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वाराणसी की मटर और हरे बैंगन को मिला इंटरनेशनल बाज़ार, इस देश के लिए सब्जी लेकर उड़ा एअर इंडिया एक्सप्रेस विमान

अब वाराणसी से हर रोज हरी सब्जियां विदेशी बाजारों के लिए कार्गो विमान के जरिए रवाना होंगी.
अब वाराणसी से हर रोज हरी सब्जियां विदेशी बाजारों के लिए कार्गो विमान के जरिए रवाना होंगी.

पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणासी से अब हर रोज़ एअर इंडिया एक्सप्रेस का एक विमान हरी सब्जियां अंतरराष्ट्रीय बाजार के लिए रवाना होगा. 19 जनवरी को भी एअर इंडिया एक्सप्रेस के एक विमान ने 1 हजार किलो हरा मटर और हरा गोल बैंगन लेकर शारजहां के लिए उड़ान भरा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 20, 2021, 6:56 PM IST
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नई दिल्ली. पीएम नरेन्द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी की हरी सब्ज़ियों को अब इंटरनेशल बाज़ार मिल गया है. वाराणसी से अब रोज़ाना एअर इंडिया एक्सप्रेस (Air India Express)) का विमान यह सब्जियां लेकर जाएगा. 19 जनवरी को एक हज़ार किलो हरी मटर और गोल हरा बैंगन लेकर एक विमान शारजहां के लिए उड़ा. एपीडा की मदद से वाराणसी को यह इंटरनेशनल बाज़ार मिला है. अब हर रोज़ यहां से हरी सब्जियां हवाइ जहाज से सीधे दूसरे देशों को जाएंगी. वहीं वाराणसी के हरे गोल बैंगन के जीआई टैग के लिए भी कोशिश शुरु हो गई है.

19 जनवरी को इस खेप को वाराणसी स्थित लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से रवाना किया गया. इस खेप को एपीडा के अध्यक्ष डॉ. एम. अंगामुथु समेत केंद्र और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया. इस खेप में 1000 किलोग्राम हरी मटर, और रामनगर भंटा (गोल हरा बैंगन) जैसी सब्जियां थीं.

अध्यक्ष डॉ. एम. अंगामुथु ने बताया कि वाराणसी हवाई अड्डे से सीधा निर्यात शुरू हो जाने के बाद अब वाराणसी हवाई अड्डे से कृषि उत्पादों का और भी अधिक निर्यात करने का रास्ता खुल गया है. जिसके चलते अब वाराणसी और उसके आसपास के इलाकों के जीआई उत्पादों का निर्यात करना भी शामिल हो गया है.



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गौरतलब रहे हाल ही में पीएम नरेन्द्र मोदी ने जीआई (भौगोलिक संकेत) उत्पादों को बढ़ावा देने और उत्पादों को ‘लोकल से ग्‍लोबल’ बनाने पर विशेष जोर दिया था. इसी के चलते एपीडा अध्यक्ष डॉ. एम. अंगामुथु ने रामनगर भंटा के खेतों का दौरा किया, जो अनेक अद्वितीय उत्पादों में से एक है. रामनगर भंटा जीआई प्रमाणीकरण प्राप्‍त करने की प्रक्रिया में है और जिसकी पहचान अंतर्राष्ट्रीय बाजार में प्रचार के लिए की गई है.

उन्होंने यह भी कहा कि पूर्वी उत्तर प्रदेश चारों ओर जमीन से घिरा क्षेत्र है, और निकटतम समुद्री बंदरगाह एक हजार किलोमीटर दूर हैं. इस तरह के हालातों में हवाई अड्डे के जरिए निर्यात का एक विकल्प इस क्षेत्र के किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) और निर्यातकों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है.
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