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बैंक की एफडी में पैसे लगाना नहीं रहा फायदेमंद, मिल रहा है निगेटिव रिटर्न!

भारतीय बैंकों के डिपॉजिट्स पर   ब्‍याज दरों को लगातार घटाने के कारण निवेशकों को निगेटिव रिटर्न ि‍मिल रहा है.

भारतीय बैंकों के डिपॉजिट्स पर ब्‍याज दरों को लगातार घटाने के कारण निवेशकों को निगेटिव रिटर्न ि‍मिल रहा है.

भारत में पीढ़ी-दर-पीढ़ी लोगों ने निवेश के सबसे सुरक्षित विकल्‍प (Safest Investment Instrument) के तौर पर बैंक फिक्‍स्‍ड डिपॉजिट (FD) में पैसा लगाया है. उन्‍हें इस पर बिना किसी जोखिम ठीक-ठाक मुनाफा (Return) भी मिलता रहा है. बैंक पिछले कुछ समय से एफडी पर ब्‍याज दरों (Interest Rates) में लगातार कमी कर रहे हैं. इससे बढ़ती महंगाई के मुकाबले एफडी पर निगेटिव रिटर्न (Negetive Return) मिल रहा है.

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    नई दिल्‍ली. कोरोना संकट के पहले से ही बैंक डिपॉजिट्स (Bank Deposits) पर ब्‍याज दरों (Interest Rate) में लगातार कमी की जा रही है. इससे एफडी समेत सभी तरह के बैंक डिपॉजिट्स पर निवेशकों का मुनाफा कम होता हो जा रहा है. यहां तक कि बढ़ती महंगाई (Rising Inflation) के कारण आम निवेशक को बैंक डिपॉजिट्स से मिलने वाला वास्‍तविक रिटर्न निगेटिव (Negative Return) हो गया है. इस समय बैंक फिक्‍स्‍ड डिपॉजिट्स (FD) पर निवेशकों को सालाना 5-7 फीसदी रिटर्न मिल रहा है, जो कुछ साल पहले तक 8-10 फीसदी सालाना था.

    व्‍यवहारिक नहीं रह गई हैं एफडी पर मौजूदा ब्‍याज दरें
    भारत में पीढ़ी-दर-पीढ़ी लोगों ने निवेश के सबसे सुरक्षित विकल्‍प (Safest Investment Instrument) के तौर पर बैंक फिक्‍स्‍ड डिपॉजिट (FD) में पैसा लगाया है. उन्‍हें इस पर बिना किसी जोखिम ठीक-ठाक मुनाफा (Return) भी मिलता रहा है. क्‍वांटम म्‍यूचुअल फंड के एमडी व सीईओ जिमी पटेल ने कहा कि देश के ज्‍यादातर वरिष्‍ठ नागरिक एफडी में ही निवेश करने को सबसे सुरक्षित मानते हैं. वे कहते हैं कि एफडी में किए गए निवेश पर कोई जोखिम नहीं है और रिटर्न भी अच्‍छा मिलता है. हालांकि, अब हालात कुछ बदल गए हैं. दरअसल, वास्‍तविक मुनाफे को देखते हुए एफडी पर मौजूदा दरें व्‍यवहारिक नहीं रह गई हैं.

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    मौद्रिक नीति भी है निगेटिव रिटर्न के लिए जिम्‍मेदार
    हाल के महीनों में महंगाई का स्‍तर 6 फीसदी से ऊपर बना हुआ है. सप्‍लाई चेन में रुकावटों के कारण उपभोक्‍ता महंगाई दर जुलाई में करीब 7 फीसदी रही. वहीं, खाने-पीने की चीजों की महंगाई दर 9.6 फीसदी पर पहुंच गई. वहीं, ज्‍यादातर डिपॉजिट्स पर मौजूदा ब्‍याज दर 6 फीसदी से नीचे चल रही है. महंगाई के मुकाबले बैंक डिपॉजिट्स पर मिलने वाले ब्‍याज के आधार पर निवेशकों को अपनी बचत पर मिलने वाला वास्‍तविक रिटर्न निगेटिव हो गया है. इसके लिए कुछ हद तक रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की मौद्रिक नीति (Monetary Policy) को भी जिम्‍मेदार ठहराया जा सकता है.

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    'बैंक डिपॉजिट्स पर दरें 3 फीसदी से जा सकती हैं नीचे'
    केंद्रीय बैंक फरवरी 2019 से अब तक दरों में 250 आधार अंक या 2.50 फीसदी की कटौती कर चुका है. इसमें सबसे ज्‍यादा कटौती कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान की गई है. साथ ही भारतीय बैंकों में बहुत ज्‍यादा पूंजी निवेश (Capital Infusion) किया गया. इससे बैंकों को फिक्‍स्‍ड डिपॉजिट्स पर ब्‍याज दरों में कटौती करनी पड़ी. यहां तक कि सेविंग अकाउंट पर मिलने वाले ब्‍याज में भी जबरदस्‍त कटौती की गई है. पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के एमडी एसएस मल्लिकार्जुन राव ने कहा कि सेविंग रेट 3 फीसदी से भी नीचे जा सकते हैं, जो आम लोगों के लिए बड़ी चेतावनी है.

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    'बैंक फिक्‍स्‍ड डिपॉजिट्स का स्‍वर्णिम दौर हो गया खत्‍म'
    यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (UBI) के एमडी व सीईओ राजकिरण राय ने कहा कि बैंक डिपॉजिट्स पर मिलने वाला रिटर्न तब तक लोगों के लिए फायदेमंद नहीं होगा, जब तक कि महंगाई की दर 2 फीसदी पर ना पहुंच जाए. उन्‍होंने कहा कि बैंक एफडी का स्‍वर्णिम दौर खत्‍म हो चुका है. बड़ी संख्‍या में निवेशक दूसरे विकल्‍पों की तलाश कर रहे हैं. एक्सिस बैंक (Axis Bank) के एमडी व सीईओ अमिताभ चौधरी ने कहा कि अब बैंक डिपॉजिट्स पर 10 फीसदी ब्‍याज दर कभी देखने को नहीं मिलेगी. मुझे लगता है कि अब बैंक डिपॉजिट्स की मौजूदा दरें सामान्‍य बात हो जाएगी.

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