18 साल के सबसे बुरे दौर में पहुंची ऑटो कंपनियां, जानें 10 बड़ी बातें

डिमांड में कमी के कारण हजारों गाड़ियां शोरूम में खड़ी है. कार की बिक्री में कमी को लेकर सबसे बड़ी वजह जीसटी का स्लैब सबसे ज्यादा होना बताया जा रहा है.

News18Hindi
Updated: June 12, 2019, 12:40 PM IST
18 साल के सबसे बुरे दौर में पहुंची ऑटो कंपनियां, जानें 10 बड़ी बातें
ऑटो कंपनियों की सेल
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Updated: June 12, 2019, 12:40 PM IST
पिछले कुछ महीनों से ऑटोमोबाइल सेक्टर की डिमांड में भारी गिरावट देखने को मिल रही है. पैसेंजर व्हीकल की कम सेल के चलते हजारों गाड़ियां डीलर्स के पास खड़ी हैं. इंडस्ट्री बॉडी सियाम की तरफ से जारी आंकड़ों के मुताबिक, कारों की सेल्स पिछले महीने 20.55 फीसदी घटकर 2,39,347 यूनिट पर आ गई. यह गाड़ियों की सेल्स में पिछले 18 साल की सबसे तेज गिरावट थी. सितंबर 2001 में पैसेंजर गाड़ियों की सेल्स में 21.91% की भारी कमी आई थी. एक्सपर्ट्स का कहना है कि कारों को जीएसटी के सबसे ऊंचे स्लैब 28 फीसदी में रखा गया है. इससे कंपनियों की लागत बढ़ रही है. वहीं, रोज़गार सेक्टर में धीमापन और पेट्रोल कीमतों में आई तेजी भी सेल्स में गिरावट की बड़ी वजह है.

ऑटो कंपनियों की सेल्स में क्यों आई गिरावट, जानें इससे जुड़ी 10 बड़ी बातें



(1) इस साल मई महीने में कार सेल्स रिवर्स गीयर में है. पिछले महीने में घरेलू पैसेंजर्स व्हीकल्स सेल्स 20.55 फीसदी गिरकर 2,39,347 यूनिट दर्ज की गई, जोकि मई 2018 में 3,01,238 थी. वहीं, घरेलू कार सेल्स 26.03 फीसदी गिरकर 1,47,546 यूनिट रह गई. पिछले साल मई में घरेलू कार सेल्स 1,99,479 थी. ऑटो मैन्युफैक्चरर्स के संगठन सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) ने मंगलवार को आंकड़े जारी किए.

(2) सियाम के अनुसार, मई में मोटरसाइकिल सेल्स 4.89 फीसदी गिरकर 11,62,373 रह गई, जो पिछले साल इसी महीने 12,22,164 थी. कुल टूव्हीलर्स सेल्स की बात करें तो मई में यह 6.73 फीसदी गिरकर 17,26,206 रह गया, जो एक साल पहले इसी महीने 18,50,698 यूनिट था.



(3) सियाम के अनुसार, मई महीने में कॉमर्शियल व्हीकल्स की सेल्स भी 10.02 फीसदी गिरकर 68,847 यूनिट रह गई. सभी कैटेगरी के व्हीकल सेल्स की बात करें तो इसमें 8.62 फीसदी की गिरावट आई और यह 20,86,358 यूनिट रह गया. मई 2018 में यह आंकड़ा 22,83,262 था.

(4) सियाम के डायरेक्टर जनरल विष्णु माथुर का कहना है कि हमने इसको लेकर सरकार से संपर्क किया है और उससे सभी कैटिगरी वाली गाड़ियों पर लगनेवाले गुड्स ऐंड सर्विसेज टैक्स (GST) को मौजूदा 28% से घटाकर 18% करने का अनुरोध किया है.
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(5) सियाम के डिप्टी डायरेक्टर जनरल सुगतो सेन ने कहा, 'सरकार को व्हीकल स्क्रैपेज पॉलिसी बनानी चाहिए. इससे नई गाड़ियों के लिए बाजार बनाने में मदद मिलेगी.

(6) हम सरकार से रिसर्च ऐंड डिवेलपमेंट पर वेटेड टैक्स डिडक्शन के तौर पर मिलने वाले इंसेंटिव का 200% का पुराना लेवल बहाल किए जाने की भी मांग कर रहे हैं.'



(7) कई कंपनियों ने गाड़ियों का प्रोडक्शन रोका-कई बड़ी ऑटो कंपनियां जैसे मारुति सुजुकी, महिंद्रा और टाटा मोटर्स ने अपने पिछले प्रोडक्शन के स्टॉक को क्लियर करने के लिए प्रोडक्शन को रोक दिया है. इन कंपनियों ने जून के महीने में प्लांट शटडाउन की घोषणा की है.

(8) इनमें से कुछ आने वाले महीनों में शटडाउन की घोषणा करेंगी. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय बाजार में ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री को पैसेंजर व्हीकल की डिमांड में भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है.

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(9) कारों की मांग में कमी पिछले 7 महीनों से आई है, जिससे कंपनी डीलरशिप के इन्वेंटरी में बढ़ोतरी हुई है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी की डीलरशिप में अब 5 बिलियन डॉलर (35,000 करोड़ रुपये) के अनसोल्ड कारों की इन्वेंटरी मौजूद है.

(10) ऐसे में डीलर्स को मिलेगी राहत-बता दें कि ऑटो कंपनियों के प्रोडक्शन बंद होने से मई-जून 2019 के दौरान इंडस्ट्री आउटपुट लगभग 20 प्रतिशत कम हो जाएगा. इससे कंपनी इन्वेंटरी में प्रेशर कम करने में मदद मिलेगी. ऐसे में बुरे दौर से गुजर रहे डीलर्स को भी राहत मिलेगी. क्योंकि कंपनी डीलर्स को भी उनके स्टॉकयार्ड के अनसोल्ड व्हीकल्स के लिए GST का भुगतान करना होता है. मारुति सुजुकी, महिंद्रा और टाटा मोटर्स ने मई के महीने में भी कई दिनों के लिए प्रोडक्शन बंद कर दिया था. कई और बड़ी कंपनियां जैसे होंडा, रेनो-निसान और स्कोडा ऑटो भी अपने प्रोडक्शन को 10 दिनों के लिए बंद करने की तैयारी में है.

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