होम /न्यूज /व्यवसाय /भारतीय इतिहास की सबसे बड़ी फिनटेक मर्जर डील रद्द, बिलडेस्क को नहीं खरीदेगा PayU

भारतीय इतिहास की सबसे बड़ी फिनटेक मर्जर डील रद्द, बिलडेस्क को नहीं खरीदेगा PayU

मर्जर की इस प्रक्रिया को पूरा होने में कम से कम 45 दिन लगने थे.

मर्जर की इस प्रक्रिया को पूरा होने में कम से कम 45 दिन लगने थे.

पेयू (PayU) के मालिकाना हक वाली कंपनी प्रॉसस (Prosus) ने भारतीय पेमेंट कंपनी बिलडेस्क (BillDesk) के साथ अपनी डील को तोड ...अधिक पढ़ें

हाइलाइट्स

PayU और BillDesk की मर्जर डील 4.7 बिलियन डॉलर की थी.
अधिग्रहण सौदे में होने वाला लेनदेन विभिन्न शर्तों के पालन पर निर्भर था.
इस सौदे को अभी भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मंजूरी मिलना बाकी था.

नई दिल्ली. भारतीय फाइनेंशियल टेक्नोलॉजी की इतिहास की सबसे बड़ी अधिग्रहण की डील रद्द हो गई है. पेयू (PayU) के मालिकाना हक वाली कंपनी प्रॉसस (Prosus) ने भारतीय पेमेंट कंपनी बिलडेस्क (BillDesk) के साथ अपनी डील को तोड़ते हुए कहा है कि कुछ ऐसी शर्तें थीं, जिन्हें पूरा नहीं किया गया. यह डील 4.7 बिलियन डॉलर की थी.

सोमवार को जारी एक बयान में, प्रॉसस ने कहा, “इस अधिग्रहण सौदे में होने वाला लेनदेन विभिन्न शर्तों के पालन पर निर्भर करता था, जिसमें भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) की मंजूरी भी शामिल थी. पेयू ने 5 सितंबर, 2022 को सीसीआई की मंजूरी हासिल की,​परतु, कुछ शर्तें 30 सितंबर 2022 तक पूरी नहीं हुई थीं. लंबी स्टॉप डेट, और समझौता इसकी शर्तों के अनुसार ऑटोमेटिकली समाप्त हो गया है.”

ये भी पढ़ें – बोनस देने की घोषणा से इंट्राडे में 11 फीसदी उछले Nykaa के शेयर, निवेशकों का जोश हाई

31 अगस्त 2021 को, Prosus ने घोषणा की थी कि उसकी सहायक कंपनी PayU Payments Private Limited (PayU) और भारतीय डिजिटल पेमेंट्स प्रोवाइडर BillDesk के शेयरधारकों के बीच एक समझौता हुआ है. इस सौदे को सितंबर में CCI की मंजूरी मिल गई थी, लेकिन इसे अभी भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मंजूरी मिलना बाकी था. इस प्रक्रिया में कम से कम 45 दिन लगने थे.

भारत में लगातार काम कर रही है प्रॉसस
2005 से लेकर अब तक प्रॉसस भारत में लगातार निवेश और काम कर रही है. कंपनी ने इस दौरान भारतीय टेक्नोलॉजी कंपनियों में 6 बिलियन डॉलर का निवेश किया है. कंपनी ने अब कहा है कि वह भारतीय बाजार पर अपना ध्यान केंद्रित रखेगी और इस क्षेत्र में अपने वर्तमान बिजनेसेज को बढ़ाने के लिए काम करती रहेगी. कंपनी ने ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म मीशो (Meesho), बायजूस, डीहाट (DeHaat), मेन्सा ब्रांड्स एंड गुड ग्लैम ग्रुप में निवेश किया हुआ है.

ये भी पढ़ें – Stock Market: ये 5 फैक्‍टर शेयर बाजार में ला सकते हैं बड़ी गिरावट, हर निवेशक जरूर जाने

तो PayU को होता बड़ा लाभ
यह अधिग्रहण यदि पूरा होता हो डिजिटल पेमेंट (B2B) सेग्मेंट में पेयू (PayU) सबसे बड़ा प्लेयर बन जाता. इससे एक बड़ी डिजिटल भुगतान कंपनी का गठन होता, जिसका कुल वार्षिक भुगतान मूल्य (टीपीवी) 147 अरब डॉलर से अधिक होता. इसके मुकाबले में भारतीय बाजार में रेजरपे और सीसीएवेन्यू ही होते, जिनका टीपीवी क्रमशः 50 अरब डॉलर और 20 अरब डॉलर है. इस अधिग्रहण की घोषणा के वक्त, पेयू के इंडिया हेड अनिर्बन मुखर्जी ने एक मीडिया हाउस से कहा था कि दोनों कंपनियों के एक होने से बाजार में और नए प्रोडक्ट्स लॉन्च होंगे.

प्रॉसस की हिस्सेदारी नैस्पर्स के पास
नीदरलैंड की कंपनी प्रॉसस की बहुलांश हिस्सेदारी नैस्पर्स के पास है. प्रॉसस ने कहा कि वह भारत की प्रौद्योगिकी कंपनियों में अबतक करीब छह अरब डॉलर का निवेश कर चुकी है. बिलडेस्क की स्थापना 2000 में एम एन श्रीनिवासु, अजय कौशल और कार्तिक गणपति ने की थी। इंटरनेट एवं स्मार्टफोन के विस्तार के साथ बिलडेस्क का भी कारोबार तेजी से बढ़ा है. इस सौदे के संपन्न होने की स्थिति में बिलडेस्क के हर संस्थापक को करीब 50 करोड़ डॉलर मिलते.

Tags: Business news, Business news in hindi, IT Companies

विज्ञापन

टॉप स्टोरीज

अधिक पढ़ें