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Credit Card से करें खरीदारी तो बैलेंस न होने दें जीरो, अगर बार-बार पार करेंगे क्रेडिट लिमिट तो होंगे कई नुकसान

क्रेडिट लिमिट वह सीमा है जिसके बराबर क्रेडिट कार्ड होल्डर अपने कार्ड से अधिकतम खर्च कर सकता है.

क्रेडिट लिमिट वह सीमा है जिसके बराबर क्रेडिट कार्ड होल्डर अपने कार्ड से अधिकतम खर्च कर सकता है.

क्रेडिट कार्ड (Credit Card) आज शॉपिंग के लिए पैमेंट करने का यह पसंदीदा माध्‍यम बन गया है. लेकिन क्रेडिट कार्ड को कभी भी शॉपिंग करते वक्‍त अपने कार्ड की क्रेडिट लिमिट (Credit Card Limit) पार नहीं करनी चाहिए. क्रेडिट कार्ड लिमिट के बार-बार जीरो होने के बहुत से नुकसान हैं.

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नई दिल्‍ली. आजकल शॉपिंग के लिए क्रेडिट कार्ड (Credit Card) का चलन बहुत बढ़ गया है. कुछ क्रेडिट कार्ड तो 3 महीने तक ब्‍याज रहित क्रेडिट अपने ग्राहकों को प्रदान करते हैं. इसी कारण बहुत से लोग क्रेडिट कार्ड से खूब खरीददारी करते हैं. लेकिन, क्‍या आप जानते हैं कि अगर आप अपने क्रेडिट कार्ड की लिमिट (Credit Card Limit) का पूरा इस्तेमाल कर डालते हैं, तो क्‍या नुकसान होता है?

क्रेडिट लिमिट वह सीमा है जिसके बराबर क्रेडिट कार्ड होल्डर अपने कार्ड से अधिकतम खर्च कर सकता है. क्रेडिट कार्ड पर लाभ और विशेषताओं के आधार पर ही क्रेडिट लिमिट तय होती है. बैंक को लिमिट तय करने का अधिकार होता है. इसके लिए अलग-अलग बैंक भिन्‍न-भिन्‍न कसौटियों को अपनाते हैं. क्रेडिट कार्ड का यूज करते समय हमेशा सावधानी बरतनी चाहिए तथा बैलेंस की जानकारी रखनी चाहिए.

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घट सकती है क्रेडिट लिमिट

अगर कोई क्रेडिट कार्डहोल्‍डर बार-बार क्रेडिट बैलेंस जीरो कर देता है तो, ऐसे कस्‍टमर की क्रेडिट लिमिट बैंक कम भी कर सकते हैं. वो इसलिए ऐसा करते है क्‍योंकि उन्‍हें लगता है कि आगे चलकर यह कस्‍टमर बैंक का कर्ज चुकाने में असफल हो सकता है. अगर क्रेडिट लिमिट घट जाती है तो क्रेडिट स्‍कोर अपने आप ही कम हो जाता है.

खराब हो सकता है क्रेडिट स्‍कोर

क्रेडिट लिमिट का पूरा उपयोग होने से क्रेडिट यूटिलाइजेशन रेश्यो (CUR) बढ़ जाती है. इससे क्रेडिट कार्ड होल्‍डर का क्रेडिट स्कोर खराब हो सकता है. इससे आपको भविष्‍य में लोन लेने में दिक्‍कत हो सकती है. क्रेडिट स्कोरिंग एजेंसियां क्रेडिट यूटिलाइजेशन रेश्यो निर्धारित करती हैं. आपका क्रेडिट यूटिलाइजेशन रेशियो इस बात पर निर्भर करता है कि आप अपने क्रेडिट कार्ड का कितना इस्तेमाल करते हैं.

वित्तीय इमेज पर असर

अगर कोई कार्ड होल्‍डर लगातार अपना क्रेडिट कार्ड बैलेंस जीरो करता है तो इससे कार्ड होल्‍डर की वित्तीय इमेज पर नकारात्‍मक असर पड़ता है. इससे बैंक और क्रेडिट स्‍कोर एजेंसियां यह धारणा बना लेती है कि कार्ड होल्डर बहुत ज्यादा खर्चीला है और उसे खर्च का प्रबंधन करना नहीं आता.

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क्रेडिट लिमिट की तरह ही क्रेडिट कार्ड की कैश लिमिट भी होती है. इसका अर्थ यह है कि आप क्रेडिट कार्ड से कितनी नकदी निकलवा सकते हो. इस लिमिट का बैलेंस भी कभी जीरो नहीं करना चाहिए. अगर बार-बार आप ऐसा करेंगे तो आपका क्रेडिट स्‍कोर प्रभावित होगा. इससे आपको भविष्‍य में लोन लेने में दिक्‍कत होगी.

Tags: Business news in hindi, Credit card, Credit card limit, Personal finance

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