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आपकी बात : दो पाटों में पिस रहा आम आदमी, कोरोनाकाल में टूटा मुसीबतों का पहाड़

आपकी बात : दो पाटों में पिस रहा आम आदमी, कोरोनाकाल में टूटा मुसीबतों का पहाड़

महंगाई ने मध्‍य वर्ग को सबसे ज्‍यादा परेशान किया है. ईंधन और खाने-पीने की वस्‍तुओं के दाम बेतहाशा बढ़े हैं.

महंगाई ने मध्‍य वर्ग को सबसे ज्‍यादा परेशान किया है. ईंधन और खाने-पीने की वस्‍तुओं के दाम बेतहाशा बढ़े हैं.

2014 में मोदी सरकार के सत्‍ता में आने के बाद करीब साढ़े पांच साल में खुदरा कीमतों में 8 फीसदी वृद्धि हुई थी. कोरोना महामारी के आते ही पिछले दो साल में ही खुदरा कीमतें 10 फीसदी से भी ज्‍यादा बढ़ चुकी हैं. रसोई गैस के दाम ही 43.36 फीसदी बढ़ गए.

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नई दिल्‍ली. कोरोना महामारी ने सबसे ज्‍यादा कहर देश की आम जनता और मध्‍य वर्ग के उपभोक्‍ताओं पर ढाया है. एक तरफ तो लाखों लोगों का रोजगार छिन गया और दूसरी ओर बढ़ती महंगाई लगातार मुसीबतें बढ़ा रही है. भारत का आम आदमी इन दो पाटों के बीच पिसकर रह गया है.

सरकार के ही सांख्यिकी मंत्रालय के आंकड़ों को देखें तो पता चलता है कि 2020 की शुरुआत से अब तक खाद्य तेलों, दालों, मांस, रसोई गैस व अन्‍य सेवाओं की महंगाई 20 से 40 फीसदी तक बढ़ गई है. महामारी के बढ़ते जोखिमों के बीच स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं का खर्च और दवाओं की कीमतों में भी तेज उछाल आया है. दूसरी ओर रोजगार के मौके कम हुए तो कंपनियों ने वेतन आदि भी घटा दिया. यानी कमाई घट रही और महंगाई से खर्चे बढ़ते जा रहे. विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोनाकाल में आम आदमी पर तो मानों मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा हो और वह राहत के लिए बस सरकार की ओर आशा भरी नजरों से देख रहा है.

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दो साल में बढ़ गई छह साल की महंगाई
मंत्रालय के मुताबिक, 2014 में मोदी सरकार के सत्‍ता में आने के बाद करीब साढ़े पांच साल में खुदरा कीमतों में 8 फीसदी वृद्धि हुई थी. कोरोना महामारी के आते ही पिछले दो साल में ही खुदरा कीमतें 10 फीसदी से भी ज्‍यादा बढ़ चुकी हैं. इस दौरान रसोई गैस के दाम ही 43.36 फीसदी बढ़ चुके हैं, जबकि महामारी से पहले के साढ़े पांच साल के दौरान इसमें 30.68 फीसदी का इजाफा हुआ था.

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आम आदमी को डराते हैं ये आंकड़े
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, चालू वित्‍तवर्ष के अंत तक प्रति व्‍यक्ति आय 93,973 रुपये रहने का अनुमान है. महामारी से पहले यह आंकड़ा 94,566 रुपये था. यह गिरावट तब दिख रही है जबकि पिछले दो साल में कई कंपनियों की कमाई 100 गुना से भी अधिक बढ़ चुकी है. इसके अलावा सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकॉनमी (CMIE) ने दिसंबर में 7.9 फीसदी बेरोजगारी दर का दावा किया था. उसका कहना था कि देश में 3.5 करोड़ से ज्‍यादा लोग रोजगार की तलाश में हैं.

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सरकार की ये योजना और बढ़ा सकती है मुसीबत
मोदी सरकार ने लोकल मैन्‍युफैक्‍चरिंग को बढ़ावा देने और लांग टर्म के प्रोजेक्‍ट पर खर्च बढ़ाने के लिए कई उत्‍पादों पर आयात शुल्‍क में इजाफे की योजना बनाई है. अर्थशास्त्रियों का कहना है कि सरकार का यह कदम महंगाई और बढ़ा सकता है, जिसका सबसे ज्‍यादा असर मध्‍य वर्ग पर पड़ेगा. वैसे भी महामारी के दौरान दी गई राहतों में मध्‍य वर्ग के हाथ खाली रहे. मुफ्त अनाज का लाभ निचले तबके को मिला जबकि कारोबारियों को तमाम आर्थिक सहायता दी गई.

Tags: Inflation, Modi government

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