सिर्फ 4 महीने में Patanjali ने बेची 25 लाख Coronil kits, हुई 250 करोड़ की कमाई

पिछले 4 महीने में कंपनी ने अब तक कोरोनिल की 25 लाख यूनिट बेच दी हैं.
पिछले 4 महीने में कंपनी ने अब तक कोरोनिल की 25 लाख यूनिट बेच दी हैं.

बाबा रामदेव (Baba Ramdev) ने पतंजलि 'कोरोनिल' (Coronil kits) को देश के साथ-साथ विदेशों में भी काफी इस्तेमाल किया जा रहा है. पिछले 4 महीने में कंपनी ने अब तक कोरोनिल की 25 लाख यूनिट बेच दी हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 4, 2020, 9:14 AM IST
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नई दिल्‍ली: बाबा रामदेव (Baba Ramdev) ने पतंजलि 'कोरोनिल' (Coronil kits) को देश के साथ-साथ विदेशों में भी काफी इस्तेमाल किया जा रहा है. पिछले 4 महीने में कंपनी ने अब तक कोरोनिल की 25 लाख यूनिट बेच दी हैं. पतंजलि ने दावा किया था कि इस दवाई के इस्तेमाल से कोरोना से बचा जा सकता है, जिसके बाद देश के साथ-साथ विदेशों में भी इस दवाई की मांग काफी तेज है. कंपनी के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 4 महीने में कंपनी का प्रॉफिट 250 करोड़ पर पहुंच गया है.

23 जून को किया था दावा
आपको बता दें कंपनी ने 23 जून को दावा किया था कि कोरोनिल और स्‍वसारी के मिश्रण से कोरोना वायरस इलाज की दवा खोज ली है, जो सात दिन में इस जानलेवा संक्रमण को शरीर के अंदर से खत्‍म कर देती है.

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इस तरह हो रही सेल


इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, 18 अक्‍टूबर तक पतंजलि ने कोरोनिल किट की 25 लाख यूनिट बेच ली हैं, जिससे कंपनी को 250 करोड़ रुपए का प्रॉफिट हुआ है. कंपनी ने इस दवाई को 23 जून को लॉन्च किया था. इस दवाई को लॉन्च हुए अभी सिर्फ 4 महीने का समय हुआ है. बता दें कुछ डायरेक्‍ट मार्केटिंग और जनरल मार्केटिंग और अन्‍य पतंजलि के भारत और विदेशों में फैले विभिन्‍न डिस्‍पेंसरीज और मेडिकल सेंटर्स के जरिये बेची गई हैं.

आयुष मंत्रालय ने लगाई थी रोक
ये दवाई लॉन्च होने के बाद में विवादों में घिर गई थी. कई लोगों ने इस दवाई को लेकर पतंजलि से सावल किए थे. आयुष मंत्रालय द्वारा पतंजलि को कोरोनिल को कोरोना वायरस की दवा बताकर बेचने से रोकने के बाद बाबा रामदेव की कंपनी ने तुरंत अपने दावे पर यूटर्न लेते हुए इसे इम्‍यूनिटी बूस्‍टर बताया था. इसके बाद से इस किट का प्रचार इम्‍यूनिटी बूस्‍टर के नाम पर किया जा रहा है.

देसी दवाई का किया गया है इस्तेमाल
कोरोनिल किट 545 रुपए में उपलब्ध है. योगगुरु रामदेव के मुताबिक, इस दवाई को बनाने में सिर्फ देसी सामान का इस्तेमाल किया गया है, जिसमें मुलैठी-काढ़ा समेत कई चीज़ों को डाला गया है. साथ ही गिलोय, अश्वगंधा, तुलसी, श्वासरि का भी इस्तेमाल किया गया.

दवाई में क्या-क्या है खास
आचार्य बालकृष्ण के मुताबिक दिव्‍य कोरोनिल टैबलेट में शामिल अश्वगंधा कोविड-19 के आरबीडी को मानव शरीर के एसीई से मिलने नहीं देता. इससे संक्रमित मानव शरीर की स्वस्थ कोशिकाओं में प्रवेश नहीं कर पाता. वहीं गिलोय भी संक्रमण होने से रोकता है. तुलसी का कंपाउंड कोविड-19 के आरएनए-पॉलीमरीज पर अटैक कर उसके गुणांक में वृद्धि करने की दर को न सिर्फ रोक देता है, बल्कि इसका लगातार सेवन उसे खत्म भी कर देता है. वहीं श्वसारि रस गाढ़े बलगम को बनने से रोकता है और बने हुए बलगम को खत्म कर फेफड़ों की सूजन कम कर देता है.

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इन राज्यों ने शुरुआत में लगाई थी रोक
बता दें राजस्‍थान और महाराष्‍ट्र सरकार ने अपने-अपने राज्‍यों में कोरोनिल किट की बिक्री को प्रतिबंधित कर दिया थी. वहीं, मद्रास हाईकोर्ट ने 6 अगस्‍त को पतंजलि को अपने इम्‍यूनिटी बूस्टिंग प्रोडक्‍ट्स के लिए कोरोनिल ब्रांडिंग का उपयोग करने से रोक दिया था.
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