Home Loan के जरिये कई तरह से कर सकते हैं टैक्स छूट का दावा, जानें कैसे उठाया जाए फायदा

हम में से अधिकांश LIC, इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम (ELSS), होम लोन ईएमआई (Home loan EMI) आदि के लिए ECS डेबिट सुविधा का उपयोग करते हैं. कई बार टेक्निकल ग्लिच के कारण यह डिडक्शन नहीं हो पाता है. इसलिए ऐसे खर्च को लेकर अकाउंट डिटेल्स को चेक करें और उसे अपडेटेड रखें. इस तरह के किसी भी पेमेंट को चालू वित्त वर्ष के लिए 31 मार्च से पहले पूरा करें.

हम में से अधिकांश LIC, इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम (ELSS), होम लोन ईएमआई (Home loan EMI) आदि के लिए ECS डेबिट सुविधा का उपयोग करते हैं. कई बार टेक्निकल ग्लिच के कारण यह डिडक्शन नहीं हो पाता है. इसलिए ऐसे खर्च को लेकर अकाउंट डिटेल्स को चेक करें और उसे अपडेटेड रखें. इस तरह के किसी भी पेमेंट को चालू वित्त वर्ष के लिए 31 मार्च से पहले पूरा करें.

होम लोन (Home Loan) के जरिये टैक्‍सपेयर्स पुरानी कर व्‍यवस्‍था के तहत टैक्‍स डिडक्‍शन (Tax Deduction) का कई तरह से फायदा ले सकते हैं. वहीं, इनकम टैक्‍स (Income Tax) की नई व्‍यवस्‍था चुनने पर टैक्‍स की दरें (Tax Rates) कम हो जाएंगे, लेकिन आपको कोई टैक्‍स लाभ (Tax Benefits) छोड़ने पड़ेंगे. आइए जानते हैं कि होम लोन के जरिये कैसे टैक्‍स छूट पाई जा सकती है?

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 10, 2021, 8:07 PM IST
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नई दिल्‍ली. देश की संसद में इन दिनों बजट 2021 पर चर्चा हो रही है. इस दौरान वित्‍त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से की गईं बजटीय घोषणाओं पर चर्चा की जा रही है. बता दें कि बजट में आयकर दाताओं के लिए नए टैक्स स्लैब का एलान किया गया है. हालांकि, इसे अभी वैकल्पिक रखा गया है यानी करदाता मौजूदा कर व्यवस्था के तहत भी अपनी टैक्स देनदारी तय कर सकते हैं. मौजूदा कर व्यवस्था के तहत वेतनभोगी आयकरदाता की सालाना आय अगर 2.5 लाख रुपये से ज्यादा है तो वह आयकर के दायरे में आता है. हालांकि, रिबेट बेनिफिट के जरिये 5 लाख रुपये तक की आय टैक्स फ्री हो सकती है. आयकर कानून व्यक्तिगत करदाता और कंपनियों को कई तरह से टैक्स छूट की सहूलियत देता है. इनमें होम लोन के जरिये आप कई धाराओं के तहत टैक्स बचत कर सकते हैं.

प्रिंसिपल अमाउंट के रीपेमेंट पर धारा-80C के तहत छूट

होम लोन के प्रिंसिपल अमाउंट का रीपेमेंट करने पर आयकर कानून की धारा-80C के तहत 1.5 लाख रुपये तक की टैक्स छूट के लिए दावा किया जा सकता है. बता दें कि प्रॉपर्टी का निर्माण लोन लेने वाले वित्त वर्ष के खत्‍म होने से 5 साल के भीतर पूरा हो जाना चाहिए. अगर प्रॉपर्टी को 5 साल के अंदर ट्रांसफर या बेचा जाता है तो क्लेम किए गए टैक्स डिडक्शन को बिक्री के साल में आपकी इनकम में जोड़ा जाएगा. फिर आपके मौजूदा टैक्स स्लैब के मुताबिक इनकम टैक्स लगाया जाएगा.

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होम लोन के ब्‍याज पर 2 लाख रुपये तक की छूट मिलेगी

होम लोन पर ब्याज को निर्माण पूरा होने के पहले का ब्याज और निर्माण पूरा होने के बाद का ब्याज जैसी दो कैटेगरी में रखा गया है. निर्माण पूरा होने के बाद भुगतान किए गए ब्याज के लिए धारा-24b के तहत 2 लाख रुपये तक का टैक्स डिडक्शन मिलता है. यह छूट घर का निर्माण पूरा होने के साल से क्लेम की जा सकती है. हालांकि, ज्‍यादातर लोग निर्माणाधीन प्रॉपर्टी के लिए होम लेन लेते हैं. काम पूरा होने के बाद उन्‍हें उसका पजेशन मिलता है. लेकिन, होम लोन का भुगतान लोन लेने के तुरंत बाद शुरू हो जाता है. ऐसे लोगों के लिए धारा-24b के तहत निर्माण पूरा होने से पहले 5 साल तक के ब्याज पर 5 साल तक टैक्स छूट मिल सकती है. अगर कोई खरीदार अफोर्डेबल हाउसिंग कैटेगरी के तहत घर खरीद रहा है तो वह 3.5 लाख रुपये तक का डिडक्‍शन क्‍लेम कर सकता है.

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31 मार्च 2021 तक मिलेगा धारा-80EEA का फायदा

बजट 2019 में 1 अप्रैल 2019 और 31 मार्च 2020 के बीच लिए गए होम लोन के ब्याज भुगतान पर 1.5 लाख रुपये की अतिरिक्त छूट का ऐलान किया गया था. आयकर कानून की धारा-80EEA के तहत टैक्स छूट के लिए प्रॉपर्टी की कीमत 45 लाख रुपये तक होनी चाहिए. यह बेनेफिट केवल पहली बार घर खरीदने वाला व्यक्ति ही ले सकता है. बजट 2020 में इसका फायदा एक साल के लिए फिर बढ़ा दिया गया है. अब इसके तहत टैक्स छूट का फायदा 31 मार्च 2021 तक मिलेगा. स्टैम्प ड्यूटी, रजिस्ट्रेशन चार्ज और प्रॉपर्टी खरीदते समय किए जाने वाले दूसरे खर्च पर टैक्स छूट का दावा कर सकते हैं. इसके लिए धारा-80C के तहत 1.5 लाख रुपये तक की सीमा है.
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