टैक्स बचत के लिए 31 मार्च तक बीमा पॉलिसी लेनी है तो यह बात जरूर जान लें, मिलेगा बड़ा फायदा

यूलिट लिंक्ड बीमा (यूलिप, ULIP) पर कमीशन घट गया है, इसलिए अब एजेंट पारंपरिक जीवन बीमा पॉलिसियां बेचने पर जोर दे रहे हैं.

यूलिट लिंक्ड बीमा (यूलिप, ULIP) पर कमीशन घट गया है, इसलिए अब एजेंट पारंपरिक जीवन बीमा पॉलिसियां बेचने पर जोर दे रहे हैं.

बैंक एफडी (FIxed Deposit) में रिटर्न कम होने से भी निवेशक बीमा पॉलिसियों में मिलने वाले गारंटीड रिटर्न (Guaranteed Returns) का विकल्प अपना रहे हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 19, 2021, 4:24 PM IST
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नई दिल्ली. एक अप्रैल से नया वित्त वर्ष शुरू हो जाएगा. ऐसे में 31 मार्च तक इनकम टैक्स एक्ट (Income Tax Act) में बताए गए तरीकों में निवेश करने पर टैक्स छूट (Tax exemption) का आखिरी मौका है. इन्हीं से एक तरीका लाइफ इंश्याेरेंस (Life insurance) में निवेश करने का है. लेकिन अब 31 मार्च आने में इतने कम दिन बचे हैं कि हड़बड़ी में गलत पॉलिसी (Insurance Policy) आपके निवेश का रिटर्न प्रभावित कर सकती है.

विशेषज्ञों के मुताबिक इस समय कर-बचत की हड़बड़ी रहती है. इसलिए बीमा एजेंट आयकर अधिनियम(Income Tax Act) की धारा 80सी के तहत कर बचत का तरीका तलाश रहे लोगों को बीमा बेचने की पूरी कोशिश कर रहे हैं. यूलिट लिंक्ड बीमा (यूलिप, ULIP) पर कमीशन घट गया है, इसलिए अब एजेंट पारंपरिक बीमा बेचने पर जोर दे रहे हैं. बैंक सावधि जमा (एफडी FD) में रिटर्न कम होने से भी निवेशक गारंटीड रिटर्न (Guaranteed Returns) का विकल्प ढूंढ रहे हैं. आज हम आपको जीवन बीमा से जुड़े ऐसे ही टिप्स बताने जा रहे हैं, जिससे आपको निर्णय लेने में आसानी होगी.

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लंबी अवधि में मिलता है बीमा पॉलिसियों में गारंटीड रिटर्न
इस समय दो तरह की पारंपरिक योजना - नॉन पार्टिसिपेटिंग (नॉन-पार) और पार्टिसिपेटिंग (पार) हैं. बिजनेस स्टैंडर्ड की खबर के मुताबिक नॉन-पार में खरीदार को प्रीमियम और रिटर्न की जानकारी पहले से होती है. इंडियाफर्स्ट लाइफ इंश्योरेंस की मुख्य मार्केटिंग अधिकारी सोनिया नोटानी ने बताया कि नॉन पार प्लान में बीमा कंपनी बेहद लंबी अवधि में गारंटीड रिटर्न देती हैं, इसलिए ग्राहकों का निवेश जोखिम में नहीं पड़ता. उन्होंने बताया कि ग्राहकों को 99 साल की उम्र तक गारंटीड रिटर्न मुहैया कराने वाली योजना भी हैं, जबकि इस समय रिटेल निवेशकों के लिए ज्यादातर योजनाएं बमुश्किल 10 साल के लिए रिटर्न गारंटी देती हैं. नोटानी ने कहा कि नॉन-पार प्लान 30 साल के व्यक्ति को करीब पांच फीसदी आंतरिक रिटर्न दर दे सकते हैं.

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नॉन पार पॉलिसियों में गारंटीड से ज्यादा मिलता है रिटर्न



दूसरी ओर पार प्लान में बीमा प्रदाता कंपनी पूंजी की सुरक्षा मुहैया कराता है और निवेश के प्रदर्शन के हिसाब से बोनस भी देता है. नोटानी ने कहा कि 30 साल के व्यक्ति को पार प्लान में 6 फीसदी की आंतरिक दर से प्रतिफल मिल सकता है.

कम उम्र में पॉलिसी लेने पर ज्यादा रिटर्न

ऐसी योजनाओं में आंतरिक रिटर्न दर पर उम्र का असर पड़ता है. निवेश सलाहकार सीए हरिगोपाल पाटीदार बताते हैं कि 50 साल के व्यक्ति को नॉन पार प्लान खरीदने पर केवल 3 से 4 फीसदी का रिटर्न मिल सकता है. ऐसे में यह देखना चाहिए कि बीमा राशि प्रीमियम की कम से कम 10 गुनी हो. हो सकता है कि इस प्लान की बीमा राशि सालाना आय का 10 से 15 गुना कवर रखने की आपकी जरूरत को पूरा नहीं कर सके.

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बीमा पॉलिसियों में क्यों करना चाहिए निवेश?

कुछ लोग नियिमित रूप से बचत नहीं कर पाते. बीमा प्रीमियम के नाम पर उन्हें मजबूरन बचत करनी पड़ती है. कुछ लोग परिपक्वता पर मिलने वाली एकमुश्त रकम का किसी काम में इस्तेमाल भी कर लेते हैं. लैडरअप वेल्थ के प्रबंध निदेशक राघवेंद्र नाथ कहते हैं कि जो लोग पूंजी बाजार को नहीं समझते या अच्छे सलाहकार की सेवा नहीं ले सकते, उनके लिए ये योजनाएं अच्छी साबित हो सकती हैं. इन दिनों कुछ एचएनआई भी नॉन-पार योजनाएं खरीद रहे हैं. नोटानी ने कहा, 'उन्हें लगता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था बढ़ने पर ब्याज दरें घट सकती हैं, इसलिए वे मौजूदा दरों पर अपना पैसा लॉक करना चाहते हैं.' नाथ ने कहा, 'भारतीय स्टेट बैंक की एफडी दर 5 से 5.4 फीसदी हैं, जिस पर स्लैब के हिसाब से टैक्स लगता है. इसकी तुलना में कर मुक्त 5-6 फीसदी गारंटीशुदा प्रतिफल बहुत से लोगों को लुुभाएगा.

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25 साल बाद ब्याज दरों का अनुमान लगाना मुश्किल

पर्सनल फाइनेंस एक्सपर्ट सानिध्य अग्रवाल कहते हैं कि 25 साल बाद की ब्याज दरों का अनुमान लगाना मुश्किल है. इसमें उतार-चढ़ाव हो सकते हैं. अगर हम ऊंची महंगाई वाली अर्थव्यवस्था बने रहे तो ब्याज दरों में गिरावट आने की उम्मीद नहीं है. पूंजी बाजार को समझने वाले या सलाहकार की सेवा लेने वाले इन प्लान से दूर रह सकते हैं. वे टर्म प्लान और इक्विटी म्युचुअल फंडों की रणनीति अपना सकते हैं. नाथ ने कहा, '10 से 15 साल के दौरान आप इक्विटी म्युचअल फंडों से दो अंकों में रिटर्न अर्जित कर सकते हैं.' करीब सात साल गुजरते ही इक्विटी में पूंजी के नुकसान का जोखिम न के बराबर रह जाता है.

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