
जदयू (JDU) के कौशलेंद्र कुमार ने कहा कि कालाबाजारी (Black Marketing) और जमाखोरी पर अंकुश लगाने के लिए पूरा प्रयास होना चाहिए. इस विधेयक से कीमतों को नियंत्रण करने में मदद मिलेगी. बीजू जनता दल (BJD) के भतृहरि महताब ने कहा कि कीमतों के नियंत्रण को लेकर सशक्त व्यवस्था होनी चाहिए. बसपा (BSP) के कुंवर दानिश अली ने आरोप लगाया कि यह विधेयक किसान विरोधी है और बिचौलियों को फायदा पहुंचाने वाला है. राकांपा (NCP) के श्रीनिवास पाटिल और कुछ अन्य सदस्यों ने भी संशोधन विधेयक का विरोध किया.

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शिअद ने कहा, विधेयक और अध्‍यादेश वापस ले केंद्र
केंद्र में सत्तारूढ़ एनडीए के सहयोगी शिरोमणि अकाली दल (SAD) के सुखवीर सिंह बादल ने कहा कि इस कानून को लेकर पंजाब के किसानों, आढ़तियों और व्यापारियों के बीच बहुत आशंकाएं हैं. सरकार को इस विधेयक और अध्यादेश को वापस लेना चाहिए. तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सौगत राय ने विधेयक का विरोध करते हुए कहा कि आवश्यक वस्तु अधिनियम में पहले भी संशोधन हुए हैं, लेकिन मौजूदा संशोधन कानून को कमजोर करने वाला है. संशोधित विधेयक से किसानों के बजाय बिचौलियों को फायदा पहुंचेगा.
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